Bihar Police Tilak Controversy : वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने तिलक लगाया तो होगी कार्यवाही !

बिहार के पुलिस महानिदेशक की चेतावनी !

पुलिस महानिदेशक विनय कुमार

पाटलीपुत्र (बिहार) – वर्दीधारी पुलिसकर्मियों द्वारा कर्तव्य पर रहते हुए मस्तक पर तिलक अथवा किसी भी प्रकार का धार्मिक चिन्ह लगाने पर उनके विरुद्ध अनुशासनहीनता की कार्यवाही की जाएगी , ऐसी चेतावनी बिहार राज्य के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने राज्य के सभी पुलिसकर्मियों को दी ।

वे आगे बोले कि , पुलिसकर्मियों को टोपी धारण करना एवं बेल्ट लगाना अनिवार्य है । वैसा न करनेवाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्यवाही की जाएगी । वर्दीधारी पुलिसकर्मी दसों अंगुलियों में अंगूठियां नहीं पहन सकते । महिला पुलिसकर्मियों पर भी कर्तव्य पर रहते हुए अति श्रृंगार करने , अथवा आभूषण पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया है । पुलिस दल में एकजुटता एवं व्यावसायिक छवि बनाए रखना , इसके पीछे का उद्देश्य बताया जा रहा है ।

अनेक संगठनों का आक्षेप !

इस आदेश का ‘विश्वामित्र सेना’ संगठन के राष्ट्रीय निमंत्रक राजकुमार चौबे ने विरोध किया है एवं इस आदेश को धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया है । चंदन एवं तिलक सनातन परंपरा अथवा श्रद्धा के प्रतीक हैं तथा उन पर प्रतिबंध लगाना अनुचित है ।

क्या है नियम ?

‘बिहार पुलिस मैनुअल १९७८’ के अनुसार कर्तव्य पर उपस्थित किसी भी पुलिसकर्मी को किसी भी धर्म का चिन्ह , प्रतीक अथवा पहनावा प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है । इसमें हिन्दू धर्म का तिलक अथवा चंदन एवं इस्लाम के अनुसार रखी जानेवाली दाढी , इन पर समान रूप से प्रतिबंध लागू है । वर्दी में उपस्थित पुलिसकर्मी किसी एक धर्म अथवा समुदाय का प्रतिनिधि न लगकर राज्य का प्रतिनिधि दिखाई दे , इसके पीछे का यही मूल उद्देश्य है । तथापि इस नियम में सिख धर्म को विशेष छूट दी गई है । नवरात्र में तिलक लगाने हेतु अथवा रमजान में दाढी रखने हेतु वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अग्रिम अनुमति लिखित रूप में लेना अनिवार्य है । अनुमति के बिना ऐसा करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है ।

संपादकीय भूमिका

  • स्वयं को ‘सेक्युलर’ कहनेवाले पुलिसकर्मी सदैव हिन्दुओं पर ही अपना शौर्य कैसे दिखाते हैं ? पुलिसकर्मियों का पहनावेवाला ‘सेक्युलर’ स्वरूप व्यवहार में कब दिखाई देगा ?
  • भारतीय संस्कृति एवं हिन्दू धर्म भारत की आत्मा हैं , ऐसा कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अभी कुछ दिन पूर्व ही कहा है । ऐसा होते हुए भी ऐसे निर्णयों को तुगलकी नहीं, तो और क्या कहें ? हिन्दुओं में अपनी अस्मिता के प्रति चेतना के अभाव के कारण ही ऐसे फतवे निकाले जाते हैं , यह भी सत्य है !