परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा वर्ष १९८१ में सम्मोहन उपचार संबंधी अवधारणाओं के विषय में किया गया लेखन

‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ मनोरोग के सम्मोहन चिकित्सा से ठीक होने की कारणमीमांसा

सच्चिदानंद परब्रह्म डाॅ. आठवलेजी

१. ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ मनोरोग सम्मोहन उपचार से ठीक न होना, ऐसी मनोचिकित्सकों की गलतधारणा

‘कुछ मनोचिकित्सकों की यह अवधारणा है कि मन से संबंधित रोग ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ सम्मोहन उपचार से ठीक नहीं होता; क्योंकि उसमें मस्तिष्क की कुछ विशिष्ट कोशिकाओं में परिवर्तन आता है । (मानसिक रोग ‘साइकोसिस’ नामक प्रकार में मन की कुछ बडी बीमारियों का समावेश है । हमारे शोध कार्य में यह दिखाई दिया है कि सम्मोहन उपचार लेने की रोगियों में क्षमता हो तथा उन्होंने लगभग ८ से ९ महिनों तक निरंतर उपचार लिया, तो उनमें से अनेक लोगों का रोग ठीक हो सकता है । हमारे इस शोध पर कुछ मनोचिकित्सकों का यह कहना होता है, ‘इस रोग का इन उपचारों से ठीक होना असंभव है; क्योंकि सम्मोहित अवस्था में केवल सूचनाएं देकर मस्तिष्क की कोशिकाओं में परिवर्तन कैसे हो पाएगा ?’ ऐसे मतभेदों के समय ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ ठीक होगा या नहीं ?, यह विषय नहीं होना चाहिए; क्योंकि अनेक रोगियों की तो यह वास्तविकता है । इसीलिए ‘यह रोग ठीक होने का शास्त्रीय कारण क्या हो सकता है ?’, इसका विचार किया जाना चाहिए ।

२. सूचनाओं से शरीर के अन्य भागों की कोशिकाओं में परिवर्तन आने के कुछ उदाहरण

‘केवल सूचनाओं से मस्तिष्क की कोशिकाओं में कैसे परिवर्तन आएगा ?’, यह विवाद का मुख्य बिंदु है । इसलिए हम पहले इसका उत्तर देखेंगे ।

अ. सूचनाओं अथवा विचारों से शारीरिक परिवर्तन होते हैं, यह तो सर्वविदित है । पेट में होनेवाले ‘अल्सर’ में से एक है चिंता के कारण होनेवाला ‘अल्सर’ ! ‘एक्जिमा’ में से एक प्रकार है चिंता के कारण होनेवाला ‘एक्जिमा !’ कोशिकाओं में आए परिवर्तनों से होनेवाले शारीरिक रोग सम्मोहन उपचार से अर्थात केवल सूचनाएं देकर ठीक हो सकते हैं ।

आ. ‘विचारों से शरीर की कोशिकाओं में परिवर्तन आता है’, इसका एक और उदाहरण यह है कि जिन व्यक्तियों को गले का, छाती अथवा बच्चेदानी का कैंसर होगा’, ऐसा डर लगता है; उनमें से अनेक लोगों को संबंधित अंगों का कैंसर होता है, ऐसा दिखाई दिया ।

इ. इसके साथ ही ‘देवता अथवा किसी संत के आशीर्वाद से अथवा प्रसाद से मैं स्वस्थ हो सकता हूं’, यह उत्कट श्रद्धा रखनेवालों में से कुछ लोगों का कैंसर अपनेआप ही ठीक हुआ, ऐसा भी दिखाई दिया है । इसका अर्थ एक प्रकार की स्वसूचनाओं से ही कैंसर होना अथवा ठीक होना जैसे शारीरिक परिवर्तन दिखाई दिए हैं ।

इससे ‘केवल सूचनाओं से मस्तिष्क की कोशिकाओं में परिवर्तन आना असंभव है’, यह कहना कैसे अनुचित है ?, यह आपके ध्यान में आया ही होगा ।

३. सम्मोहनावस्था में दी गई सूचनाओं के कारण ‘‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ से ग्रस्त रोगी के मस्तिष्क की कोशिकाओं में परिवर्तन होने के संदर्भ में स्पष्टीकरण

सम्मोहन उपचारों के संदर्भ में मन के सभी रोगों में ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ को थोडा भिन्न समझने का कारण यह है कि ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ में मस्तिष्क की विशिष्ट कोशिकाओं में शारीरिक परिवर्तन होते हैं, यह हाल ही में सिद्ध हुआ है । ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ को भिन्न समझने की आवश्यकता नहीं है । मन के किसी रोग से ग्रस्त व्यक्ति के विचार, भावना अथवा कृति में कुछ तो परिवर्तन होता है । जब ऐसा परिवर्तन होता है, तब मस्तिष्क की किसी कोशिका में कुछ तो परिवर्तन आया ही होगा । कोई मनुष्य पहले उतावला नहीं था; परंतु कुछ समय उपरांत उतावला बन गया । ऐसी स्थिति में उसके मस्तिष्क की कोशिकाओं में कुछ तो परिवर्तन हुआ ही होता है; परंतु हाल ही की शोध की पद्धतियां अभी अपूर्ण होने के कारण उन परिवर्तनों की हमें जानकारी नहीं मिली है; परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि परिवर्तन नहीं हुआ है । माता-पिता बच्चों को ‘कैसे बोलना चाहिए ? हमारा आचरण कैसे होना चाहिए ?’ इत्यादि सिखाते हैं । वह जानकारी मस्तिष्क में कहीं तो संग्रहित होती है अर्थात मस्तिष्क की कोशिकाओं में कुछ तो परिवर्तन होता है । वह परिवर्तन माता-पिता द्वारा ही बोलकर घडा होता है । उसी प्रकार सम्मोहन उपचार-पद्धति में केवल बोलकर ही मस्तिष्क की कोशिकाओं में परिवर्तन लाकर कुछ लोगों का ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ ठीक किया जा सकता है ।

४. ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ का सम्मोहन उपचार से ठीक न होने का कारण

अब दूसरा सूत्र यह है कि प्रत्येक रोगी का ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ सम्मोहन उपचार से क्यों ठीक नहीं होता ?’ उसका कारण यह है कि जैसे कुछ लोगों में ‘पेट का ‘अल्सर’ तथा त्वचा का ‘एक्जिमा’ इत्यादि रोग शारीरिक कारणों से होते हैं तथा अन्य लोगों में अंतर्मन की चिंता के कारण होते हैं । उसी प्रकार कुछ लोगों में शारीरिक कारणों से अर्थात मस्तिष्क की विशिष्ट कोशिकाओं में परिवर्तन से होता है तथा अन्य लोगों में चिंता के कारण । ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ होने पर उसके मस्तिष्क की विशिष्ट कोशिकाओं में परिवर्तन होता होगा । अंतर्मन की चिंता के कारण ‘पैरेनॉइड सिजोफ्रेनिया’ हुआ है, तो सम्मोहन उपचारों से ठीक हो सकता है तथा अन्य कारणों से, उदा. आध्यात्मिक कारणों से हुआ है; इसलिए ठीक नहीं हो सकता । यह सूत्र मन के सभी बडे रोगों के लिए लागू होता है ।’

– परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले