अगले डेढ वर्ष में पूरे देश के ७८० जिलों एवं ५ सहस्र तहसीलों में गोसंत एवं गोभक्त आंदोलन तथा प्राणांतक अनशन चलाएंगे

नई देहली – पूरे देश के संत, गोरक्षक तथा असंख्य धर्मप्रेमी हिन्दू अब राष्ट्रव्यापी गोरक्षण कानून बनाने की मांग को लेकर आगे बढे हैं । उसके लिए उन्होंने ‘गोसम्मान आवाहन अभियान’की घोषणा की है । इस अतिव्यापक अभियान के अंतर्गत पहले चरण के रूप में २७ अप्रैल २०२६ को पूरे देश के ७८० जिलों के गोसंत एवं गोभक्त अपने-अपने तहसील/उपमंडल/जिला कार्यालय जाएंगे तथा वहां उपस्थित तहसीलदार, मंडल विकास अधिकारी, उपविभागीय अधिकारी अथवा जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यों के राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत कर गोमाता की रक्षा की प्रार्थना करेंगे ।
राष्ट्रव्यापी गोरक्षण कानून – अभियान का मुख्य उद्देश्य ।
अहिंसक मार्ग से तथा संविधान की कार्यकक्षा में रहकर देश की केंद्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारों से निम्न विषयों पर विनम्र आवाहन किया जाएगा ।
अ. सेवा – गोमाता की सेवा के लिए समर्पित एक केंद्रीय कानून पारित किया जाए । इसके कारण पूरे भारत में गोकल्याण सेवाओं का एकसमान पद्धति से कार्यान्वयन किया जा सके ।
आ. संरक्षण – भारत से गोहत्या संपूर्णरूप से समाप्त हो ।
इ. सन्मान – गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ (राष्ट्र की माता) का मूलभूत अधिकार एवं श्रेणी प्रदान की जाए । इस माध्यम से वह ‘राष्ट्रीय देवता’, ‘राष्ट्रीय वंदनीय प्रतीक’, ‘राष्ट्रीय धरोहर’ एवं ‘राष्ट्रीय आधारस्तंभ’ बनेगी ।
‘गोसम्मान आवाहन अभियान’की कार्ययोजना ।
१. ५ माह की अवधि (दिसंबर २०२५ से अप्रैल २०२६) संपूर्ण सनातन भारतीय समाज में जागृति लाने हेतु तथा उसे इस अभियान से जोडने हेतु व्यापक प्रसिद्धि एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा ।
२. १७ अप्रैल २०२६ (तहसील स्तर) सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के उपरांत २७ अप्रैल को संबंधित क्षेत्र के सभी गोभक्त एवं गोसंत तहसील / मंडल मुख्यालय जाकर वहां के अधिकारियों को ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे ।
३. २७ जुलाई २०२६ (जिला स्तर) ढाई माह की अवधि में प्रशासन से रचनात्मक संवाद किया जाएगा । १० जुलाई तक सरकारों से अनुकूल प्रत्युत्तर एवं सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हुए, तो २७ जुलाई को संपूर्ण देश के जिला मुख्यालय जाकर जिलाधिकारियों को नया ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा ।
४. २७ अक्टूबर २०२६ (राज्य स्तर) : ढाई माह की अवधि में पुनः प्रशासन के साथ स्थाई रचनात्मक संवाद किया जाएगा । यदि १० अक्टूबर तक सरकारों से अनुकूल प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं हुए, तो पूरे देश के सभी जिलों एवं तहसीलों के सभी गोसंत एवं गोभक्त अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में पहुंचेंगे । वहां वे मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के माध्यम से भारत के माननीय राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को संबोधित कर राज्य सरकार के सचिव को एक ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे ।
