
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – ‘गुरुपूर्णिमा शिष्यों एवं साधकों के जीवन का सबसे बडा उत्सव है । इस उपलक्ष्य में हम तन, मन एवं धन का त्याग और गुरुसेवा कर गुरुदेवजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं । इसके अंतर्गत ‘ऑनलाइन’ गुरुपूर्णिमा का निमंत्रण देना, समाज के लोगों को ‘ऑनलाइन’ अर्पण देने हेतु बताना आदि धर्मसेवाएं कर सकते हैं ।’ हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक संत पू. नीलेश सिंगबाळजी ने ऐसा मार्गदर्शन किया ।
सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से २४ जुलाई को ‘ऑनलाइन’ गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया है । धर्मसत्संग में उपस्थित रहनेवाले धर्मप्रेमियों को इस गुरुपूर्णिमा का अधिकाधिक लाभ हो; इसके लिए एक ‘ऑनलाइन’ धर्मसेवा प्रशिक्षण सत्संग का आयोजन किया गया था । इस सत्संग में धर्मप्रचारक संत पू. नीलेश सिंगबाळजी ने मार्गदर्शन किया । उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, बंगाल एवं असम के धर्मप्रेमियों ने इस सत्संग का लाभ उठाया ।
क्षणिकाएं
१. इस अवसर पर पू. नीलेश सिंगबाळजी ने, वे स्वयं गुरुपूर्णिमा के दिन की गई सेवा के माध्यम से साधना में कैसे स्थिर हुए, इसके संदर्भ में अपने अनुभव बताए ।
२. परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ने अपने गुरु संत भक्तराज महाराजजी की किस प्रकार लगन से सेवा की, इसकी भी जानकारी पू. सिंगबाळजी ने दी ।
३. उत्तर प्रदेश के धर्मप्रेमी श्री. राहुल वर्मा ने बताया कि ‘इस मार्गदर्शन के कारण अब मैं सेवा करने के लिए आतुर हूं । मुझे इस गुरुपूर्णिमा का अधिकाधिक लाभ उठाना है ।’
४. सत्संग में जुडे अनेक धर्मप्रेमियों ने इस गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में सेवा करने की इच्छा व्यक्त की ।
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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