
मुंबई – ‘महाराष्ट्र राज्य विशेष पिछड़ा प्रवर्ग-अ’ के अंतर्गत मुसलमानों को शासकीय एवं अर्धशासकीय सीधी सेवा (सरकारी स्वामित्व वाले अर्धशासकीय कार्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति हेतु प्रत्यक्ष परीक्षा अथवा साक्षात्कार के माध्यम से होने वाली नियुक्ति) भर्ती में तथा शैक्षणिक संस्थानों के स्थानों के प्रवेश में ५ प्रतिशत आरक्षण देने के विषय में शासन का निर्णय तथा परिपत्रक सामाजिक न्याय विभाग ने निरस्त कर दिया है । वर्ष २०१४ में विधानसभा निर्वाचन से पूर्व राज्य की कांग्रेस सरकार ने मुसलमानों के आरक्षण हेतु ९ जुलाई २०१४ को अध्यादेश निर्गत किया था । १४ नवंबर २०१४ को मुंबई उच्च न्यायालय ने शासकीय एवं अर्धशासकीय सीधी सेवा भर्ती में आरक्षण के निर्णय पर अंतरिम स्थगन आदेश दिया था । (अब यह आरक्षण निरस्त हुआ, यह उत्तम ही हुआ; परंतु १२ वर्ष पूर्व न्यायालय द्वारा निर्णय देने के उपरांत भी उसके क्रियान्वयन में १२ वर्ष क्यों लगे ? ऐसा प्रश्न यदि जनता के मन में उपस्थित हो, तो उसमें अनुचित क्या है ? – संपादक)
Maharashtra’s Social Justice Department withdraws the
5% Muslim reservation in govt jobs – a quota that had already been stayed by the Bombay High Court over a decade ago.AIMIM leader Imtiaz Jaleel has opposed the decision to scrap it.
PC: @CNNnews18 pic.twitter.com/V7Clf5nise
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 18, 2026
१. सरकारी एवं अर्धसरकारी नौकरियों में मुसलमानों को आरक्षण देने के निर्णय के विरुद्ध संजित शुक्ला ने मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रविष्ट की थी ।
२. इसी याचिका के आधार पर न्यायालय ने इस निर्णय पर अंतरिम रोक लगाई थी ।
३. आरक्षण की ५० प्रतिशत सीमा का उल्लंघन होने के कारण न्यायालय ने इस निर्णय को स्थगित किया था, साथ ही कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए इस अध्यादेश का २३ दिसंबर २०१४ तक विधि (कानून) में रूपांतरण होना भी आवश्यक था ।
४. वास्तव में इस विषय में कोई विधि नहीं बनाई गई । अतः स्वतः ही यह अध्यादेश निरस्त हो गया । अध्यादेश निरस्त होने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस विषय में निर्गत शासन निर्णय भी निरस्त कर दिए गए ।
५. ऐसा होने पर भी, सामाजिक न्याय विभाग द्वारा निर्गत इस विषय का शासन आदेश तथा परिपत्रक निरस्त नहीं किया गया था । १७ फरवरी २०२६ को शासन ने निर्णय लेकर पूर्व निर्णय को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा निरस्त किए जाने का उल्लेख किया है ।
एम्.आय.एम्. (AIMIM) के नेता इम्तियाज जलील का मुसलमानों का आरक्षण हटाने के नियम का विरोध !
(ए.आय.एम्.आय.एम्. अर्थात ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन – अखिल भारतीय मुस्लिम एकता संघ)

मुंबई – यु.पी.एस्.सी. (UPSC – प्रशासकीय सेवा परीक्षा) में राज्य के मुसलमान विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है । ब्राह्मण समाज में भी सभी अत्यंत धनवान व्यक्ति हैं, ऐसा नहीं है । जिन्हें शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा है; परंतु वे नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें भी आरक्षण मिलना चाहिए । (ब्राह्मणों में निर्धन होने पर भी वे आरक्षण नहीं लेते, यह जलील क्यों नहीं बताते ? – संपादक) निर्धन लोगों को सहायता करने की आवश्यकता है । मराठा समाज के आरक्षण को हमने समर्थन दिया था । आय का स्रोत देखकर कुछ छूट दी जाए, इसके लिए हमने निरंतर प्रयास किए हैं । निर्धन मुसलमान शिक्षा से वंचित न रहे, ऐसी प्रतिक्रिया ए.आय.एम्.आय.एम्. के नेता इम्तियाज जलील ने दी है ।
प.पू. सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश के विषय में किए गए कथन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘भागवत की मानसिकता देश को खंडित करने की है । ऐसे विचारों के लोगों ने देश को बलहीन किया है । ऐसे नेताओं की तुलना मैं अजमल कसाब से करता हूँ । वह देश को तोड़ने आया था । आज का देशभक्त मुसलमान, ५ समय की नमाज पढ़ने वाला है।’’ |
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