बद्रीनाथ धाम में भी दान की चोरी का आरोप

मंदिर समिति द्वारा जांच का आदेश

देहरादून (उत्तराखंड) – राज्य के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में दान की चोरी होने का संशय सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया) में व्यक्त किया जा रहा है । सामाजिक माध्यमों में यह समाचार बड़े स्तर पर प्रसारित होने के पश्चात ‘बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति’ ने इस प्रकरण की जांच का आदेश दिया है । श्रीराम मंदिर में दान की चोरी का आरोप लगने के पश्चात बद्रीनाथ धाम में भी इस प्रकार की चोरी होने से श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है ।

१. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सूचित किया कि सामाजिक माध्यमों द्वारा किए गए इन आरोपों को समिति ने अत्यंत गंभीरता से संज्ञान में लिया है । इस प्रकरण की गहन जांच हेतु एक विशेष समिति की स्थापना की गई है, साथ ही जिन कर्मचारियों पर संशय व्यक्त किया जा रहा है, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है ।

२. सामाजिक माध्यमों में यह आरोप लगाया गया कि इस प्रकरण का मुख्य आरोपी द्विवेदी का ‘निजी सचिव’ है । इस समाचार का खंडन करते हुए द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति उनका ‘निजी सचिव’ नहीं है । वह व्यक्ति मंदिर समिति का एक नियमित शासकीय कर्मचारी है । यदि अन्वेषण (जांच) में ये आरोप सत्य सिद्ध होते हैं, तो किसी भी दोषी का पक्षपोषण नहीं किया जाएगा तथा उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, ऐसा आश्वासन उन्होंने दिया ।

३. मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रंगड ने सूचित किया कि जांच समिति समस्त उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी के छायाचित्रों (फुटेज) एवं संबंधित व्यक्तियों के वक्तव्यों को लिपिबद्ध कर विवरण (रिपोर्ट) प्रस्तुत करेगी । यदि अन्वेषण के समय कोई भी अनाचार या अनियमितता पाई गई, तो ‘श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, १९३९’ एवं कर्मचारी आचार संहिता के अनुसार दोषियों पर कठोर वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी ।

४. यह एक संवेदनशील विषय होने के कारण जब तक आधिकारिक अन्वेषण पूर्ण नहीं हो जाता तथा सत्य सामने नहीं आता, तब तक नागरिक सामाजिक माध्यमों की किसी भी प्रकार की अपूर्ण सूचना पर विश्वास न करें एवं अपवाहें न फैलाएं, ऐसा आवाहन मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रंगड ने किया है ।

संपादकीय भूमिका

भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के विषय में ऐसा अपप्रचार करके हिन्दुओं के मंदिरों को अपकीर्त करने का यह कोई षड्यंत्र तो नहीं है ?, इसकी भी जांच होना आवश्यक !