छत्रपति संभाजीनगर के मुसलमानबहुल क्षेत्र में अतिक्रमणविरोधी अभियान में बाधा उत्पन्न करनेवाले ‘ए.आई.एम्.आई.एम्.’ (AIMIM) के १० पार्षदों पर अपराध पंजीकृत !

  • प्रशासन को ‘बाप की जागीर’ बोलकर उपहास किए जाने का प्रकरण

  • गुंडागर्दी करनेवाले अवैध हाथगाडीवालों के विरोध में महापालिका ने चलाया था अभियान

(‘ए.आई.एम्.आई.एम्.’ अर्थात ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन अर्थात ही अखिल भारतीय मुस्लिम एकता संघ)

छत्रपति संभाजीनगर – शहर के मुसलमानबहुल शहागंज क्षेत्र में चलाए गए अतिक्रमणविरोधी अभियान के समय महापालिका के दल को ‘क्या महापालिका आपके बाप की जागीर है ?’, इस भाषा में धमकाकर गालीगलोच किया गया था । महापालिका के नेता प्रतिपक्ष अब्दुल समीर साजिदसहित ‘ए.आई.एम्.आई.एम्.’ के १० पार्षद तथा ३ पार्षदों के संबंधियों ने महापालिका के अतिक्रमणविरोधी बल का विरोध किया था । उनकेसहित विरोध करनेवाले ३० से ४० लोगों पर १ मार्च को अपराध पंजीकृत किया गया । महापालिका के अतिक्रमण दल की उपायुक्त सविता सोनवणे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध पंजीकृत किया । इसके कारण अब इन पार्षदों का पद संकट में पड गया है ।

क्या है यह प्रकरण?

कुछ दिन पूर्व शहागंज परिसर में हाथगाडी चालकों ने एक गर्भवती महिला को पीटा था । इस गुंडागर्दी पर लगाम लगाने के लिए महापालिका ने २७ फरवरी को एक बडा अभियान चलाया; परंतु सायंकाल ५ बजे समीर साजिद के नेतृत्व में पार्षदों के गिरोह ने वहां आकर यह कार्रवाई रोकी ।

इन प्रशासनिक अधिकारियों को की गई गालीगलोच एवं धक्कामुक्की !

१. अतिक्रमणविरोधी दल की उपायुक्त सविता सोनवणे
२. सनियंत्रण अधिकारी संतोष वाहुळे एवं अन्य कर्मचारी

पार्षदों ने इन सभी को अश्लील गालीगलोच किया । ‘यहां से निकल जाईए’, ऐसा चिल्लाते हुए उनके साथ धक्कामुक्की कर दल को वहां से भगा दिया । पार्षद फिरोज खान ने इस घटना का वीडियो बनाकर उसे सामाजिक माध्यमों में प्रसारित किया । इस शिकायत में कानून का पालन करनेवाले अधिकारियों की प्रतिमा धूमिल करने का जानबूझकर किया गया यह प्रयास है, ऐसा आरोप लगाया गया है । (यहां प्रतिमा धूमिल करने की अपेक्षा अधिकारियों ने यदि इस विरोध पर ध्यान नहीं दिया होता, तो ऐसा करना अधिकारियों के प्राण संकट में पड सकते थे, इसे ध्यान में लेना होगा । अतः शिकायत में इसका भी उल्लेख होना चाहिए ! – संपादक)

इन पार्षदों पर अपराध पंजीकृत हुए हैं –

१. नेता प्रतिपक्ष अब्दुल समीर साजिद
२. पार्षद नगरसेवक सय्यद उसामा अब्दुल कदीर
३. पार्षद काकासाहेब काकडे
४. पार्षद अकील अहमद
५. पार्षद फिरोज खान
६. पार्षद मेराज खान
७. पार्षद महंमद वाजेद जहागीरदार
८. पार्षद सोहेल कुरैशी
९. पार्षद मुंशी पटेल
१०. पार्षद मोहम्मद वसीम

‘ए.आई.एम्.आई.एम्.’ के प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील का उक्त पार्षदों को संरक्षण देने का निंदनीय प्रयास !

महापालिका आयुक्त के विरुद्ध ही आंदोलन करने धी धमकी !

इम्तियाज जलील

सरकारी काम में बाधा उत्पन्न कर महिला अधिकारियों के साथ उद्दंडतापूर्ण आचरण करनेवाले अपने पार्षदों का समर्थन करते हुए ‘ए.आई.एम्.आई.एम्.’ के प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील ने महापालिका आयुक्त के विरुद्ध ही आक्रामक नीति अपनाई है । उन्होंने ‘जनप्रतिनिधियों पर अपराध पंजीकृत करना दमनतंत्र है’, ऐसा दावा किया है । (वास्तव में देखा जाए, तो यह जलील का ही दमनतंत्र है । उनके इस लोकतंत्रद्रोह के आधार पर जलील पर ही कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए ? – संपादक) अवैध फेरीवालों के कारण सामान्य लोगों को होनेवाला कष्ट तथा उनकी गुंडागर्दी की अपनी सुविधा के अनुसार अनदेखी कर जलील ने ‘प्रशासन ने फेरीवालों को व्यवसाय के लिए स्थान उपलब्ध न किए जाने से ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है’, ऐसा कहते ‘कानून को हाथ में लेनेवाले पार्षदों के इस कृत्य’ का समर्थन किया है । इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अनुशासन को ही ‘अन्यायपूर्ण’ ठहराकर महापालिका आयुक्त के विरुद्ध आंदोलन चलाने की धमकी दी है ।

संपादकीय भूमिका 

  • इसमें केवल अपराध पंजीकृत करना पर्याप्त नहीं है, ऐसा खेदपूर्वक कहना पडता है । ऐसे लोगों को बंदी बनाने हेतु तथा शहागंज में चल रही गुंडागर्दी पर लगाम लगाने के लिए व्यवस्था की इच्छाशक्ति होनी चाहिए ! वह कब होगी, यह प्रश्न है !
  • इस घटना से ‘क्या ये हाथगाडीवाले पार्षदों को ‘हप्ता’ देते हैं ?’, ऐसा प्रश्न किसी ने उठाया अथवा उसप्रकार से आरोप लगाया, तो उसमें अनुचित क्या है ?
  • गुंडों पर की जा रही कार्रवाई का विरोध करनेवाले ‘ए.आई.एम्.आई.एम्.’ के पार्षद क्या कभी जनहित का कार्य कर पाएंगे ?