लातूर (महाराष्ट्र) के आर्.सी.सी. निजी शिक्षावर्ग के निदेशक शिवराज मोटेगांवकर को बंदी बनाया गया

  • ‘नीट’ परीक्षा महाघोटाला प्रकरण 

  • परीक्षा के १० दिन पूर्व ही पेपर प्राप्त किया था

शिवराज मोटेगांवकर

लातूर – ‘नीट’ परीक्षा पेपरलीक प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण विभाग ने यहां के प्रसिद्ध ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ (आर्.सी.सी.) निजी शिक्षावर्ग के निदेशक प्रा. शिवराज मोटेगांवकर से ११ घंटे तक लंबी पूछताछ कर उसे अपने अधिकार में बंदी बना लिया (हिरासत)। मोटेगांवकर ने ३ मई के ‘नीट’ परीक्षा का पेपर १० दिन पूर्व अर्थात २३ अप्रैल को ही प्राप्त किया था । अन्वेषण के समय उसके चल-दूरभाष में ‘नीट’ का मूल पेपर तथा उसका उत्तरपत्र मिला । उसने यह पेपर विवेक पाटिल नाम के व्यक्ति को तथा कुछ विशेष छात्रों को भेजा था । १४ मई को लातूर स्थित उसके आवास पर छापामारी की गई थी । परीक्षा समाप्त होते ही उसने चल-दूरभाष में स्थित सभी तकनीकी प्रमाण एवं जानकारी हटा दी थी । अब वह लाभधारक छात्रों के नाम बताने में टालमटोल कर रहा है ।

सामाजिक माध्यमों पर बडे स्तर पर प्रसारित इस प्रकरण से संबंधित वीडियों में मोटेगांवकर छात्रों के साथ संवाद करता हुआ दिखाई दे रहा है ।

कौन है प्रा. शिवराज मोटेगांवकर ?

शिवराज मोटेगांवकर स्थानीय शिक्षाक्षेत्र में ‘एम् सर’ के नाम से जाना जाता है । वर्ष १९९९ में उसने केवल १० छात्रों को लेकर अपने निजी शिक्षावर्ग का आरंभ किया था । कुछ वर्ष उपरांत यह निजी शिक्षावर्ग ‘आर्.सी.सी.’ नाम से विख्यात हुआ ।

संपादकीय भूमिका

शिक्षाक्षेत्र के लिए कलंक बने ऐसे महाठगों को आजीवन कारावास का दंड देकर उनसे ब्याज के सहित आर्थिक दंड लिया जाना चाहिए ।