Jamaat-e-Islami Protest : ढाका (बांग्लादेश) स्थित भारतीय दूतावास पर ‘जमात-ए-इस्लामी’ द्वारा मोर्चा निकालकर आक्रमण करने का प्रयास

गृहमंत्री अमित शाह का पुतला जलाया

ढाका (बांग्लादेश) – यहां कट्टरपंथी राजनीतिक दल ‘जमात-ए-इस्लामी’ ने भारतीय दूतावास की दिशा में मोर्चा निकाला एवं भारतीय दूतावास पर आक्रमण करने का प्रयास किया । कट्टरपंथियों के मोर्चे को ढाका पुलिस ने भारतीय उच्चायोग की ओर जाने से रोक दिया । बांग्लादेशी पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने इस संदर्भ में ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि को सूचित किया कि जमात-ए-इस्लामी के अनेक प्रमुख नेताओं ने अन्य इस्लामी दलों के साथ मिलकर ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग पर आक्रमण करने का प्रयास किया । उन्होंने भारत के गृहमंत्री अमित शाह का पुतला भी दहन किया तथा ‘बांग्लादेश आजाद पार्टी’ नामक एक नए मोर्चे के गठन की घोषणा की है ।

१. जमात-ए-इस्लामी तथा उसके नेतृत्व वाले ११ दलीय कट्टरपंथी मोर्चे ने भारत के विरुद्ध एक नया एवं बड़ा मोर्चा खोल दिया है । इस मोर्चे का मुख्य उद्देश्य भारत-बांग्लादेश सीमा पर कथित ‘पुश-इन’ अर्थात् बलपूर्वक सीमा पार कराने तथा ‘सीमा पर होने वाली गोलीबारी’ का विरोध करना है । बांग्लादेश में भारत के विरुद्ध अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है । मोर्चे ने कहा है कि राजधानी में गोलमेज (राउंड टेबल) परिचर्चा के साथ-साथ विभिन्न जिलों में सम्मेलनों का भी आयोजन किया जाएगा ।

२. १० जून को मोगबाजार स्थित जमात-ए-इस्लामी के केंद्रीय कार्यालय में मोर्चे ने एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया था । इसमें भारत के विरुद्ध देशव्यापी कार्यक्रम क्रियान्वित करने के विषय में बताया गया था । सीमावर्ती क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति पर गहन चिंता व्यक्त करते हुए मोर्चे की संपर्क समिति के समन्वयक तथा जमात के सहायक महासचिव ए.एच.एम. हामिदुर रहमान आजाद ने कहा कि देश राजनीतिक अस्थिरता, सीमा पर होने वाली हत्याओं तथा मूल्यवृद्धि जैसी समस्याओं से संघर्ष कर रहा है । जमात नेता ने आरोप लगाया कि विगत १०० दिनों में भारत के सीमा सुरक्षा बल की गोलीबारी में १९ बांग्लादेशी मारे गए एवं २४ घायल हुए हैं ।

३. जमात मोर्चे का दावा है कि विगत ३ महीनों में भारत की ओर से २ सहस्र ४०० से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को बलपूर्वक सीमा पार कराने का प्रयास किया गया है । (ध्यान दें कि इसी अवधि में बांग्लादेश में सैकड़ों हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों पर जमात मौन साधे बैठी है ! संपादक)

संपादकीय भूमिका

भारत सरकार और कितने दिनों तक बांग्लादेश की इन घटनाओं को केवल मूकदर्शक बनकर देखती रहेगी ?