
तेल अवीव (इजरायल) / इस्लामाबाद (पाकिस्तान) / तेहरान (ईरान) / वॉशिंग्टन डीसी (अमेरिका) – ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) अभियान में इजरायल का उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट है; यद्यपि युद्ध समाप्ति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है । हमारे लिए लक्ष्य राजनीतिक एवं सैन्य – दोनों स्तरों पर सत्ता परिवर्तन कराना है; परंतु वास्तविक परिवर्तन ईरान की जनता को ही करना होगा । हम वहां के लोगों को वह अवसर दे रहे हैं । ‘वहां नेतृत्व कौन करेगा’, यह तय करना हमारा काम नहीं है । यह निर्णय ईरानी जनता को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से लेना चाहिए, ऐसा वक्तव्य इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन साअर ने दिया है ।
युद्ध १०० दिनों तक चल सकता है ! – अमेरिका
अमेरिका का रक्षा विभाग ‘पेंटागन’ ईरान के साथ ऐसे युद्ध की तैयारी कर रहा है, जो कम से कम १०० दिनों तक चल सकता है तथा सितंबर तक लंबा खिंच सकता है । ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने पेंटागन से अधिक सैन्य गुप्तचर अधिकारियों की मांग की है, ताकि ईरान से संबंधित अभियानों को लंबे समय तक समर्थन दिया जा सके । इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका इस संघर्ष की अवधि को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पहले व्यक्त किए गए ४ सप्ताह के अनुमान से अधिक मानकर तैयारी कर रहा है ।
अमेरिका को पछताना पडेगा ! – युद्धपोत डुबोने के पश्चात ईरान की धमकी

अमेरिका द्वारा श्रीलंका के पास हिन्द महासागर में ईरान का युद्धपोत डुबोने के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने धमकी दी कि “अमेरिका को अपने इस कृत्य पर पछताना पडेगा ।” उन्होंने कहा कि ईरान के तट से २ सहस्र मील दूर स्थित इस युद्धपोत पर अमेरिका ने आक्रमण किया । यह पोत भारत के निमंत्रण पर वहां गया था । इसमें १३० नाविक थे । बिना किसी पूर्व सूचना के अंतरराष्ट्रीय समुद्र में अमेरिका ने यह क्रूर आक्रमण किया । इस आक्रमण में ८७ लोग मारे गए, जबकि अन्य घायल हो गए ।
ईरान पर आक्रमणों के लिए अमेरिकी सेना भारतीय बंदरगाहों का उपयोग कर रही है – इस दावे को भारत ने अस्वीकार कर दिया !
अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने ‘वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क’ को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया था कि “हमारे सभी सैन्य ठिकाने नष्ट हो चुके हैं । हमारे हार्बर इंस्टॉलेशन भी नष्ट हो गए हैं । हमें वास्तव में भारत और भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड रहा है, जो अच्छा नहीं है । नौसेना भी यही कह रही है ।” इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह दावा असत्य एवं अनुचित है । हम आपको ऐसे निराधार एवं मनगढंत बयानों से सावधान करते हैं ।”
भारत के लिए ९५ लाख बैरल तेल भेजने को रूस तैयार

मध्य-पूर्व में तनाव बढने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (सामुद्रधुनि) से कच्चे तेल की आपूर्ति का मार्ग बंद हो गया है । यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है । इसी मार्ग से भारत लगभग ५० प्रतिशत तेल आयात करता था । इस पृष्ठभूमि में रूस भारत को कच्चा तेल भेजने के लिए तैयार हो गया है । ‘रॉयटर्स’ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास जहाजों पर रूस का लगभग ९५ लाख बैरल कच्चा तेल उपलब्ध है एवं इसे कुछ ही सप्ताह में भारत पहुंचाया जा सकता है ।
जहाजों पर रहे तेल मूल रूप से कहां भेजा जाना था, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है; परंतु आवश्यकता पडने पर इसे भारत की ओर मोडा जा सकता है । रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल का भंडार लगभग २५ दिनों की मांग के लिए पर्याप्त है ।
