केवल पर्यटन के लिए परमिट होने के बाद भी बस का अवैध रूप से यात्री परिवहन में उपयोग किए जाने का खुलासा !

दिल्ली में बस में हुए बलात्कार का प्रकरण

नई दिल्ली – यहां ११ मई की रात जिस चलती ‘स्लीपर’ बस में चालक एवं परिचालक ने एक महिला के साथ बलात्कार किया था, वह बस बिहार की होने तथा उसका परमिट केवल पर्यटन के लिए होने के उपरांत भी, उसका अवैध रूप से यात्री परिवहन के लिए उपयोग किए जाने का खुलासा पुलिस जांच में हुआ है । यह बस दिल्ली से बिहार मार्ग पर चलती है ।

बस में पर्दे लगे होने के कारण किसी को भनक नहीं लगी !

प्राथमिक जांच में सामने आया कि बस में पर्दे लगे हुए थे । इसलिए बाहर से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था । बस वातानुकूलित (एसी) होने के कारण उसकी खिडकियां बंद थीं । इस वजह से पीडिता की चीखें बाहर सुनाई नहीं दीं तथा पर्दे लगे होने के कारण सडक पर चल रहे अन्य लोगों को भी घटना की जानकारी नहीं हो सकी । बस से वैज्ञानिक पद्धति से साक्ष्य एकत्र करने के लिए दल (‘फॉरेंसिक टीम’) को बुलाया गया है ।

बस पर पहले से ही यातायात नियमों के उल्लंघन के कई परिवाद प्रविष्ट !

जांच में यह भी सामने आया है कि अपराध में उपयोग की गई बस साई दृष्टि प्रायवेट लिमिटेड नामक संस्था के नाम पर बिहार के गोपालगंज जिले में पंजीकृत है । इस बस पर १० लाख रुपये से अधिक का आर्थिक दंड बकाया है । वर्ष २०२४ में उसका पंजीकरण हुआ था । बस के मालिक का नाम हैप्पी मल्होत्रा है, जो गोपालगंज जिले के रामपुर सदौवा गांव का निवासी है । उसकी बस पर पहले भी यातायात नियमों के उल्लंघन के १२ परिवाद प्रविष्ट किए गए हैं । इनमें बीमा की कमी, क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना एवं सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना समाहित है ।

संपादकीय भूमिका

नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन हो रहा था तब संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे ? उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए !