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वॉशिंगटन (अमेरिका) — अमेरिका की ६० से अधिक चिकित्सा संस्थाओं में ‘क्यूलिनरी मेडिसिन’ (पाककला चिकित्सा) का पाठ्यक्रम पढाया जा रहा है । देश के टफ्ट्स विश्वविद्यालय ने भी इस पाठ्यक्रम को अपनाया है । यहां भावी डॉक्टरों को केवल सैद्धांतिक पोषण ही नहीं, अपितु ‘रसोई साक्षर’ भी बनाया जा रहा है । इस विश्वविद्यालय में पढने वाले छात्र भविष्य के डॉक्टर, दंत चिकित्सक एवं आहार विशेषज्ञ हैं । वे विश्वविद्यालय की रसोई में उत्कृष्ट भोजन बनाने का प्रशिक्षण ले रहे हैं । इसका मुख्य उद्देश्य ‘फूड इज मेडिसिन’ (अन्न ही औषध है) इस अभियान को प्रोत्साहित करना है । इससे डॉक्टर केवल आहार बदलने की परामर्श ही नहीं देंगे, अपितु रोगियों को ‘पौष्टिक भोजन कैसे बनाएं ?’ यह भी समझा सकेंगे ।
१. इस अभियान के अंतर्गत डॉक्टरों को यह भी सिखाया जाएगा कि मधुमेह, गुर्दे एवं हृदय रोग जैसे रोगों में कौन-सी सब्जियां औषधि की तरह कार्य कर सकती हैं, एवं वह भी उदाहरणों सहित ।
२. विश्वविद्यालय की ‘क्यूलिनरी मेडिसिन’ की निदेशक नादिन तासाबेजी कहती हैं, “रोगी को प्रोटीन खाने की परामर्श देना पर्याप्त नहीं है । डॉक्टरों को उस खाद्य पदार्थ के मूल्य, उसे पकाने में लगने वाला समय, तथा रोगी की पसंद एवं परंपरा-इन सभी तत्वों की भी जानकारी होनी चाहिए ।”
३. इस पहल के अंतर्गत डॉक्टर केवल बीमारी का उपचार ही नहीं करेंगे, अपितु संपूर्ण स्वास्थ्य का निर्माण करेंगे । इस प्रकार की चिकित्सा व्यवस्था का प्रारंभ किया जा रहा है ।
४. शोध भी यह दर्शाते हैं कि, यदि डॉक्टरों को स्वयं खाना बनाना आता है, तो वे उपचार में भोजन को एक प्रभावी साधन के रूप में उपयोग करने में अधिक आत्मविश्वास रखते हैं ।
संपादकीय भूमिकाभारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर संतुलित आहार बनाया जाता था; किंतु वर्तमान में भारतीय लोग पाश्चात्य प्रभाव में आकर ‘पिज़्ज़ा’ एवं ‘बर्गर’ के पीछे लग गए हैं । भविष्य में यदि भारतीयों को पाश्चात्य लोगों से पौष्टिक आहार सीखने की स्थिति आए, तो आश्चर्य नहीं होगा ! |
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