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मुंबई/रत्नागिरी – वारकरी संप्रदाय, संत परंपरा तथा विठ्ठल भक्ति का घोर अपमान करने वाले ‘ईठ्ठला’ नामक नाटक का राज्यभर में विरोध होने के उपरांत उसका मंचन स्थगित कर दिया गया है । राज्य के उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री तथा रत्नागिरी के पालकमंत्री उदय सामंत ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निर्माताओं को कडे शब्दों में चेतावनी दी । नाटक के निर्माताओं ने वर्तमान में नाटक रोकने तथा उसका नाम, कथानक तथा पात्रों के नाम परिवर्तित का लिखित निर्णय दिया है ।

१. रत्नागिरी के वीर सावरकर नाट्यगृह में ‘६४ वीं महाराष्ट्र राज्य हौशी मराठी नाट्य स्पर्धा’ के अंतिम चरण में जयप्रकाश पाखरे, वीरशैव समाज लांजा द्वारा निर्मित, अमोल रेडीज लिखित और अमोल रंगयात्री द्वारा निर्देशित ‘ईठ्ठला’ नाटक प्रस्तुत किया गया था ।
२. नाटक देखने के पश्चात वारकरी संप्रदाय एवं हिन्दू जनजागृति समिति के साधक एवं कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए । नाटक में वारकरी भक्तों को ‘हत्यारे’ के रूप में दिखाकर संप्रदाय की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया था ।
३. विषय की गंभीरता को देखते हुए हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक सुनील घनवट, साथ ही समिति के सतीश सोनार तथा रवि नलावडे ने मुंबई में मंत्री उदय सामंत से भेंट कर उन्हें विस्तृत निवेदन दिया ।
श्रद्धास्थानों का अपमान बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा !“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हमारे श्रद्धास्थानों का अपमान बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा”, ऐसा स्पष्ट मत हिन्दू जनजागृति समिति ने अपने निवेदन में रखा । मंत्री सामंत ने वारकरी भक्तों की भावनाओं को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की, इसके लिए समिति की ओर से उनका अभिनंदन किया गया । |
४. इस समय मंत्री सामंत ने तुरंत नाटक के निर्माताओं से फोन पर संपर्क कर संतों के नाम पर चल रहे इस अनाचार को रोकने के आदेश दिए । उन्होंने कहा की, “नाटक का नाम परिवर्तित कीजिए, पात्रों को दिए गए संतों के नाम हटाइए एवं वारकरी संप्रदाय को हिंसक दिखाने वाली संकल्पना तुरंत परिवर्तित कीजिए ।”
५. मंत्री की इस भूमिका के उपरांत नाटक के निर्माता ‘वीरशैव समाज, लांजा’ ने हिन्दू जनजागृति समिति को दिए लिखित पत्र में कहा की, “वारकरी संप्रदाय एवं हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा उठाई गई आपत्तियों का सम्मान करते हुए हम यह नाटक वर्तमान में रोक रहे हैं । आपत्तिजनक प्रसंग एवं नामों में आवश्यक परिवर्तन करने के उपरांत ही आगे इसका मंचन किया जाएगा ।”
नाटक के आपत्तिजनक एवं आक्रोश पैदा करने वाले भाग१. नाटक में दिखाया गया कि विठ्ठल का नाम लेने वाला एक दंपत्ति १० निर्दोष मेहमानों की हत्या करता है, जिससे वारकरी भक्तों को अपराधी के रूप में दर्शाया गया । २. नाटक के पात्रों को ‘तुका’, ‘जना’ तथा ‘नामा’ जैसे संतों के नाम देकर उनके हाथों हत्या होते हुए दिखाया गया, जो वारकरी संतों का गंभीर अपमान है । ३. नाटक में दिखाया गया कि मां (जना) विठ्ठल के नाम में लीन होकर अपने ही बेटे (नामा) की हत्या कर देती है । इस अमानवीय दृश्य के माध्यम से समाज को भ्रमित (गुमराह) करने का प्रयास किया गया । |
संपादकीय भूमिका
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