Army Uniform 2026 : भारतीय सेना की औपनिवेशिक परंपराओं में परिवर्तन : सैन्य वर्दी की नई नियमावली लागू

सडकों एवं भवनों के नाम भी परिवर्तित किए गए

नई दिल्ली – भारतीय सेना ने अपनी परंपराओं में रहे औपनिवेशिक (ब्रिटिश कालीन) प्रतीकों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए सैन्य वर्दी की नई नियमावली ‘आर्मी यूनिफॉर्म-२०२६’ लागू की है । १७४ पृष्ठों की इस नियमावली में कई पुरानी ब्रिटिश कालीन प्रथाओं में परिवर्तन किया गया है । सेना ने स्पष्ट किया है कि ये परिवर्तन भारत की स्वतंत्र पहचान एवं राष्ट्रीय भावना के अनुरूप हैं ।

नए नियमों के अनुसार, परेड का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों (रिव्यूइंग ऑफिसर) के लिए तलवार धारण करना अब वैकल्पिक होगा । सैन्य भोज के समय पहने जानेवाले औपचारिक परिधान (मेस ड्रेस) के साथ उपयोग किए जानेवाले ‘पाउच बेल्ट’ को अनिवार्य नहीं रखा गया है । साथ ही ‘रॉयल’ जैसे शब्दों का प्रयोग भी बंद कर दिया गया है । औपचारिक नागरिक परिधान में पहली बार स्वदेशी बंद गले के कोट (बंदी जैकेट) को सम्मिलित किया गया है । यह जैकेट पूरी बांहों वाली शर्ट एवं पैंट के ऊपर पहनी जा सकेगी ।

सैनिकों के व्यक्तिगत आचरण एवं रहन-सहन के संबंध में भी दिशानिर्देश

नियमावली में सैनिकों के व्यक्तिगत रहन-सहन तथा आचरण के संबंध में भी स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं । बिना अनुमति दाढी बढाने, असामान्य हेयरस्टाइल रखने, दिखाई देनेवाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करने तथा टैटू (शरीर पर गुदवाए गए चित्र या लेखन) बनवाने पर प्रतिबंध लगाया गया है । इसके अतिरिक्त विवाह समारोहों, निजी पार्टियों, राजनीतिक या धार्मिक कार्यक्रमों तथा प्रदर्शनों में पूर्व अनुमति के बिना सैन्य वर्दी पहनने की अनुमति नहीं होगी ।

वर्ष २०२३ में भी कई पुरानी परंपराएं समाप्त की गई थीं

भारतीय सेना ने फरवरी २०२३ में भी अनेक पुरानी परंपराओं को समाप्त किया था । इनमें समारोहों में घोडा-गाडियों का उपयोग, सेवानिवृत्ति के समय आयोजित होनेवाला ‘पुल-आउट’ समारोह तथा रात्रिभोज के समय बजाए जाने वाले ‘पाइप बैंड’ सम्मिलित थे ।

सडकों एवं भवनों को दिए गए स्वदेशी नाम

भारतीय सेना ने इस वर्ष विभिन्न सैन्य ठिकानों पर स्थित २४६ सडकों, भवनों एवं सुविधाओं के नाम परिवर्तित कर औपनिवेशिक विरासत के चिह्नों को हटाने का अभियान भी चलाया है । इनके स्थान पर वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों तथा प्रतिष्ठित सैन्य नेताओं के नामों को प्राथमिकता दी गई है । अंबाला, मथुरा, जयपुर, बरेली, महू, देहरादून एवं कोलकाता स्थित विभिन्न सैन्य ठिकानों के ब्रिटिशकालीन नाम भी परिवर्तित कर दिए गए हैं ।