‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना’ की ई-केवाईसी प्रक्रिया में ७१ लाख महिलाएं अयोग्य घोषित ।

पिछले २० माह में इन महिलाओं पर हुआ २१ सहस्र ३०० करोड रुपए का व्यय ।

(‘ई-केवाईसी’ – सरकारी पहचानपत्रों की पडताल के लिए डिजिटल पद्धति)

मुंबई – ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना’ की लाभधारक महिलाओं की ‘ई-केवाईसी’ पडताल करते समय ७१ लाख महिलाएं अयोग्य घोषित हुई हैं । इस योजना में अयोग्य सिद्ध हुई महिलाओं पर प्रतिमाह १ सहस्र ५०० रुपए के अनुसार पिछले २० माह में २१ सहस्र ३०० करोड रुपए खर्च हुए हैं । अभी भी कुछ महिलाओं की ‘केवाइसी’ प्रक्रिया शेष है । इसके कारण इस प्रक्रिया को पूर्ण करने की समय सीमा ३० अप्रैल तक बढाई गई है ।

इस योजना के अंतर्गत राज्य में २ करोड ४३ लाख महिलाओं ने पंजीकरण किया है । इसमें ‘ई- केवाईसी’ करते समय अनुचित विकल्प का चयन किए जाने से इस योजना का लाभ मिलना बंद होने की अनेक शिकायतें राज्य में प्राप्त हुई थीं । उसके कारण सरकार ने पुनः ‘ई-केवाईसी’ प्रक्रिया चलाने के निर्देश दिए थे । अब तक १ करोड ९० लाख महिलाओं ने यह प्रक्रिया पूर्ण की है । इससे पूर्व ‘ई-केवाईसी’ प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए ३१ मार्च तक की समय सीमा दी गई थी; परंतु अभी तक यह प्रक्रिया पूरी न होने से इसकी अवधि बढा दी गई है ।

संपादकीय भूमिका 

  • किसी योजना में इतनी बडी संख्या में अयोग्य महिलाएं योग्य घोषित होना तथा योग्यता न होते हुए भी लंबे समय तक उन्हें इस योजना का लाभ मिलना सरकारी व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है ।
  • क्या इन महिलाओं को दिए गए २१ सहस्र ३०० करोड रुपए वापस प्राप्त किए जाएंगे ? सरकार से विश्वासघात करने के आधार पर क्या उन्हें दंडित किया जाएगा ? यह मुख्य प्रश्न हैं ।