अमेरिका-ईरान संघर्ष

नई देहली – पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका एवं ईरान के मध्य २१ घंटे तक चली बातचीत अंततः विफल रही । इस बातचीत से अमेरिका एवं ईरान के मध्य कोई भी समझौता नहीं हो पाया । उसके कारण इन दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने देश वापस चले गए । अब ये दोनों देश इस विषय में भिन्न-भिन्न बातें कर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं ।
Islamabad Talks Fail
⚠️ War fears rise again🇮🇷 “US made unreasonable demands!”
🇺🇸 “No deal – Iran rejected our conditions!”
🤝 21-hour Islamabad talks end without agreement; delegations leave
🗣️ “No one expected a deal anyway!” – Iran
⚔️ Tensions remain high as ceasefire… pic.twitter.com/fM95ohufdD
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 12, 2026
अमेरिका ने अस्वीकार्य मांगें रखीं – ईरान का कथन ।
घाना देश में स्थित ईरान के दूतावास ने ‘एक्स’पर यह जानकारी दी की ईरान ने अमेरिका की मांगें मानने से मना किया है । अमेरिका केवल इस चर्चा से बाहर निकलने हेतु कारण ढूंढ रहा था तथा जो छूटें उसे युद्ध करके नहीं मिलीं, उन्हें वह इन मांगों से प्राप्त करना चाहता था । अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल खाली हाथ लौट गया है तथा हॉर्मुज का जलडमरूमध्य अभी भी बंद है । अमेरिका की अव्यवहारिक मांगे मानने से ईरान ने मना किया है तथा ईरान स्वयं के हितसंबंधों के लिए राजनीतिक प्रयास करता रहेगा ।
ईरान द्वारा अमेरिका की शर्ते न मानने से समझौता नहीं हो पाया – अमेरिका
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने बातचीत के उपरांत पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि ईरान द्वारा अमेरिका की शर्ते मानने से मना किए जाने के कारण कोई भी समझौता नहीं हो पाया । हम किसी भी समझौते तक नही पहुंच पाए । हम किन सूत्रों पर उनसे मेल करना चाहते हैं तथा किन सूत्रों पर मेल करना नहीं चाहते हैं, यह हमने स्पष्ट किया है । हमने यह यथासंभव स्पष्ट किया है तथा कदाचित उन्होंने हमारी शर्ते न मानने का निर्णय लिया होगा । लंबी बातचीत के उपरांत अमेरिका ने अंतरिम एवं सर्वोत्तम प्रस्ताव दिया था तथा इस संपूर्ण बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने बहुत लचीलापन दिखाया था । हमें एक सकारात्मक वचनबद्धता की अपेक्षा थी कि ईरान परमाणु हथियार प्राप्त करने का प्रयास नहीं करेगा तथा वह परमाणु हथियार शीघ्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक साधन भी नहीं जुटाएगा । यह अमेरिकी राष्ट्रपति का मुख्य लक्ष्य है तथा इस बातचीत के माध्यम से हमने इसी को साध्य करने का प्रयास किया था ।
समझौते की किसी ने भी अपेक्षा नहीं की थी – ईरान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने कहा कि पहले से ऐसा मान लिया जाना चाहिए था कि एक ही बैठक में समझौता नहीं होगा। किसी ने इसकी अपेक्षा नहीं की थी । पाकिस्तान तथा इस प्रदेश में स्थित अन्य मित्रराष्ट्रों के साथ हमारा संपर्क एवं संवाद होता रहेगा, यह ईरान को विश्वास है ।
ईरान के विरुद्ध की गई कार्यवाही अभी समाप्त नहीं हुई है – नेतन्याहू

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि ईरान के विरुद्ध की सैन्य कार्यवाही अभी समाप्त नहीं हुई है । ईरान के परमाणु बम बनाने के निकट पहुंच जाने से उस पर आक्रमण किए गए । इन आक्रमणों के कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बडी हानि पहुंची है ।
ट्रम्प ईरान पर नौसेनीय नाकाबंदी थोप सकते हैं ।