पाकिस्तान के विरुद्ध अफगानिस्तान, इजरायल एवं भारत एकजुट हो गए हैं ! – पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का दावा

पाकिस्तान को एक प्रकार से घेरा जा रहा है । एक ओर अफगानिस्तान है, दूसरी ओर भारत है एवं तीसरी ओर ईरान है । इजरायल, पाकिस्तान को अपनी कठपुतली बनाना चाहता है एवं इस योजना में भारत भी सम्मिलित है, ऐसा दावा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने किया है । उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध के पीछे यहूदी हैं तथा वे इजरायल की सीमा को पाकिस्तान तक लाने का प्रयास कर रहे हैं ।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि घटनाओं का यह क्रम पाकिस्तान के लिए गंभीर संकट है । पाकिस्तान के विरुद्ध यह एक राजनीतिक एवं धार्मिक षड्यंत्र है । पाकिस्तान के नागरिकों को इसे समझने की आवश्यकता है । यहूदी मानवता के लिए संकट हैं । फिलिस्तीन की भूमि पर इजरायल की स्थापना के उपरांत इस्लामी विश्व पर आया हर संकट यहूदी विचारधारा का परिणाम है ।
अमेरिका ने कराची एवं लाहौर वाणिज्य दूतावासों के कुछ कर्मचारियों को वापस बुलाया
पाकिस्तान में बढते सुरक्षा संकटों के कारण अमेरिका ने कराची एवं लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में कार्यरत ‘गैर-आपातकालीन’ कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को शीघ्रातिशीघ्र (जल्द से जल्द) पाकिस्तान छोडने का निर्देश दिया है । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित मुख्य अमेरिकी दूतावास के कामकाज में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है एवं वहां के कर्मचारी वर्तमान में वहीं कार्य करते रहेंगे । कुछ दिनों पहले कराची स्थित दूतावास में गुस्साई भीड ने आग लगा दी थी, जबकि लाहौर स्थित दूतावास पर भी आक्रमण किया गया था ।
ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों को बनाया जा रहा है लक्ष्य !
अमेरिका एवं इजरायल के साथ संघर्ष में अब ईरान के भूमिगत ‘मिसाइल सिटी’, अर्थात् मिसाइलों के भंडारवाले सुरंग तंत्रों को बडी मात्रा में लक्ष्य बनाया जा रहा है । मिसाइलें एवं ड्रोन इन सुरंगों से बाहर निकलते ही प्रक्षेपण प्रणालियों को नष्ट कर दिया जा रहा है । साथ ही ‘बंकर बस्टर’ बमों की सहायता से सुरंगों के प्रवेश द्वारों एवं ऊपर की संरचनाओं पर भी आक्रमण किए जा रहे हैं । अमेरिकी कमांडरों के अनुसार सैकडों मिसाइलें, प्रक्षेपण प्रणालियां एवं ड्रोन नष्ट किए जा चुके हैं तथा ४ दिनों में ईरान के मिसाइल आक्रमणों में लगभग ८६ प्रतिशत की कमी आई है ।
मध्य-पूर्व से नागरिकों को निकालने के लिए अमेरिका की चार्टर्ड उडानें आरंभ
मध्य-पूर्व में बढते तनाव के कारण अमेरिका ने अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चार्टर्ड उडानें आरंभ की हैं । अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब एवं इजरायल में रहनेवाले अमेरिकी नागरिकों की सहायता की जा रही है तथा अब तक १७,५०० से अधिक अमेरिकी नागरिकों को वहां से निकाला जा चुका है । आनेवाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा ।
अमेरिका को प्रतिदिन १ अरब डॉलर (८,३०० करोड रुपये) खर्च करने पड रहे हैं
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं ‘चिंतन रिसर्च फाउंडेशन’ के परामर्शदाता कर्नल राजीव अग्रवाल के अनुसार, प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका को प्रतिदिन लगभग १ अरब डॉलर (८,३०० करोड रुपये) खर्च करने पड रहे हैं । यद्यपि अमेरिका का रक्षा बजट लगभग १ ट्रिलियन डॉलर (८३ लाख करोड रुपये) है, लेकिन समस्या कुल खर्च की नहीं अपितु हथियारों की प्रति यूनिट मूल्य की है । उदाहरण के लिए अमेरिका की ‘पैट्रियट’ एवं ‘टॉमहॉक’ मिसाइलों का मूल्य लगभग १० से ३० लाख डॉलर (८ से २४ करोड रुपये) तक होता है, जबकि ईरान की औसत बैलिस्टिक मिसाइल का मूल्य केवल ८ से १० लाख डॉलर (लगभग ६.५ से ८ करोड रुपये) है ।
