UN India-Pakistan : पाक को भिक्षा में मिलने वाली धनराशि से जम्मू-कश्मीर का बजट दोगुना !

संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर का सूत्र उपस्थित करने वाले पाकिस्तान को भारत ने पुनः फटकारा !

भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ

न्यूयॉर्क (अमेरिका) – पाकिस्तान को कदाचित् इस सत्य का सामना करना कठिन होगा; किंतु मैं उन्हें यह बताना चाहती हूं कि, अकेले जम्मू-कश्मीर के विकास का बजट उनके संपूर्ण देश के ‘बेलआउट पैकेज’ (आपातकालीन आर्थिक सहायता) से दोगुने से भी अधिक है । पाकिस्तान सहायता प्राप्त करने हेतु कटोरा लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सम्मुख खड़ा है, साथ ही पाकिस्तान एक प्रकार के ‘ला ला लैंड’ अर्थात अस्तित्वहीन विश्व में जी रहा है । वास्तव में विश्व में क्या घटित हो रहा है ?, यह उसे ज्ञात भी नहीं होगा, इन शब्दों में भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के ५५ वें सत्र में पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया । इस सत्र में पाक ने कश्मीर का सूत्र उपस्थित किया था । उस समय भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को उपरोक्त शब्दों में खरी-खरी सुनाई ।

इस्लामी देशों के संगठन पर भी भारत की आलोचना

अनुपमा सिंह ने इस्लामी देशों के संगठन OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन – इस्लामी सहयोग संगठन) की भी कटु आलोचना की । अनुपमा सिंह ने कहा कि :

१. पाकिस्तान ओ.आई.सी. द्वारा क्रियान्वित दोषपूर्ण नीतियों का दास बन गया है । यह संगठन पाकिस्तान में राजनीतिक समझौतों जैसी त्रुटियां करने वाला संगठन है । पाकिस्तान ओ.आई.सी. संगठन की कठपुतली बन गया है । राजनीतिक लाभ हेतु इस संगठन का सुविधाजनक उपयोग किया जा रहा है । यह संगठन भी पाकिस्तान सरकार का उपयोग कर रहा है ।

२. पाकिस्तान तथा उसके प्रतिनिधि अपनी इच्छानुसार बातें करते रहते हैं, जिनका कोई आधार नहीं होता । पाकिस्तान कितना भी दुष्प्रचार करे, उसका कोई लाभ नहीं होगा ।

३. पाकिस्तान का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर का वर्ष १९४७ में भारत में विलय अनुचित था । पाकिस्तान ने हमारे ही देश के पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) पर अवैध नियंत्रण स्थापित कर रखा है तथा अब हमें ही दोष दे रहे हैं ।

४. जम्मू-कश्मीर में जो मतदान हुआ, उसमें जनता ने पाकिस्तान के आतंकवाद तथा हिंसा को अस्वीकार कर दिया है । जम्मू-कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं । इसलिए वहां के लोग लोकतंत्र का मार्ग स्वीकार कर रहे हैं । विश्व का सबसे विशाल रेलवे पुल चिनाब नदी पर निर्मित है । यदि पाकिस्तान को वह दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है, तो वह वास्तव में स्वप्न के विश्व में विचरण कर रहा है ।

संपादकीय भूमिका 

भारत द्वारा पाकिस्तान को इस प्रकार कितनी ही बार फटकार लगाई जाए, किंतु गैंडे के समान मोटी खाल वाले निर्लज्ज पाकिस्तान पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा । वह केवल शस्त्रों की ही भाषा समझता है तथा उसे उसी भाषा में प्रत्युत्तर देना चाहिए !