Judiciary Corruption : क्या आपको भारतीय न्यायपालिका में चल रहा भ्रष्टाचार दिखाई नहीं देता ?

लेखक एवं वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन् ने न्यायाधीशों से किया प्रश्न !

डॉ. आनंद रंगनाथन्

नई देहली – एन्.सी.ई.आर्.टी. की पुस्तक में न्यायालयों में चल रहे भ्रष्टाचार के विषय में लेखन प्रकाशित करने पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया । इस संदर्भ में प्रखर राष्ट्रवादी लेखक, हिन्दुत्वनिष्ठ एवं वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन् ने उनके ‘एक्स’ खाते से उनका स्वयं का एक वीडियो प्रसारित किया है । इस वीडियो में उन्होंने ‘न्याय अंधा होता है, न्यायाधीश नहीं । क्या उन्हें भारतीय न्यायपालिका में चल रहा प्रचंड भ्रष्टाचार दिखाई नहीं देता ?’, यह प्रश्न पूछकर वास्तविकता पर आवाज उठाई है ।

डॉ. आनंद रंगनाथन् द्वारा उठाए गए महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. न्यायाधिश के घर में नकदी की थैलियां मिलने के उपरांत उस पर कौनसे कदम उठाए जाते हैं ? केवल उनका दूसरे शहर में स्थानांतरण होता है ।

२. भारतीय न्यायालयों में ५ करोड ४० लाख से अधिक अभियोग लंबित हैं । न्यायदान की वर्तमान गति को देखा जाए, तो लंबित अभियोगों के निपटारे के लिए ३२३ वर्ष लग सकते हैं । उनमें से १ लाख ८२ सहस्र अभियोग ३० वर्ष पुराने हैं । इनमें बलात्कार एवं यौन शोषण के अधिक अभियोग हैं । इसके साथ ही कारागृह में बंद सभी कैदियों में से ७६ प्रतिशत कैदियों के अभियोग ‘अंडर ट्रायल’ हैं (सुनवाई चल रही है), जिसके कारण वे कारागृह में सड रहे हैं ।

३. भारत में प्रति १० लाख जनसंख्या के लिए केवल २० न्यायाधीश हैं । उच्च न्यायालयों में लगभग ३२ प्रतिशत, जबकि कुल २१ प्रतिशत न्यायालयीन पद खाली हैं ।

४. ‘न्यायाधीश ही न्यायाधिशों की नियुक्ति करते हैं’, इस व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की तथा उसमें सुधार लाने की आवश्यकता है । उच्च न्यायालय के अनुमानित ५० प्रतिशत न्यायाधीश तथा सर्वोच्च न्यायालय के ३३ प्रतिशत न्यायाधीश वरिष्ठ वरिष्ठ न्यायिक सदस्यों से संबंधित हैं ।

५. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा है कि उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है; परंतु तब भी अनुच्छेद २३५ एवं वर्ष १९९७ की घोषणा के अनुसार न्यायपालिका के बाहर का कोई भी व्यक्ति न्यायालयीन भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता । वर्ष २०१७ से २०२१ की अवधि में न्यायालयीन भ्रष्टाचार से संबंधित १ सहस्र ६३१ शिकायतें प्राप्त हुईं । ये शिकायतें भारत के मुख्य न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को भेजी गईं ।

६. भारत के केवल १२ प्रतिशत न्यायाधिशों ने उनकी संपत्ति घोषित की है ।

७. वर्ष १९९३ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश व्ही. रामास्वामी पर आर्थिक अनियमिता एवं सार्वजनिक कोष के दुरूपयोग का आरोप लगा था । संसदीय जांच समिति ने उन्हें दोषी ठहराया; परंतु अंततः बहुमत के अधुरे समर्थन के कारण यह महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में असफल सिद्ध हुआ ।

डॉ. रंगनाथन् ने भ्रष्टाचारी न्यायाधीशों की सूची ही पढकर सुनाई !

डॉ. रंगनाथन् ने इस वीडियो में पिछले कुछ दशकों में भ्रष्टाचारी न्यायाधिशों की सूची ही पढकर सुनाई । वह निम्न प्रकार से हैं –

१. वर्ष २००३ : दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शमित मुखर्जी

२. वर्ष २०११ : कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन

३. वर्ष २०११ : सिक्कीम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, साथ ही कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी.डी. दिनाकरन्

४. वर्ष २०१४ : न्यायाधीश पी.पी. इनामदार

५. वर्ष २०१५ : न्यायाधीश ए.डी. आचार्य

६. वर्ष २०१६ : न्यायाधीश रचना तिवारी लखनपाल

७. वर्ष २०२५ : न्यायाधीश यशवंत वर्मा

इन सभी न्यायाधिशों पर भ्रष्टाचार, साथ ही अनुकूल निर्णय देने के लिए ‘आर्थिक’ समझौता करने के आरोप हैं । उन पर कार्रवाई भी हुई है ।

अब तक अनेक न्यायाधीशों ने न्यायपालिका के भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला ! – डॉ. रंगनाथन्

उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिशों ने भारतीय न्यायपालिका में भ्रष्टाचार होने की बात कही है । पूर्व मुख्य न्यायाधीश वेंकटरमन ने उच्च न्यायालय के ९० प्रतिशत न्यायाधिशों के भ्रष्टाचारी होने की बात कही है । न्यायाधीश एस्.पी. भरूचा, न्यायाधीश माइकल सल्ढाणा, न्यायाधीश जे. चेलामेश्वर, न्यायाधीशबी.आर्. कृष्णा अय्यर, न्यायाधीश गांगुली, न्यायाधीश उमा पॉल आदि ने समय-समय पर न्यायालयों में होनेवाले भ्रष्टाचार का स्तर तथा उसके कारण न्यायपालिका के खोखले बनने की बात कही है ।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने ‘अब तक ३ मुख्य न्यायाधिशों ने राजनीतिक दबाव के कारण अभियोगों को आगे खींचा । न्यायपालिका ने उसके भ्रष्ट न्यायाधिशों को बचाया’, ऐसा वक्तव्य दिया था । पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे.एस्. वर्मा ने ‘सर्वोच्च न्यायालय का एक भी न्यायाधीश भ्रष्ट नहीं है’, यह वक्तव्य झूठा है’, ऐसा कहा था । पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस भ्रष्टाचार में न्यायपालिका के भी संलिप्त होने की बात कही है ।