५. २७ फरवरी २०२७ से १५ अगस्त २०२७ (राष्ट्रीय स्तर) अगले ३ माह (नवंबर, दिसंबर एवं जनवरी) तक प्रतीक्षा की जाएगी । यदि २६ जनवरी २०२७ तक सरकारों से संतोषजनक प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं हुआ, तो देश के ३६ प्रांतों के ७८० जिलों एवं ५ सहस्र तहसीलों से नियुक्त सभी गोसंत एवं गोभक्त २७ फरवरी २०२७ को नई दिल्ली पहुंचेंगे । वहां शांतिपूर्ण ‘संकीर्तन’ करते हुए पत्रों का नियमित प्रस्तुतिकरण करने के माध्यम से केंद्र सरकार से आवाहन करेंगे । ये गोभक्त साढेपांच माह की अवधि में अर्थात १५ अगस्त २०२७ तक दिल्ली में रहेंगे । गोमाता का सम्मान, संरक्षण एवं सम्मान के लिए सरकार से अपनी प्रार्थना एवं निवेदन अनवरत करते रहेंगे ।
६. १६ अगस्त २०२७ (प्राणांतक अनशन) यदि उपरोक्त ४ चरणों के अंतर्गत (तहसील, जिला, राज्य एवं राष्ट्र) १६ माह शांतिपूर्ण पद्धति से प्रार्थना कर सरकार की ओर से गोमाता के संरक्षण के लिए अपेक्षित प्रत्युत्तर नहीं मिला, तो १६ अगस्त २०२७ से ५ गोभक्तों एवं गोसंतों के समूह ‘प्राणांतक अनशन’ आरंभ करेंगे । इस अनशन में यदि किसी गोसेवक ने प्राणों का बलिदान दिया, तो उसका स्थान ग्रहण करने के लिए कोई दूसरा गोप्रेमी, गोसंत अथवा गोभक्त तत्काल आगे आएगा तथा प्राणांतक अनशन आगे चलता रहेगा। गोसेवा, गोसंरक्षण एवं गोसम्मान ये तीनों उद्देश्यों के संपूर्ण साध्य होने तक यह प्रक्रिया अनवरत चलती रहेगी ।
संपर्क एवं सहभागी होने का आवाहन ।
१. गोसेवा एवं गोरक्षा के माध्यम से राष्ट्ररक्षा एवं संस्कृति संवर्धन हेतु समर्पित इस निस्वार्थ एवं पवित्र अभियान में सहभागी होने के लिए ९०६७७ ७७३२३, इस क्रमांक पर मिस्ड कॉल दें ।
२. निम्न क्रमांक पर वॉट्स एप द्वारा स्वयं की विस्तृत जानकारी भेजें ८२३९७ ११००८
३. अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : ९५७१७ १२१४० ।
४. यदि कोई इस अभियान के नाम पर चंदा अथवा धन की मांग कर रहा हो, तो वॉट्सएप के द्वारा ८२३९७११००८, इस क्रमांक पर शिकायत प्रविष्ट करें ।
५. अधिक जानकारी के लिए निम्न जालस्थल पर जाएं : https://www.gausamman.cloud
ऐसी होगी इस ‘दैवी’ अभियान की कार्यकारिणी ।
इस अभियान में साक्षात देवताओं की ही कार्यकारिणी बनाई गई है । इसके अंतर्गत मुख्य संरक्षक गोमाता अभियान के अध्यक्ष नंदी बाबा, जबकि अभियान के लिए भारतीय परंपरा के सभी पूजनीय देवताओं एवं देवगणों से आशीर्वाद मांगा गया है ।
इस अभियान में सेवा देनेवालों में भारतीय परंपरा के सभी आचार्याे (आध्यात्मिक गुरु), महान संत एवं महान व्यक्तित्त्वों, गोसंत, गोभक्त, गोरक्षक, गोसेवक, गोपालक, गोपुत्र, गोवत्स (बछडों) तथा समस्त गोप्रेमी जनता का समावेश है ।
अभियान की प्रमुख मांगें एवं प्रस्ताव ।
१. गोउत्पादन (गाय का दूध, घी, गोबर आदि से बनाए गए उत्पाद) कृषि विश्वविद्यालयों में गोबर एवं गोमूत्र पर आधारित सर्वसमावेशी शोध केंद्रों का गठन किया जाए । रासायनिक खेती का नियमन कर गोआधारित (जैविक) खेती को सक्रिय प्रोत्साहन दिया जाए । फिनाईल के स्थान पर ‘गोनाईल’ (गोमूत्र पर आधारित जीवाणुनाशक) का उपयोग करना अनिवार्य किया जाए । आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में पंचगव्य पर आधारित औषधियों का निःशुल्क वितरण किया जाए । बडे ‘शॉपिंग मॉल्स’मे एक विशिष्ट कक्ष (काऊंटर) आरक्षित कर उसमें गोआधारित कृषि उत्पाद, देसी गाय के दूध से बने उत्पाद, साथ ही गोबर एवं गोमूत्र से बने उत्पादों को बिक्री करना अनिवार्य किया जाए ।
२. गोशालाएं –भारत के प्रत्येक राज्य में न्यूनतम एक ‘गो अभयारण्य’ की स्थापना की जाए । प्रत्यके ग्रामपंचायत के कार्यक्षेत्र में एक ‘नंदीशाला’ की स्थापना की जाए । इन गोशालाओं को ‘मनरेगा’ योजना से जोडा जाए । सरकार के नियंत्रण में कार्यरत मंदिरों के लिए विशेषकर जिन मंदिरों को बडे स्तर पर चंदा मिलता है, उन्हें किसी गोशाला का व्यवस्थापन करना अनिवार्य किया जाए ।
