Kolkata Runway Mosque : कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित पुरानी मस्जिद हटाई जाएगी ।

हवाई अड्डा प्रबंधन द्वारा कई बार सरकार को सूचित करने के उपरांत भी, विमानों के लिए संकटकारी मानी जा रही मस्जिद के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई ।

कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित पुरानी मस्जिद

कोलकाता (बंगाल) – कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित कई दशक पुरानी मस्जिद को हटाने के प्रयास तेज हो गए हैं । जिला प्रशासन तथा हवाई अड्डा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने मस्जिद स्थल का निरीक्षण किया । इसके पश्चात राज्य प्रशासन तथा मस्जिद समिति के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्त्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में हवाई अड्डे की सुरक्षा की बात कहते हुए मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने पर बल दिया गया ।

यह १३६ वर्ष पुरानी ‘गौरीपुर जामे मस्जिद’ (जिसे ‘बांकरा मस्जिद’ भी कहा जाता है) कभी एक बडे निर्जन क्षेत्र में स्थित थी, परंतु हवाई अड्डे के लगातार विस्तार के कारण आज यह रनवे के बहुत पास एक संवेदनशील क्षेत्र में आ गई है ।

विमानों की सुरक्षा के लिए बडा संकट

उत्तर २४ परगना जिला दंडाधिकारी कार्यालय में हुई बैठक में हवाई अड्डा अधिकारियों ने मानचित्र के माध्यम से समझाया कि मस्जिद के होने के कारण विमानों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर चुनौतियां तथा तकनीकी कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं । मस्जिद समिति की ओर से बैठक में उपस्थित पूर्व विधायक सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि हम इस पर अकेले निर्णय नहीं ले सकते । आप बडे मुस्लिम संगठनों से संपर्क करें ।

इस संबंध में हवाई अड्डा निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि हवाई अड्डे के भीतर स्थित यह मस्जिद लंबे समय से विवाद का विषय रही है। इससे विमान यातायात में आनेवाली कठिनाइयों के बारे में हमने कई बार सरकार को सूचित किया है । इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है तथा हमें उम्मीद है कि शीघ्र ही कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा ।

जांच के उपरांत नमाज पढनेवाले बस से जाते हैं

वर्तमान में दिन में ५ बार नमाज अदा करने के लिए १० से २५ स्थानीय मुसलमान यहां आते हैं । प्रवेश द्वार पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल उनकी कडी जांच करता है । इसके पश्चात उन्हें एक विशेष बस द्वारा रनवे पार कर मस्जिद तक ले जाया जाता है तथा नमाज के उपरांत वापस प्रवेश द्वार तक छोडा जाता है । शुक्रवार की नमाज के समय यह संख्या ८० तक पहुंच जाती है । (कितना यह अनावश्यक जटिल प्रबंध है, मुसलमानों के अत्यधिक तुष्टीकरण के कारण ही अब तक यह व्यवस्था चलने दी गई । अब यह मस्जिद हटाई ही जानी चाहिए, ऐसा किसी भी व्यावहारिक एवं राष्ट्रहित सोचनेवाले नागरिक को लगेगा – संपादक)

संपादकीय भूमिका

मुसलमानों के तुष्टीकरण के कारण ही यह सब चलता रहा । जनता की जान को संकट में डालनेवाली उत्तरदायी तृणमूल कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों पर अब कार्यवाही होनी चाहिए ।