Bangladeshi infiltrators : तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने घुसपैठियों को भारतीय पहचान पत्र उपलब्ध कराए !

  • बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल में घुसपैठ के लिए दलालों द्वारा सहायता प्रदान किए जाने का रहस्योद्घाटन !

  • अनेक व्यक्तियों ने कई बार मतदान भी किया !

  • विशेष गहन पुनरावलोकन (SIR) के कारण घुसपैठियों का होना उजागर हुआ

कोलकाता (बंगाल) – बंगाल में भाजपा की सरकार आने के पश्चात बांग्लादेशी घुसपैठियों को खोजकर उन्हें निष्कासित करने का आदेश दिए जाने के बाद, बांग्लादेशी स्वयं ही पलायन करने लगे हैं । जब उनसे यह पूछा गया कि वे भारत में कैसे प्रविष्ट हुए ? तब उन्होंने बताया कि उन्होंने नदी पार करके भारत में प्रवेश किया था । कुछ व्यक्तियों ने बताया कि ‘दलालों’ अथवा मध्यस्थों ने अंधकार का अनुचित लाभ उठाकर सीमा पार करने में उनकी सहायता की । एक व्यक्ति ने कहा, “सुरक्षाबलों की गश्त न होने के समय में मात्र १० मिनट में भारत में प्रवेश किया जा सकता है” । इसके साथ ही कुछ प्रवासियों ने दावा किया कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें पहचान पत्र प्राप्त करने में सहायता की थी । इसके कारण उन्हें भारतीय योजनाओं का लाभ भी प्राप्त हुआ तथा उन्होंने मतदान भी करने की बात स्वीकार की । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरावलोकन के पश्चात उनके पहचान पत्र निरस्त हो जाने के कारण तथा भाजपा सरकार द्वारा उन्हें निष्कासित किए जाने के भय से वे अब स्वयं ही बांग्लादेश लौट रहे हैं ।

दलालों को धन देकर की जाती है घुसपैठ !

बांग्लादेश के कुश्तिया जनपद के एक काष्ठकार ने सूचना दी कि मध्यस्थ को ७-८ सहस्र रुपये देकर रात्रि के समय सीमा सुरक्षा बल के सैनिकों की गतिविधियों पर दृष्टि रखी जाती है तथा जैसे ही गश्त में समय मिलता है, लोगों को सीमा पार करा दी जाती है । सीमा पर सैनिक तैनात होने के उपरांत भी एक दलाल को २० सहस्र रुपये देकर सीमा पार करने का दावा एक अन्य प्रवासी ने किया ।

तृणमूल कांग्रेस सरकार ने दिया शासकीय योजनाओं का लाभ !

कुछ प्रवासी महिलाओं ने बताया कि जब ममता बनर्जी की सरकार सत्ता में थी, तब उन्होंने मतदाता पहचान पत्र तथा राशन कार्ड बनवाए थे । इसके साथ ही तृणमूल के लोगों की सहायता से उन्होंने २-३ वर्ष तक ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का लाभ भी लिया था ।

संपादकीय भूमिका

घुसपैठियों की सहायता करने वाली तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध देशद्रोह का अभियोग पंजीकृत कर उस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए !