China Renames Arunachal Places : चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के भागों को नए नाम देने पर भारत का विरोध

चीन ने ९ वर्षों में ६२ स्थानों के नाम बदले

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

नई दिल्ली – भारत ने अपने क्षेत्र के भागों को दिए गए चीन के तथाकथित नए नामों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है । चीन द्वारा इस प्रकार नामकरण करना एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है । असत्य दावे एवं निराधार कहानियां इस तथ्य को नहीं बदल सकती कि ‘अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न तथा अविभाज्य अंग था, है तथा रहेगा ।’ यह बात विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकार सम्मेलन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही । चीन ने पिछले ९ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के ६२ स्थानों के नाम परिवर्तित किए हैं ।

१. चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के लिए अपनी सुविधा के अनुसार नाम तय करता रहा है तथा उन पर दावा कर रहा है ।

२. चीन पहले भी अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम परिवर्तित कर चुका है । भारत ने हर बार इसका विरोध किया है ।

३. भारत ने कहा है कि चीन के ऐसे कदम दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों में बाधा डालते हैं । चीन को ऐसे कार्य नहीं करने चाहिए, जिनसे संबंधों में नकारात्मकता आए एवं अच्छे समन्वय की प्रक्रिया निर्बल हो ।

४. लद्दाख को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी रहने के बीच भारत की यह प्रतिक्रिया सामने आई है ।

शिनजियांग में ‘सेनलिंग’ काउंटी (जिला) का निर्माण

चीन ने शिनजियांग प्रांत में ‘सेनलिंग’ नाम का नया काउंटी बनाया है । इसे २६ मार्च को अनुमति दी गई तथा यह काशगर प्रीफेक्चर के अंतर्गत आएगा । ‘काउंटी’ चीन की एक प्रशासनिक इकाई होती है, जो जिले के समान होती है ।

सेनलिंग क्षेत्र काराकोरम क्षेत्र के पास स्थित है, जो अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सीमा से लगा हुआ है । इसलिए इसका सामरिक महत्त्व बहुत बढ जाता है । पिछले एक वर्ष में चीन ने तीसरी बार शिनजियांग में नया काउंटी बनाया है । इससे पहले ‘हियान’ एवं ‘हेकांग’ काउंटी बनाए गए थे । हियान काउंटी का बडा भाग अक्साई चीन क्षेत्र में आता है, जिसे भारत लद्दाख का अंग मानता है । हालांकि सेनलिंग काउंटी की सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं, फिर भी संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के पास इस प्रकार के प्रशासनिक परिवर्तनों को लेकर भारत ने चिंता व्यक्त की है ।

संपादकीय भूमिका 

केवल मौखिक विरोध से चीन पर कोई प्रभाव नहीं पडेगा । उसे उसी भाषा में प्रत्युत्तर देना आवश्यक है जो वह समझता है !