
पुरी (ओडिशा) – यहां के जगप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार में संरक्षित स्वर्ण-रजत के आभूषणों, तथा बहुमूल्य वस्तुओं की गणना २५ मार्च से प्रारंभ कर दी गई है । अचूकता एवं पारदर्शिता लाने हेतु इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है । वर्ष १९७८ के पश्चात प्रथम बार भगवान जगन्नाथ के रत्नभंडार का इतने व्यापक वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक पद्धति से मूल्यांकन हो रहा है ।
Ratna Bhandar Inventory At Puri Jagannath Temple After 48 Years
Authorities have begun documenting Lord Jagannath’s priceless treasures using photography, videography & 3D mapping 📸
The process follows the 1978 records – marking a major step towards transparency & preservation… https://t.co/iJ4FR7oQKv pic.twitter.com/pJniNVrvxN
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 26, 2026
१. जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढी ने सूचित किया कि प्रथम दिन लगभग ६ घंटे ‘गणती मानती’ (गणना) प्रक्रिया चली, जिसमें ‘चल रत्न भंडार’ ( नित्य एवं उत्सवों पर उपयोग होने वाले रत्न) के लगभग ८० प्रतिशत आभूषणों की सूची निर्मित की गई है । मंदिर प्रशासन ने अभी तक रत्नों की मात्रा अथवा भार घोषित नहीं किया है । शेष २० प्रतिशत आभूषणों, तथा रत्नभंडार की अन्य वस्तुओं की गणना आगामी दिनों में भी निरंतर रहेगी ।
२. भगवान जगन्नाथ के दैनिक पूजन विधान में उपयोग होने वाले स्वर्ण आभूषणों सहित अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का विस्तृत विवरण आधुनिक यंत्रों की सहायता से प्रलेखित किया जा रहा है । इस समय मूल्यांकन प्रक्रिया को कागजों पर अंकित करने के साथ-साथ इसमें अत्याधुनिक साधनों का प्रयोग किया जा रहा है । मंदिर के कोष एवं आभूषणों की अचूक संरचना तथा प्रविष्टि करने हेतु ‘थ्री-डी मैपिंग’ (विशेष संगणकीय प्रणाली का उपयोग कर वस्तु, भूभाग अथवा वातावरण का डिजिटल एवं त्रिविमीय चित्रण बनाने की प्रक्रिया) की जा रही है । साथ ही संपूर्ण प्रक्रिया का उच्च स्तर का छायांकन एवं चित्रीकरण किया जा रहा है ।
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