
नई दिल्ली – भारत में देसी गाय के गोबर की वैश्विक बाजार में बहुत मांग है । इस गोबर का कई वर्षों तक केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक कार्यों के लिए उपयोग होता था । अब प्राकृतिक खेती, जैविक खाद तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के रूप में इसकी मांग बढ गई है । संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत जैसे शुष्क जलवायु वाले देशों में खजूर की खेती के लिए यह गोबर अत्यंत उपयोगी है । इसके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, चीन, मालदीव तथा सिंगापुर जैसे देशों में भी गोबर की मांग बढ रही है ।
वैश्विक स्तर पर गोबर तथा उससे बने जैविक खाद, ‘कंपोस्ट’ (प्राकृतिक पदार्थ से बना) खाद जैसे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सहस्रों करोड रुपये में बेचे जा रहे हैं । प्रति किलोग्राम ताजे गोबर को बाजार में ऊंचा मूल्य मिल रहा है । गोबर का यह व्यापार देश के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात स्रोत बनता जा रहा है । जैविक खाद में गाय के गोबर में उपस्थित नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम जैसे पोषक तत्व लाभदायक सिद्ध होते हैं । भारत में बडी मात्रा में पशुधन होने के कारण प्रतिदिन गोबर का उत्पादन अत्यधिक होता है । इसलिए निर्यात के लिए गोबर की पर्याप्त उपलब्धता भी है ।
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