केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अन्वेषण में हुआ उजागर !
धन के अत्यधिक लोभ के कारण प्रा. शिवराज मोटेगांवकर ने किया कुकृत्य !
पी.वी. कुलकर्णी ने १३२ प्रश्नों को किया लीक !

मुंबई – ‘नीट’ प्रश्नपत्र लीक प्रकरण का मुख्य सूत्रधार ‘रेणुकाई केमिस्ट्री कोचिंग क्लासेस’ का संचालक प्रा. शिवराज मोटेगांवकर है । उसने धन के अत्यधिक लोभ के कारण ‘एन.टी.ए.’ (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी- NTA, अर्थात राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी) की मुख्य प्रश्नपत्र निर्माण समिति में अपने व्यक्तियों को नियुक्त पकरवाया था । यह अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अन्वेषण से पता चला है । उसने अपनी कोचिंग क्लास के प्रा. पी.वी. कुलकर्णी तथा मॉडर्न महाविद्यालय की ‘जीव विज्ञान’ विषय की प्राध्यापिका मनीषा मांडरे को एजेंसी की मुख्य समिति में सम्मिलित करवाया । प्रा. मांडरे विगत ५ वर्षों से ‘एन.टी.ए.’ में विषय विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत थीं, इसलिए उन्हें उस कार्यालय की संपूर्ण जानकारी थी ।
‘परीक्षा केंद्र से जानकारी चोरी होने पर पकडे जाने’ के भय से कुलकर्णी तथा मांडरे ने प्रश्नों को कंठस्थ कर लिया । बाहर आने के पश्चात उन्होंने उन प्रश्नों को लघु पर्चियों तथा कागजों पर लिखकर मोटेगांवकर को सौंप दिया । मोटेगांवकर ने उन हस्तलिखितों की पी.डी.एफ. बनाकर ‘टेलीग्राम’ के माध्यम से उसे करोड़ों रुपयों में विक्रय कर दिया । ३ मई को परीक्षा समाप्त होते ही उसने साक्ष्यों को नष्ट करने के उद्देश्य से अपने दूरभाष (मोबाइल) से डेटा हटा दिया था; परंतु ‘सीबीआई’ के साइबर विशेषज्ञों ने उस डेटा को पुनः प्राप्त कर मोटेगांवकर को बंदी बना लिया ।
‘नीट’ परीक्षा के लिए कुल ४ सेट सिद्ध (तैयार) किए जाते हैं । उनमें से ३ सेटों के अनुवाद का कार्य प्रा. कुलकर्णी के पास था । उसके पास कुल १३५ प्रश्नों की प्रत्यक्ष जानकारी उपलब्ध थी । उसने १३५ प्रश्नों में से १३२ प्रश्न चुराकर मोटेगांवकर को दे दिए थे । कुलकर्णी ने इन प्रश्नों को मौखिक रूप से बताया तथा मोटेगांवकर ने उन्हें लिख लिया ।
‘नीट’ प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में बंदी बनाए गए शुभम खैरनार की पूछताछ से अनेक नाम सामने आए हैं, जिसके कारण नासिक के अनेक प्रतिष्ठित कोचिंग क्लासेस तथा शैक्षणिक संस्थानों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने नोटिस भेजा है ।
मोटेगांवकर की कोचिंग क्लास का अनधिकृत भवन ढहाया जाएगा !नये उद्योगपतियों को प्रोत्साहन देने तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने २० नवंबर १९६३ को ९९ वर्षों के पट्टे (अनुबंध) पर लातूर नगर के मध्य क्षेत्र की २६ एकड ३२ गुंठा जितनी बड़ी भूमि ‘औद्योगिक वसाहत सहकारी संस्था’ (उद्योग भवन) को प्रदान की थी । इस भूमि पर औद्योगिक कारखाने प्रारंभ करना अनिवार्य होते हुए भी, विगत कुछ वर्षों में वहां करोड़ों रुपयों के आलीशान तथा बहुमंजिला निजी कोचिंग क्लासेस निर्मित हो गए । इसी में मोटेगांवकर की कोचिंग क्लास का भवन भी सम्मलित था । जिला उद्योग केंद्र ने ‘उद्योग भवन’ को २० से अधिक नोटिस भेजे गए हैं । अब केंद्र सरकार ने ‘इन अनधिकृत भवनों को ढहाने के आदेश महानगरपालिका को दिए जाएं’, ऐसा प्रत्यक्ष पत्र राज्य उद्योग निदेशालय को भेजा है । |
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