भारत के लिए संकट की सूचना !

ढाका – बांग्लादेश के सामान्य निर्वाचन में कट्टरतावादी इस्लामी पक्ष ‘जमात-ए-इस्लामी’ सत्ता में नहीं आ सका है , तथापि पूर्व में प्रतिबन्धित इस पक्ष ने गठबन्धन के सहयोगियों के साथ ७७ सीटें जीती हैं । बांग्लादेश में ‘जमात-ए-इस्लामी’ का प्रभाव बढ गया है एवं पाकिस्तान तथा तुर्कीये जैसे इस्लामी देश उसका लाभ लेने के प्रयत्न में हैं । तुर्कीये के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगान ने इस पृष्ठभूमि पर अपने पुत्र बिलाल एर्दोगान को बांग्लादेश भेजा । बिलाल एर्दोगान जब ढाका पहुंचे , तब ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ के प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण कार्यक्रम को २४ घण्टे भी पूर्ण नहीं हुए थे । इसलिए इस यात्रा को विशेष महत्त्व दिया जा रहा है । तुर्कीये एवं बांग्लादेश के इस्लामी गुटों के मध्य बढते सम्बन्धों का यह प्रतीक माना जा रहा है एवं भारत के लिए यह संकट की सूचना सिद्ध हो रही है , ऐसा कहा जा रहा है ।
Geopolitical Shift in the Neighborhood 🚨
The rising influence of the extremist Jamaat-e-Islami in Bangladesh is being eyed by Pakistan and Turkey as a golden opportunity to expand their reach. 📉🤝
This alliance poses a direct "red alert" for India's regional security. 🚩… pic.twitter.com/h3HY32D33P
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 20, 2026
१. बिलाल एर्दोगान के साथ तुर्कीये के पूर्व फुटबॉल खिलाडी मेसुत ओझिल एवं तुर्कीये सरकार समर्थित ‘टिका’ के अर्थात ‘टर्किश को-ऑपरेशन एण्ड को-ऑर्डिनेशन एजेन्सी’ के अध्यक्ष अब्दुल्ला आरोन भी उपस्थित थे ।
२. बिलाल एर्दोगान के प्रतिनिधि मण्डल ने ढाका विश्वविद्यालय में नवीन निर्मित चिकित्सा केन्द्र का उद्घाटन किया । इस प्रकल्प को ‘टिका’ संस्था ने धन दिया है । यह चिकित्सा केन्द्र प्रकल्प ‘जमात-ए-इस्लामी’ के विद्यार्थी संगठन द्वारा ‘ढाका विश्वविद्यालय केन्द्रीय विद्यार्थी संघ’ निर्वाचन में विजय प्राप्त करने के पश्चात आरम्भ किया गया था ।
३. इस यात्रा को जमात एवं तुर्कीये के मध्य बढती निकटता की दृष्टि से देखा जा रहा है ।
४. दक्षिण एशिया में ‘टिका’ एवं तुर्कीये से सम्बन्धित अन्य इस्लामी संस्थाएं सक्रिय हो रही हैं एवं यह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है ।
५. पाकिस्तान ने भी बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय सम्बन्ध पुनः प्रस्थापित करने का प्रयत्न किया है । इस प्रक्रिया में उसने जमात के साथ सहयोग बढाया है एवं भारत का प्रभाव अल्प करने का प्रयत्न आरम्भ किया है ।
६. पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था ‘इंटर -सर्विसेज इण्टेलिजेन्स’ पर आरोप हैं कि , उसने हसीना सरकार के विरुद्ध आंदोलन भडकाने के लिए ‘जमात-ए-इस्लामी’ के विद्यार्थी संगठन के साथ कार्य किया था ।
संपादकीय भूमिकापाकिस्तान के साथ अब तुर्कीये को नियंत्रण में लाने के लिए भारत द्वारा आक्रामक कदम उठाना आवश्यक ! |
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