इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी चौक पुन: जैन मंदिर चौक बन गया !

लाहौर (इस्लामाबाद) – गत २ महीनों में लाहौर के ९ स्थलों के इस्लामी नाम बदलकर उनके मूल हिन्दू या ब्रिटिश काल के आधार पर पुनः नामकरण किया गया है । इनमें इस्लामपुरा अब पुराने ‘कृष्णनगर’ एवं ‘बाबरी मस्जिद चौक’ अब पुराने ‘जैन मंदिर चौक’ के नाम से आधिकारिक रूप से पहचाना जाएगा । इनके फलक भी लगाए गए हैं । विषेश बात यह है कि इस परिवर्तन के विरुद्ध वहां कोई कट्टरपंथी समूह समक्ष नहीं आया ।
नामकरण के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध एवं खैबर पक्तूनख्वा प्रांतों में भी मूल नामों की घोषणा संभव है । नगर में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया १९९० के दशक में बाबरी ढांचे के गिराने के उपरांत प्रारंभ हुई थी । तब केंद्र में नवाज शरीफ, उपरांत में बेनजीर एवं परवेज मुशर्रफ की सरकारें थीं । अब शरीफ सरकार ने नाम परिवर्तन का निर्णय लिया है । किसी भी जिहादी संगठन ने इसका विरोध नहीं किया ।
१. जैन मंदिर के पास अनारकली परिसर के मौलाना वाजीद कादरी का मानना है कि इस्लाम को मंदिर या गुरुद्वारे को लेकर कोई समस्या नहीं है । १९९० के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम परिवर्तित कर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया था । यह एक राजनैतिक निर्णय था । हमने इसे कभी ‘बाबरी मस्जिद चौक’ नहीं कहा । हमें समझना चाहिए कि हमारे पूर्वजों ने ये हिन्दू नाम रखे थे, एवं वे भी मुसलमान ही थे । इससे उनके ईमान (निष्ठा) को कोई धक्का नहीं पहुंचा था ।
२. लाहौर के बीकन हाउस विश्वविद्यालय के प्रो. साद मलिक ने कहा कि यह वास्तव में एक सुखद परिवर्तन है । मैं इसे सदा लक्ष्मी चौक ही कहता आया हूं; क्योंकि मेरे पिता इसे इसी नाम से बुलाते थे । नगरपालिका ने अपने प्रपत्रों में इसका नाम भले ही मौलाना जफर अली चौक किया हो; पर मेरे एवं मेरे जैसे कई लोगों के लिए लक्ष्मी चौक उस विरासत का भागहै, जिसका जफर अली खान के नाम से कोई संबंध नहीं है । लक्ष्मी चौक पीढीयों से जुडा नाम है ।
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