यह बातचीत बिना किसी निष्कर्ष से समाप्त होने के उपरांत राष्ट्रपति ट्रम्प ने सामाजिक माध्यम पर एक लेख प्रसारित किया है, जिसमें ईरान के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की संभावना पर चर्चा की गई है । इस लेख के अनुसार ईरान ने यदि अमेरिका की शर्ते नहीं मानी, तो अमेरिका इस देश पर नौसेनीय नाकाबंदी लगा सकता है । इस प्रकार की नाकाबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर प्रचंड दबाव बनेगा तथा उसका परिणाम चीन एवं भारत जैसे ईरान के तेल पर निर्भर राष्ट्रों पर भी होगा । ट्रम्प ने इससे पूर्व वेनेजुएला के विरुद्ध भी इसी प्रकार की रणनीति अपनाई थी, जिसके कारण उस देश की अर्थव्यवस्था संपूर्णरूप से गिर गई थी ।
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’के समाचार के अनुसार इस विफलता के उपरांत ट्रम्प प्रशासन के सामने दो कठिन विकल्प बचे हैं । इनमें से पहला विकल्प है ईरान के साथ दीर्घकालीन एवं कठिन बातचीत चालू रखना तथा दूसरा विकल्प है पुनः युद्ध की ओर चले जाना ।
बातचीत विफल होने से ईरानी नागरिकों की चिंता बढी ।
न्यूयॉर्क टाइम्स के समाचार के अनुसार अनेक ईरानी नागरिक सामाजिक माध्यमों पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं । अनेक लोग इस बातचीत पर बारीकी से ध्यान रखे हुए थे, क्योंकि उन्हें यह आशा थी कि इसका कोई राजनीतिक समाधान निकलेगा तथा उसके ईरान पर लगे प्रतिबंध हटकर उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी । तेहरान के नागरिक अमीर हुसैन ने एक संदेश में लिखा, ‘अब ईश्वर ही हमारी रक्षा करें । ऐसा दिखाई देता है कि हम पुनः युद्ध की ओर वापस जा रहे हैं ।’
अमेरिका ने समुद्री बारुद हटाने का अभियान आरम्भ किया ।
अमेरिका के ‘सेंटकॉम’ने बताया है कि अमेरिका के युद्धपोत समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने की तैयारी में हैं । ईरान द्वारा इस महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग में समुद्री बारूद लगाए जाने का आरोप है ।
ईरान को हथियारों की आपूर्ति की तो चीन को बडे संकट का सामना करना पडेगा। ट्रम्प की चेतावनी ।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने यह चेतावनी दी है कि चीन ने यदि ईरान को हथियारों की आपूर्ति की, तो उसे बडी समस्याओं का सामना करना पडेगा । ईरान को आनेवाले कुछ सप्ताहों में चीन की ओर से नई हवाई सुरक्षा प्रणाली मिल सकती है, यह समाचार प्रसारित होने के उपरांत ट्रम्प ने चीन को यह चेतावनी दी । दूसरी ओर चीन ने यह समाचार निरस्त किया । वॉशिंग्टन के चीनी दूतावास की विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस संघर्ष में हमने किसी भी पक्ष को हथियारों की आपूर्ति नहीं की है । अमेरिका ऐसे आधारहीन आरोप लगाकर बिना किसी प्रमाण के बातेँ (सनसनी) फैलाना बंद करे ।
स्वयं के शक्तिशाली होने का भ्रम युद्ध को बल दे रहा है – पोप लियो चौदहवें
Power Without Wisdom Leads to Destruction
Pope Leo XIV warns: “The delusion of being powerful is fueling war.”
“Enough of the worship of self and money, enough of the display of power.”
Urges end to Iran war, calls for dialogue over force.
“This war must be stopped by any… pic.twitter.com/2s2TJw3sCg
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 12, 2026
वैटिकन सिटी में बोलते हुए पोप लियो चौदहवें ने कहा कि सबसे शक्तिशाली होने का भ्रम ईरान -अमेरिका- इजरायल युद्ध को बल दे रहा है । राजनेताओं को युद्ध रोककर शांति के लिए संवाद करना चाहिए । उन्होंने आगे कहा कि अब स्वयं की एवं पैसों की पूजा बहुत हो चुकी, शक्ति का प्रदर्शन भी बहुत हो चुका तथा युद्ध भी बहुत हो चुका । अब किसी भी प्रकार से यह युद्ध रुकना चाहिए, क्योंकि ऐसा भ्रम विनाश की ओर ले जाता है ।
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