३. कानूनीस्तर की मांगे – गाय की हत्या करनेवालों को तथा पशुओं की तस्करी में संलिप्त अपराधियों को सश्रम कारावास जैसे दंड का प्रावधान किया जाएग । प्रतिष्ठान उनके सी.एस्.आर्. का (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पाँसिबिलिटी) अर्थात सामाजिक दायित्व के कोष का एक विशिष्ट अंश गोसेवा के उपक्रमों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य किया जाए । एक ही बार उपयोग किए जानेवाली प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए ।
४. गो-चिकित्सालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से संबंधित प्रमुख प्रस्ताव, जिला स्तर पर स्वतंत्र पंचगव्य (गायों पर आधारित उपचार पद्धति) चिकित्सालयों की स्थापना की जाए । सरकारी एवं निजी विद्यालयों, साथ ही महाविद्यालयाें में देसी गायों का आर्थिक, वैज्ञानिक एवं धार्मिक महत्त्व बताने वाले विषयों की शिक्षा देना अनिवार्य किया जाए । महामार्गाें पर गायों की होनेवाली दुर्घटनाओं पर नियंत्रण रखने के लिए उपाय किए जाए । इसके लिए प्रति ५० किलोमीटर पर अथवा प्रत्येक टोल बूथ पर घायल गायों पर तत्काल उपचार करने के लिए एक ‘गो-वाहिनी’, जबकि १५० से २०० किलोमीटर की दूरी पर एक समर्पित गो-चिकित्सालय की स्थापना की जाए ।
स्वयंसेवकों की नियुक्ति
देश के अनुमानित ७८० जिलों में ३ संतों (आध्यात्मिक नेता) तथा ३ समर्पित एवं निष्ठावान ‘गोप्रेमियों’का चयन किया जाएगा । अपने-अपने जिलों में जनसंपर्क एवं सेवाकार्य का दायित्व लेनेवाले ये ६ प्रमुख व्यक्ति उनके अधिकारक्षेत्र के तहसीलों में यात्रा करेंगे । वहां जाकर वे न्यूनतम ३ गोसंतों एवं ३ गोभक्तों को भर्ती करेंगे । इस समूह के एक गोभक्त को तथा एक गोसंत को उस तहसील की सेवा मुख्य दायित्व सौंपा जाएगा । इसप्रकार से पूरे देश के ५ सहस्र तहसीलों में स्थानीय जनसंपर्क कार्यकर्ता कार्यरत रहेंगे ।
इस अभियान की प्रमुख विशेषताएं ।
१. यह अभियान किसी विशिष्ट संस्थाओं अथवा संगठनों के नाम से चलाया नहीं जाएगा । यह अभियान केवल ईश्वर, गोमाता एवं नंदीबाबा के दिव्य आंतरिक सान्निध्य में संपन्न होगा ।
२. कोई भी संत, महंत, राजनेता आदि इस अभियान का नेतृत्व नहीं करेंगे । इस अभियान से संबंधित किसी भी प्रचारसामग्री पर किसी भी व्यक्ति का छायाचित्र नहीं छापा जाएगा ।
३. यह अभियान संपूर्णरूप से अहिंसक होगा ।
४. इस अभियान के अंतर्गत गोभक्त उनकी भावनाएं एवं मांगें ‘संकीर्तन’ (भक्तिगीत), मोर्चे तथा लिखित ज्ञापनों के माध्यम से व्यक्त करेंगे ।
५. इस अभियान में किसी से भी किसीप्रकार का चंदा अथवा आर्थिक योगदान नहीं मांगा जाएगा तथा स्वीकार भी नहीं किया जाएगा ।
Bengaluru SIR : कर्नाटक में विशेष पुनरावलोकन प्रक्रिया में उजागर हुआ कि बेंगलुरु में ९७ लाख मतदाताओं में से ४ लाख अवैध
TMC Cut Money : बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता उत्कोच (रिश्वत) के रुपये लोगों को कर रहे हैं वापस !
Delhi Hotel Fire : दिल्ली के होटल में लगी भीषण आग में २१ लोगों की मृत्यु
सर्वोच्च न्यायालय में ५ नए न्यायाधीश, अब एक पद रिक्त !
Hanif Sheikh Arrested : संदिग्ध निदा खान को आश्रय देनेवाले घर के मालिक हनीफ शेख को बंदी बनाया गया ।
Census in Maharashtra 2026 : काम में लापरवाही सहन नहीं करेंगे ।