राजनीतिक नेताओं को भाषण से पूर्व अपने विचार सुधारने चाहिए ! – Supreme Court

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा

नई दिल्ली – सभी राजनीतिक दलों से हमारा अनुरोध है कि वे संवैधानिक नैतिकता, मूल्यों, आपसी सम्मान एवं आत्मसम्मान के सिद्धांतों का पालन करें । आप वैचारिक सिद्धांतों के आधार पर चुनाव लडते हैं, यह ठीक है; किन्तु एक-दूसरे का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है । नेताओं को देश में बंधुत्व को बढावा देना चाहिए । घृणास्पद भाषणों को रोकने के लिए पूर्व विचारों को सुधारना आवश्यक है, क्योंकि भाषण से पूर्व विचार आते हैं । आप लोगों से इस प्रकार के आचरण की अपेक्षा नहीं की जाती, ऐसा आग्रह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से संबंधित प्रकरण की सुनवाई के समय किया ।

१. सर्वोच्च न्यायालय ९ लोगों द्वारा प्रविष्ट की गई याचिका पर सुनवाई कर रहा था । यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के हाल ही के भाषणों के एवं भाजपा असम द्वारा प्रसारित एक लघु चलचित्र के संदर्भ में प्रविष्ट की गई थी ।

२. इस लघु चलचित्र में एक विशेष समुदाय को लक्ष्य बनाने का आरोप था । याचिका में संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों द्वारा गलत एवं घृणास्पद भाषणों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी ।

३. सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के समय याचिका पर आपत्ति जताई । मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह याचिका एक व्यक्ति के विरुद्ध है । विशेष रूप से इस समय इसे वापस लें एवं एक नई याचिका प्रविष्ट करें, जिसमें सभी राजनीतिक दलों का उल्लेख हो ।

४. न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को ऐसा संकेत नहीं देना चाहिए कि वे किसी विशेष दल या व्यक्ति के विरुद्ध हैं । मान लीजिए कि हम आधिकारिक दिशा-निर्देश प्रकाशित कर दें, तो उनका पालन कौन करेगा ? हमने पूर्व में भी अनेक दिशा-निर्देश जारी किए हैं । उनका पालन सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व राजनीतिक दलों का ही है ।