विभिन्न वेदपुराणों में मिलनेवाला वास्तुशास्त्र का उल्लेख

वास्तुशास्त्र एक अत्यंत प्राचीन शास्त्र है । विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ ‘ऋग्वेद’ में भी वास्तुशास्त्र का उल्लेख मिलता है । ऋग्वेद में गृह को ‘वेश्म’ कहा गया है । अथर्ववेद में भी गांव बसाने के विषय में मार्गदर्शन किया गया है । सभी पुराणों में भी वास्तुशास्त्र का उल्लेख है । ‘अग्निपुराण’, ‘मत्स्यपुराण’, ‘नारदपुराण’ आदि में भुवन के निर्माण के विषय में अत्यंत सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया है । ‘अग्निपुराण’ में प्रासाद के निर्माण से पूर्व भूमि का परीक्षण करने के लिए कहा गया है । वर्ण के अनुसार कौन-सी भूमि लाभकारी है, इसका भी मार्गदर्शन ‘अग्निपुराण’ में किया गया है । ‘भागवत महापुराण’ में भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा से भगवान विश्वकर्मा द्वारा समुद्र में निर्मित द्वारकानगरी का वर्णन आया है । भारत में वास्तुशास्त्र का अत्यंत गहन अध्ययन किया गया है । भारत को वास्तुशास्त्रकारों की बडी परंपरा प्राप्त है । ‘मत्स्यपुराण’ में वास्तुशास्त्र के १८ आचार्याें का उल्लेख है ।

१. ऋग्वेद

विश्व के प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में गृह को ‘वेश्म’ कहा गया है ।

भोजस्येदं पुष्करिणीव वेश्म परिष्कृतं देवमानेव चित्रम् ।

– ऋग्वेद, मण्डल १०, सूक्त १०७, ऋचा १०

अर्थ : कमलों से भरे सरोवर की भांति उदार गृहस्थ का सुशोभित गृह देवताओं को शोभा देनेवाला है । इस वाक्य में वास्तु के सुशोभिकरण के विषय में उल्लेख है ।

२. अथर्ववेद

श्री. श्रेयस पिसोळकर

इसमें वास्तु में वास करनेवाले अग्नि एवं श्रीविष्णु से घर को रत्नों एवं धन से युक्त करने के विषय में प्रार्थना की गई है ।

३. रामायण

राजा दशरथ के समय हमारे राष्ट्र में वास्तुशास्त्र उच्च शिखर पर था । अयोध्यानगरी की संपूर्ण रचना वास्तुशास्त्र के अनुसार की गई थी ।

४. महाभारत

महाभारत में अनेक स्थानों पर वास्तुशास्त्र के उपयोग का उल्लेख मिलता है । द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों को शस्त्रास्त्रों की प्रदर्शनी दिखाने के लिए रंगमंडप तैयार किया था तथा उसे तैयार करते समय उन्होंने वास्तुशास्त्र का संपूर्ण रूप से उपयोग किया था ।

अनेक पुराणों एवं स्मृतिग्रंथों में वास्तुशास्त्र का उल्लेख है । हिन्दू धर्म के अन्य पंथों में भी वास्तुशास्त्र का उल्लेख है । जैन संप्रदाय में मंदिर के निर्माणकार्य हेतु प्राकृत भाषाओं में वास्तुग्रंथों की निर्मिति की गई । प्राकृत भाषा में वास्तुविशेषज्ञ को ‘थवई’ कहा गया है ।

इजिप्त के पिरैमिड्स में कुछ स्थानों पर वैष्णव तिलक लगाए हुए कारीगरों का चित्र मिला है । अर्थात ‘उन पिरैमिड्स के रचनाकार भारतीय थे’, यह इससे ध्यान में आता है । उसी प्रकार इटली की वैटिकन सिटी में खडे बडे-बडे शिवलिंग हम देख सकते हैं । अमेरिका के पुरातत्त्वीय खुदाई में श्री गणेश की मूर्ति मिली है ।

मुसलमान आक्रांताओं द्वारा वास्तुशास्त्र से संबंधित अनेक ग्रंथ; संस्कृत; साथ ही प्राकृत भाषा के ग्रंथ जलाकर नष्ट किए जाने से पूरे विश्व के लिए उपयोगी ज्ञान नष्ट हुआ । इसके साथ ही अनेक मंदिरों की तोडफोड की जाने से वास्तुकला के उत्तम उदाहरण अनेक मंदिर नष्ट हुए ।

– श्री. श्रेयस पिसोळकर (वास्तुविशारद, ज्योतिष होराभूषण, होरारत्न), फोंडा, गोवा.

वेदकाल से विकसित वास्तुशास्त्र तथा विज्ञान का उत्कृष्ट उदाहरण हैं ‘हिन्दुओं के मंदिर !’

वेदकाल से ही वास्तुशास्त्र के विकसित होने के प्रमाण के रूप में भारत के मंदिरों की ओर देखा जा सकता है । इन मंदिरों की निर्मिति में विज्ञान एवं अध्यात्म का सुंदर समन्वय दिखाई देता है । मंदिरों के वास्तुशास्त्र का अध्ययन कर समाज में उसका अवतरण करना ही वर्तमान विज्ञानयुग के वास्तुवैज्ञानिकों के लिए बडी चुनौती है ।