तेहरान (ईरान) / वॉशिंगटन (अमेरिका) / नई दिल्ली – यदि अमेरिका जमीनी आक्रमण करने का प्रयास करता है, तो ईरान की सेना उसी ताकत से उत्तर देने के लिए तैयार है । उसे गंभीर परिणाम भुगतने पडेंगे, ऐसी चेतावनी ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में दी । उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि अमेरिका के साथ युद्धविराम पर कोई चर्चा नहीं होगी तथा युद्ध रोकने के लिए ईरान की ओर से कोई वार्ता नहीं की जाएगी ।
अराघची ने आगे कहा कि हमें विश्वास है कि हम अमेरिका का सामना करेंगे एवं यह उसके लिए बडा संकट प्रमाणित होगा । हम उसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं । इसका अर्थ यह नहीं कि हम युद्ध जारी रखने के लिए यह कह रहे हैं, परंतु हम किसी भी परिस्थिति, किसी भी चुनौती एवं किसी भी संभावना का सामना करने के लिए तैयार हैं ।
ईरान मेरी अनुमति के बिना सर्वोच्च नेता न चुने ! – ट्रम्प की चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नए नेता के चयन में अमेरिका की भूमिका आवश्यक है तथा अमेरिका की भागीदारी के बिना ऐसा करना समय व्यर्थ करना होगा । यदि ईरान अमेरिका की भागीदारी के बिना नए सर्वोच्च नेता का चयन करता है, तो वह निरर्थक होगा ।
खामेनी के पुत्र मोजतबा खामेनी को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है; परंतु उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा । यदि नया नेता पुराने नेतृत्व की नीतियों को जारी रखता है, तो आनेवाले वर्षों में अमेरिका एवं ईरान के बीच एक अन्य संघर्ष हो सकता है । अमेरिका ईरान में ऐसा नेता चाहता है जो वहां शांति एवं स्थिरता ला सके ।
ट्रम्प न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते, हमारे नेता क्या तय करेंगे ? – ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की बात करते हैं । वास्तविकता यह है कि वे अपने ही देश में न्यूयॉर्क शहर का मेयर भी नियुक्त नहीं कर सकते । यह एक प्रकार का औपनिवेशिक दृष्टिकोण है । वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, परंतु ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराना चाहते हैं, ऐसी आलोचना ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग २०२६’ कार्यक्रम में की ।
खतीबजादेह ने आगे कहा कि तेहरान के पास अमेरिकी-इजरायली आक्रमणों के विरुद्ध देश की रक्षा के लिए बहादुरी से लडने के अलावा कोई विकल्प नहीं है । हमने शपथ ली है कि अंतिम गोली तथा अंतिम सैनिक तक हम विरोध करते रहेंगे ।
भारत के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि उनकी भारत के विदेश मंत्री से संक्षिप्त भेंट हुई है । ईरान एवं भारत के बीच पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं एवं दोनों देश इन संबंधों को बहुत महत्त्व देते हैं ।
मध्यपूर्व एवं यूक्रेन का युद्ध शीघ्र (जल्द) समाप्त होना चाहिए ! – प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने मध्यपूर्व एवं यूक्रेन में चल रहे युद्ध को शीघ्र समाप्त करने का आह्वान किया । उन्होंने कहा कि सैन्य संघर्ष से कोई समस्या का समाधान नहीं हो सकता । भारत सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान एवं शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा ।
कोई भी देश स्वयं को ‘सर्वोच्च शक्ति’ नहीं कह सकता ! – विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर

वैश्विक तनाव की पृष्ठभूमि में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग २०२६’ में कहा कि आज कोई भी देश पूर्ण रूप से प्रभुत्वशाली नहीं है । २० वीं सदी के मध्य से एक निश्चित वैश्विक व्यवस्था बनी रहेगी, यह वैश्विक अपेक्षा अवास्तविक थी ।
आज वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के इर्द-गिर्द केंद्रित किया जाता है; परंतु वास्तव में विश्व धीरे-धीरे कई शक्तियों में विभाजित हो रही है । अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति, तकनीक या कूटनीति—इन सभी क्षेत्रों में पूर्ण वर्चस्व रखने वाला कोई देश रहा नहीं है ।
उनके अनुसार आज शक्ति का अर्थ केवल जीडीपी या सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गया है । विश्व के विभिन्न क्षेत्र अलग-अलग क्षेत्रों में सशक्त हो रहे हैं, इसलिए वैश्विक शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैल गई है ।
भारत ३० दिनों तक रूस से सस्ता तेल खरीद सकेगा ! – अमेरिका
भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी गई है । अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने भारतीय तेल रिफाइनरियों को ३० दिनों का विशेष लाइसेंस दिया है, जो ३ अप्रैल तक मान्य रहेगा ।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प की ऊर्जा नीति के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है । भारत अमेरिका का महत्त्वपूर्ण साझेदार है एवं वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति स्थिर रखने के लिए
यह छूट दी गई है । हमें आशा करते है कि इसके पश्चात भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढाएगा ।
ईरान युद्ध के समय वाइट हाउस में पहली बार प्रार्थना
ईरान एवं अमेरिका के बीच युद्ध ७ दिनों के उपरांत भी जारी रहने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईश्वर से प्रार्थना की । ६ मार्च को ट्रम्प ने वाइट हाउस के ऐतिहासिक ओवल ऑफिस में ईसाई परंपरा के अनुसार प्रार्थना की ।
इस विशेष प्रार्थना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है तथा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक रूप से इस प्रकार प्रार्थना करने की यह पहली घटना मानी जा रही है ।
ट्रम्प ने देशभर के प्रमुख पादरियों को वाइट हाउस में आमंत्रित किया था । अपनी कुर्सी पर बैठकर ट्रम्प ने आंखें बंद कर प्रार्थना की । इस समय एक पादरी ने उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया । सामूहिक प्रार्थना में कहा गया “हे प्रभु, हमारे राष्ट्रपति को राष्ट्र चलाने की शक्ति प्रदान करें तथा युद्धभूमि में लड रहे हमारे सैनिकों की रक्षा करें ।”
इजराइल ने ईरान के ६ बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए
युद्ध के सातवें दिन इजराइल ने ईरान के ६ बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए । इस कार्रवाई का वीडियो इजराइली सेना ने जारी किया है ।
⭕️Overnight Activity:
IAF aircraft struck and dismantled an armed ballistic missile launcher in the area of Qom that was ready to fire at Israel.
