
वास्तु की रचना में परिवर्तन करना सामान्य व्यक्ति के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता । वास्तुदोषों के कारण वास्तु में उत्पन्न नकारात्मक स्पंदनों को दूर करने के लिए ‘वास्तुशुद्धि करना’ एक अत्यंत सुलभ एवं प्रभावी उपाय है । वास्तुशुद्धि की सुलभ पद्धतियां हैं – सात्त्विक उदबत्ती से शुद्धि करना, वास्तु में धूप दिखाना, तुलसीपत्र से घर में गोमूत्र का छिडकाव करना, नीम का धुआं दिखाना, घर में संतों की वाणी में भजन चलाना अथवा देवताओं का नामजप चलाए रखना आदि । ये आध्यात्मिक उपचार सरलता से किए जा सकते हैं ।
– श्री. राज कर्वे, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के विद्यालय में ‘लव जिहाद’ विषय पर व्याख्यान