इसी प्रकार अमेरिका के ‘MQ-9 रीपर’ ड्रोन का मूल्य लगभग ३ करोड डॉलर (२४९ करोड रुपये) है, जबकि ईरान का ‘शाहेद-१३६’ ड्रोन केवल ३० से ५० सहस्र डॉलर (२५ से ४० लाख रुपये) में तैयार हो जाता है । इस भारी लागत अंतर के कारण अमेरिका एवं इजरायल के लिए यह युद्ध लंबे समय तक जारी रखना आर्थिक रूप से अत्यंत महंगा प्रमाणित हो सकता है ।
१९ लाख करोड रुपये की आर्थिक हानि हो सकती है
‘फॉर्च्यून’ पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध की कुल आर्थिक लागत अमेरिका के लिए २१० अरब डॉलर, यानी लगभग १९ लाख करोड रुपये तक पहुंच सकती है । इसमें प्रत्यक्ष सैन्य खर्च भी सम्मिलित है, जिसका अनुमान लगभग ९५ अरब डॉलर (लगभग ८.७ लाख करोड रुपये) लगाया गया है । इसके अलावा वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार एवं आर्थिक परिस्थितियों में उत्पन्न बाधाओं से होनेवाली हानि भी इस अनुमान में सम्मिलित है ।
अमेरिका ३० करोड रुपये की मिसाइल से ३० लाख रुपये के ड्रोन गिरा रहा है
युद्ध में ईरानी ड्रोन को मार गिराने के लिए अमेरिका ‘पैट्रियट PAC-3’ इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग कर रहा है । एक ईरानी ड्रोन का मूल्य लगभग ३० लाख रुपये है, जबकि पैट्रियट PAC-3 मिसाइल का मूल्य लगभग ३० करोड रुपये है । यदि ड्रोन को नहीं गिराया गया, तो इससे वायुसेना ठिकानों, तेल रिफाइनरियों, बिजली संयंत्रों एवं अन्य महत्त्वपूर्ण अवसंरचनाओं को भारी क्षति पहुंच सकती है । इसलिए बडे आक्रमणों से अरबों रुपये की क्षति रोकने के लिए महंगी मिसाइलों का उपयोग आवश्यक माना जाता है ।
अमेरिका एवं इजरायल की मिसाइलों की संख्या में कमी
युद्ध आरंभ होने के केवल ४ दिनों के भीतर ही अमेरिका एवं इजरायल के मिसाइल भंडार पर दबाव बढने की संभावना जताई जा रही है । अनुमान के अनुसार युद्ध क्षेत्र में ‘पैट्रियट’ इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या लगभग ६०० से ८०० के बीच है । एक मिसाइल को रोकने के लिए ४ से ६ इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी जाती हैं । अब तक लगभग १५० से २०० इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग हो चुका है । यदि आक्रमण इसी गति से जारी रहे, तो अगले ४ से ७ दिनों में इनकी उपलब्धता संकट में पड सकती है । कुछ रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका जापान एवं दक्षिण कोरिया से कुछ पैट्रियट मिसाइलें मंगाने पर विचार कर रहा है । दूसरी ओर ईरान के पास मिसाइलों एवं ड्रोन का बडा भंडार बताया जाता है । विभिन्न अनुमानों के अनुसार ईरान के पास २०,००० से ५०,००० तक विभिन्न प्रकार की मिसाइलें हो सकती हैं । इसके अलावा सहस्रों ड्रोन भी उपलब्ध हैं, जिन्हें पहाडों के अंदर बने भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा गया है ।
अजरबैजान में ईरानी ड्रोन गिरने के उपरांत ईरान के राजदूत को तलब किया गया
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनके क्षेत्र में ड्रोन गिरने की घटना के संबंध में ईरान के राजदूत को तलब किया गया है । इस घटना से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है । ईरान को इस प्रकरण में तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए एवं भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए । अजरबैजान ने इस प्रकरण में जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है ।
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