An Iranian aerial defense system was also struck in Isfahan.❗️Prior to the strikes, the IDF took multiple measures to mitigate the… pic.twitter.com/Wdm5MbW95n
— Israel Defense Forces (@IDF) March 5, 2026
इन लॉन्चरों से ईरान लगातार इजराइल पर आक्रमण कर रहा था । इसके अलावा इजराइल ने ईरान की ३ उन्नत रक्षा प्रणालियां भी नष्ट करने का दावा किया है ।
अमेरिका हार जाएगा ! – चीन के शिक्षाविद का दावा
चीन की राजधानी बीजिंग के शिक्षाविद शुएक्किन जियांग ने वर्ष २०२४ में तीन बडे पूर्वानुमान किए थे
१. वर्ष २०२५ में अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प फिर सत्ता में आएंगे ।
२. ट्रम्प ईरान पर आक्रमण करेंगे ।
३. इस युद्ध में उनकी हार होगी ।
इनमें से दो भविष्यवाणियां सच हो चुकी हैं । तीसरी सच होगी या नहीं, यह देखना बाकी है ।
जियांग के अनुसार ईरान की भौगोलिक स्थिति अमेरिकी सेना के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है । इसके अलावा ईरानी सेना का कडा प्रतिरोध अमेरिका के आधुनिक हथियारों पर भारी पड सकता है । यह भौगोलिक परिस्थिति युद्ध का पलडा ईरान की ओर झुका सकती है ।
अमेरिका निर्बल (कमजोर) हो रहा है !
जियांग के अनुसार मध्यपूर्व का यह युद्ध निर्णायक चरण में पहुंच चुका है एवं अमेरिका धीरे-धीरे निर्बल हो रहा है । ईरान पिछले २० वर्षों से इस संघर्ष की तैयारी कर रहा है, इसलिए अमेरिका के सामने कठिन चुनौतियां होंगी ।
जून २०२५ में अमेरिका एवं ईरान के बीच हुआ १२ दिनों का संघर्ष ईरान के लिए एक अभ्यास जैसा था । उस युद्ध में ईरान ने अमेरिका एवं इजराइल की आक्रमणकारी क्षमता का गहराई से अध्ययन किया । पिछले ८ महीनों से ईरान इस नए आक्रमण के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है ।
जिहादी संगठनों का समर्थन
लेबनान का ईरान समर्थक संगठन हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोही, एवं गाजा के हमास तथा अन्य फिलिस्तीनी जिहादी संगठनों को अमेरिका की रणनीति तथा मानसिकता पूरी तरह समझ में आ चुकी है, ऐसा जियांग का दावा है । उनके अनुसार अमेरिकी शक्ति को निर्बल करने एवं अंततः समाप्त करने की रणनीति इन संगठनों के पास तैयार है ।
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी सेना केवल अमेरिका से नहीं, अपितु पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के विरुद्ध भी युद्ध की रणनीति बना रही है । इससे वैश्विक बाजार तथा सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव पड सकता है ।
श्रीलंका ने ईरानी युद्धपोत को दिया आश्रय
कोलंबो (श्रीलंका) – श्रीलंका सरकार ने हिन्द महासागर में अमेरिकी आक्रमण से बचने के लिए एक ईरानी युद्धपोत को अपने बंदरगाह पर आश्रय दिया है ।
दो दिन पहले ही अमेरिका ने श्रीलंका के पास समुद्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया था । इसमें ८७ सैनिकों की मृत्यु हो गई, जबकि कई अभी भी लापता हैं । उस समय उस जहाज ने श्रीलंका से आश्रय मांगा था, परंतु श्रीलंका ने मना कर दिया था । अब श्रीलंका ने अपनी भूल सुधारने की बात कही है ।


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