‘पिछले एक महीने से भारत में प्रत्यक्ष रूप से युद्ध आरंभ नहीं हुआ है, तब भी खाडी क्षेत्र में चल रहे युद्ध का प्रभाव भारत पर पड रहा है । इसमें एक विशेष बात सामने आई है कि पिछले १५ दिनों में भारत के विभिन्न जिलों और सैन्य ठिकानों पर विदेशी जासूसों की गतिविधियां देखी गई हैं । इसमें कुछ भारत के सूर्याजी पिसाळ भी शामिल थे । (टिप्पणी : छत्रपति संभाजी महाराज के काल में सूर्याजी पिसाळ सातारा जिले के वाई का वतनदार था । उसने मुगलों के साथ मिलकर स्वराज्य से विश्वासघात किया था ।) कुछ स्थानों पर हथियार भी जब्त किए गए । देश में आंतरिक विद्रोह फैलाने के लिए अमेरिका का एक तथा यूक्रेन के कुछ घुसपैठियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की जानकारी मिली है । इस पृष्ठभूमि से यह स्पष्ट है कि युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं चल रहा, अपितु उसकी गंभीरता देश के भीतर भी उतनी ही चिंताजनक है । इसलिए इन देशद्रोहियों की छानबीन करने के लिए सरकार को अभियान चलाकर वास्तविक युद्ध आरंभ होने से पहले ही उन्हें नियंत्रित करना आवश्यक है, अन्यथा युद्धकाल में ये कितने खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ।
१. देशद्रोहियों को समय रहते नियंत्रित करने की आवश्यकता !
वर्तमान में पाकिस्तान में कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आतंकवादियों को मारने की खबरें समय-समय पर सामने आती हैं । ये अज्ञात लोग कौन हैं, यह ज्ञात नहीं; परंतु सरकार को देश के भीतर के शत्रुओं को खोजने पर भी ध्यान देना चाहिए । सीमाओं पर शत्रु स्पष्ट दिखाई देते हैं, इसलिए उन्हें वहीं समाप्त करना अपेक्षाकृत सरल होता है; परंतु समाज में रहकर अपने ही देश के विरुद्ध काम करनेवाले देशद्रोहियों को समय रहते नहीं रोका गया, तो युद्ध के समय सेना पर दोहरा दबाव पड सकता है ।
२. विदेशों को सहायता भेजनेवालों पर कडी दृष्टि हो !

जम्मू-कश्मीर में हाल ही में कुछ कट्टरपंथियों द्वारा ईरान के लोगों की सहायता के लिए अभियान चलाया गया, जिसे लोगों का अच्छा समर्थन भी मिला । इससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी निष्ठा कहां जुडी हुई है । पहले जम्मू-कश्मीर में भूकंप, बाढ और कोरोना महामारी के समय भारत सरकार और भारतीय सेना ने इनकी सहायता की थी । तब भी कुछ लोगों ने सेना पर पत्थरबाजी की थी, यह नहीं भूलना चाहिए । इसलिए यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि वे केवल मानवीय दृष्टिकोण से सहायता कर रहे हैं, अपितु इस संभावना को ध्यान में रखते हुए उन पर दृष्टि रखनी चाहिए कि वे देश के विरुद्ध भी जा सकते हैं । जम्मू-कश्मीर में यह खुलकर हुआ, तो संभव है कि पूरे देश में भी ऐसा हुआ हो । इस दृष्टि से सरकार को इनके नेटवर्क की जांच करनी चाहिए । इनके बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल करेंसी और हवाला जैसे सभी प्रकार के लेन-देन की जांच होनी चाहिए ।
३. देशद्रोहियों के समर्थकों को नजरबंद किया जाए !
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद ३७० हटाते समय भारत सरकार ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया था, जिसमें देशद्रोही और अलगाववादी तत्त्वों के समर्थक नेताओं को कुछ समय के लिए नजरबंद किया गया था । इसी प्रकार पूरे भारत में भी ऐसे अनेक समर्थक हैं । उनमें से कुछ खुले रूप से शत्रु देशों का समर्थन करते हैं । भारत में लोगों को भाईचारे का पाठ पढाते हैं और धर्म के नाम पर तथाकथित अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होने की बात बार-बार कहते हैं ।
ये लोग जो भारत में अल्पसंख्यकों को भडकाते रहते हैं, उनके अपने बच्चे सरकार की सहायता से विदेशों में पढते हैं और ये यहां लोगों में उनके साथ अन्याय होने का भ्रम फैलाकर देश के विरुद्ध असंतोष उत्पन्न करते हैं । इसलिए सरकार को ऐसे समर्थकों की पहचान कर उन्हें नजरबंद करना चाहिए ।
देशद्रोही पकडल्यावर थेट कारवाई करण्याचे प्रावधान हवे !
इसका कारण यह है कि इन देशद्रोहियों को पकडकर देश की न्याय प्रक्रिया के माध्यम से दंड देने में बहुत समय और धन का व्यय होता है । उन्हें दिए जानेवाले वकीलों का व्यय भी सरकार को उठाना पडता है । ये लोग अपनी फांसी टालने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को रात में भी परेशान करते हैं । इन देशद्रोहियों को फांसी दिए जाने के बाद उनके जनाजे (अंत्ययात्रा) में लाखों की संख्या में उनके समर्थक एकत्रित होते हैं, जिससे देश की सुरक्षा के लिए संकट उत्पन्न होता है । वहां भी पुलिस, अर्धसैनिक बल और सीमा सुरक्षा बल का बडा बल लगाना पड़ता है । ऐसा करने से कट्टरपंथी, जिहादी और देशद्रोही तत्वों में भय उत्पन्न होगा ।
इसलिए…
- ऐसे देशद्रोही मिलने पर उन्हें सीधे सैन्य अधिकारियों को सौंप दिया जाए ।
- उनकी संपर्क प्रणाली का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया जाए ।
- आवश्यक जानकारी प्राप्त होते ही उन्हें फांसी दी जाए ।
- इस संबंध में अधिकार भारतीय सेना को दिया जाए ।
– श्री. योगेश जलतारे, संपादक, ‘सनातन प्रभात’ प्रसारमाध्यम समूह.
४. जागृत राष्ट्रप्रेमी नागरिकों को भी सरकार की सहायता करनी चाहिए !
यह सभी तैयारी सरकार को वास्तविक युद्ध आरंभ होने से पहले ही कर लेनी चाहिए । यदि सरकार इस विषय में कोई कदम उठा रही है, तो नागरिकों को भी सतर्क रहकर उसमें सहयोग करना चाहिए । समाज में रहते हुए हमें अनेक बातें गलत लग सकती हैं, उन्हें अनदेखा करने के स्थान पर, वह सब पुलिस के ध्यान में लाना चाहिए । देशविरोधी गतिविधियों के प्रति जागरूक रहकर उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन पर दबाव डालना चाहिए । ‘देशहित सर्वोपरि’ को ध्यान में रखते हुए केवल सरकार, सेना और पुलिस पर निर्भर न रहकर एक सजग प्रहरी के समान अपने आसपास सतर्क रहना आवश्यक है । देशवासियो, ‘रात शत्रु की है’, यह ध्यान में रखकर सतर्क रहें ! देश, धर्म और समाज की रक्षा के लिए सक्रिय बनें !’
– श्री. योगेश जलतारे, संपादक, ‘सनातन प्रभात’ प्रसारमाध्यम समूह
(२८.३.२०२६)

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