(टिप्पणी : ‘समुद्र शास्त्र’ अर्थात व्यक्ति का चेहरा, हाथ, पैर आदि शरीर के विभिन्न भागों के आधार पर व्यक्ति का स्वभाव उजागर करनेवाला शास्त्र ।)

सुनीता शुक्ला
प्रश्न : ‘व्यक्ति के पैर का अंगूठा एवं अंगूठे की बगलवाली उंगली के मध्य की दूरी व्यक्ति के अनुसार भिन्न होती है । कुछ व्यक्तियों के संदर्भ में यह दूरी अल्प होती है, जबकि कुछ व्यक्तियों के संदर्भ में वह अधिक होती है । समुद्र शास्त्र के अनुसार इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर : व्यक्ति के शरीर का प्रत्येक भाग उसके प्रारब्ध (पूर्वकर्माें) के अनुसार होता है । वह हमारे स्वभाव को दर्शाता है । पैर का अंगूठा एवं अंगूठे की बगलवाली उंगली के मध्य की दूरी अल्प-अधिक होने के संदर्भ में आगे विवेचन दिया गया है ।
१. पैर का अंगूठा एवं अंगूठे के बगलवाली उंगली के मध्य की दूरी अधिक होना
अ. पैर का अंगूठा एवं बगलवाली उंगली के मध्य की दूरी अधिक हो, तो व्यक्ति अन्यों से अलग रहता है, वह सबके साथ घुल-मिल नहीं पाता ।
आ. ऐसा व्यक्ति यदि अध्यात्म के मार्ग पर हो, तो वह समाज से अलिप्त रहता है । वह भावनाशील संबंधों में नहीं फंसता ।
इ. ऐसा व्यक्ति यदि संपूर्णरूप से गृहस्थ हो, तो उसे बहुत अहंकार हो सकता है । वह अन्यों की अपेक्षा स्वयं को श्रेष्ठ मानता है; इसलिए वह अन्यों से अलग रहता है ।
ई. ऐसा व्यक्ति यदि जीवन के कठिन समय से गुजर रहा हो, तो वह निराशा में जाकर स्वयं को अन्यों से अलग कर सकता है ।
२. अंगूठे के बगलवाली उंगली अंगूठे से लंबी होना
ऐसा व्यक्ति असामान्य है तथा वह जीवन में बडी सफलता प्राप्त कर सकता है; परंतु उसका अहंकार उसके लिए बाधा बन सकता है । ऐसा व्यक्ति अपना अहंकार अल्प करने हेतु ही जन्म लेता है । उसने यदि अपने अहंकार पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया, तो वह जीवन में अच्छा कार्य कर सकता है ।
३. पैर का अंगूठा एवं बगलवाली उंगली के मध्य की दूरी अल्प होना
अ. पैर का अंगूठा एवं बगलवाली उंगली के मध्य की दूरी अल्प हो, तो ऐसा व्यक्ति अन्यों के साथ सहजता से घुल-मिल जाता है ।
आ. ऐसा व्यक्ति यदि अध्यात्म के मार्ग पर हो, तो उसमें प्रेमभाव होता है तथा वह अन्यों का अधिक विचार करता है ।
इ. ऐसा व्यक्ति यदि संपूर्णरूप से गृहस्थ हो, तो उसके भावनाशील संबंधों में अटकने की संभावना अधिक होती है । उसमें भावनाशीलता अधिक होती है ।
४. अंगूठे के बगलवाली उंगली अंगूठे की अपेक्षा (लंबाई में) छोटी होना
ऐसे व्यक्ति में अहं का स्तर अल्प होता है तथा सुनने की वृत्ति एवं समझदारी अधिक होती है ।’
– हस्तरेखा विशेषज्ञ सुनीता शुक्ला, ऋषिकेश, उत्तराखंड. (११.११.२०२५)
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