
मुंबई – कर्नाटक एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाती है । फिर महाराष्ट्र को भिन्न क्यों मानते हैं ? मराठी का प्रचार-प्रसार करना समय की आवश्यकता है । महाराष्ट्र में व्यवसाय करना है, तो मराठी भाषा आनी ही चाहिए, ऐसा वक्तव्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने प्रसार माध्यमों के प्रतिनिधियों से वार्तालाप करते समय व्यक्त किया ।
प्रताप सरनाईक ने आगे कहा, ‘‘ महाराष्ट्र में मराठी भाषा को प्राथमिकता देने हेतु वर्ष १९८९ का अधिनियम है । इस अधिनियम के अनुसार वर्ष २०१९ में परिपत्रक निर्गत किया गया है । इसके अनुसार मराठी भाषा को प्राथमिकता देने हेतु ही हमने निर्णय लिया है । यदि यात्री मराठी है, तो रिक्शा, टैक्सी, ओला-उबर आदि के चालकों को मराठी में वार्तालाप करना अनिवार्य है । इससे वाद-विवाद नहीं होगा । इस निर्णय के विरुद्ध कुछ लोगों द्वारा हडताल घोषित करने की सूचना माध्यमों से प्राप्त हुई है । ऐसी हठधर्मिता उचित नहीं है । यदि आपका कोई पक्ष है, तो मुझसे संपर्क करना चाहिए । यदि आपको समय चाहिए, तो उसे बढाकर देने की मेरी योजना ( तैयारी ) है । टैक्सी एवं रिक्शा चालकों के मराठी न बोलने के कारण अनेक शिकायतें प्राप्त हुई हैं । अभियोग पंजीकृत किए गए हैं । अतः वाद-विवाद टालने हेतु मराठी में वार्तालाप करवाने का निर्णय लिया गया है ।’’
२३ अप्रैल को साहित्यकारों के साथ बैठक !
टैक्सी एवं रिक्शा चालकों को मराठी भाषा आनी चाहिए, इस निर्णय के विषय में २३ अप्रैल को मंत्रालय में राज्य के विभिन्न साहित्यकारों के साथ बैठक आयोजित की गई है । इस निर्णय के विषय में उनके जो प्रस्ताव हैं, उन्हें समझा जाएगा, ऐसा प्रताप सरनाईक ने बताया ।
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