दौंड (पुणे) नगर में ३ दशकों के विलंब के पश्चात ८ अनधिकृत पशुवधगृह ध्वस्त !

शासकीय भूमि पर स्थित पशुवधगृहों में प्रतिदिन निर्बाध गोहत्या !

पुणे – दौंड नगर के खाटीक गली, कसाई मोहल्ला एवं भीमा नदी तट स्थित ईदगाह मैदान क्षेत्र के ८ अनधिकृत पशुवधगृह ३ दशकों के विलंब के पश्चात ११ मई के दिन भूधराशायी कर दिए गए हैं । शासकीय भूमि पर स्थित इन पशुवधगृहों में निर्बाध रूप से गोहत्या की जा रही थी । भीमा नदी की पूर-रेखा (Flood line) में शासकीय भूमि पर इन पशुवधगृहों का निर्माण किया गया था । दौंड पुलिस स्थानक के अधिकारी एवं कर्मचारियों सहित पुणे ग्रामीण पुलिस दल का अतिरिक्त पुलिस बल कार्रवाई के समय तैनात किया गया था ।

गोरक्षकों द्वारा समय-समय पर पुणे ग्रामीण पुलिस दल के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई सूचना के अनुसार दौंड पुलिस ने इन अवैध पशुवधगृहों पर छापे मारकर गोमांस हस्तगत करने के साथ ही संबंधितों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किए हैं; परंतु दौंड नगरपालिका प्रशासन इन पशुवधगृहों की ओर जानबूझकर दुर्लक्ष कर रहा था । (ऐसे दोषी एवं कर्तव्यच्युत अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए ! – संपादक) इन पशुवधगृहों से अनियंत्रित रूप से प्रतिदिन गोहत्या की जा रही थी तथा गोमांस का परिवहन मुंबई, पुणे एवं अन्य क्षेत्रों में किया जा रहा था । दौंड नगर एवं परिसर के अवैध पशुवधगृह, चर्म गोदाम, गोमांस विक्रय तथा भंडारण हेतु निर्मित पत्रे के शेड तत्काल हटाने की मांग प्रलंबित थी ।

गोमांस के अवशेष एवं रक्त का भीमा नदी में किया जा रहा था विसर्जन !

गोहत्या के पश्चात गौ का रक्त एवं अनावश्यक मांस का परिसर भीमा नदी में विसर्जन किया जा रहा था । इसके कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का गंभीर प्रश्न उपस्थित होने से नगरपालिका प्रशासन ने कार्रवाई हेतु पहल की । दौंड पुलिस स्थानक के निरीक्षक गोपाल पवार एवं दौंड नगरपालिका के मुख्याधिकारी अवधूत तावडे के मार्गदर्शन में संयुक्त रूप से यह कार्रवाई संपन्न हुई । (पवित्र भीमा नदी के तल में गोमांस के अवशेष एवं रक्त छोडा जाना, यह केवल पर्यावरण का ह्रास नहीं अपितु हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं एवं श्रद्धा का अपमान है । प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं नगरपालिका ने इतने वर्षों तक इस ओर अनदेखी क्यों किया ? पर्यावरण के नाम पर हिन्दुओं के उत्सवों का विरोध करने वाले तथाकथित पर्यावरणवादी अब इस प्रदूषण के विषय में मौन क्यों हैं ? – संपादक)

गोहत्या करने वाली धर्मांधों की गिरोह सीमापार !

पुणे ग्रामीण पुलिस दल के अधीक्षक संदीपसिंह गिल ने २३ मार्च के दिन दौंड परिसर में गोहत्या करने वाली गिरोह के सदस्य हसन उर्फ लड्डू लाला कुरेशी, जमील कुरेशी एवं फैजान कुरेशी को २ वर्षों के लिए सीमापार (तडीपार) कर दिया है । गोहत्या कर गोमांस का परिवहन एवं विक्रय करने वाली गिरोह के इन तीनों को पुणे ग्रामीण पुलिस सीमा के दौंड, बारामती, हवेली एवं इंदापुर तहसील तथा अहिल्यानगर जनपद की श्रीगोंदा तहसील से सीमापार किया गया है । (यह कार्रवाई अर्थात अपराधियों को अन्य स्थानों पर अपराध करने की स्वतंत्रता ही है ! क्या ऐसी शिक्षा से गोवंश हत्या रुकेगी ? – संपादक)

संपादकीय भूमिका

  • प्रशासन के नेत्र खुलने में ३० वर्ष क्यों लगे ? पशुवधगृह अनधिकृत होने पर भी उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
  • राज्य में ‘गोवंश हत्याबंदी’ कानून लागू होने पर भी शासकीय भूमि पर ३० वर्षों तक पशुवधगृह संचालित होना, यह सरकारी तंत्र की बडी विफलता है !