
ढाका (बांग्लादेश) – ‘बांग्लादेश हिन्दू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल’ ने दावा किया है कि वर्ष २०२५ में बांग्लादेश में धार्मिक हिंसा की ५२२ घटनाएं हुईं । इसमें ६६ लोग मारे गए, तथा ९५ मंदिरों एवं धार्मिक जगहों पर आक्रमण हुए । अंतरिम सरकार ने कहा था कि केवल ७१ घटनाएं धार्मिक हिंसा की थीं । ‘यूनिटी काउंसिल’ ने एक पत्रकार परिषद में जानकारी दी कि कैसे अल्पसंख्यक समुदाय को लक्ष्य किया जा रहा है ।
Press Conference of BHBCUC
On January 29, 2026
Regarding on going Communal Violence. pic.twitter.com/S1Qrcm1Oj9— Bangladesh Hindu Buddhist Christian Unity Council (@BhbcopOrg) January 29, 2026
काउंसिल के कार्यकारी महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ ने माध्यमों के अहवाल के आधार पर संकलित किए गए आंकडों को प्रस्तुत किया । इन आंकडों के अनुसार, महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार की २८ घटनाएं दर्ज हुईं ; इनमें बलात्कार तथा सामूहिक बलात्कार सम्मिलित हैं । १०२ घर एवं दुकानें तोड दी गईं । ६६ प्रकरणों में जमीन तथा विपणि (दुकान) जब्त की गई । ३८ लोगों को अपहरण के आरोप में, ४७ लोगों को जान से मारने की धमकी के आरोप में तथा ३६ लोगों को ईशनिंदा के असत्य आरोपों में बंदी बनाया ।
जनवरी २०२६ में भी धार्मिक हिंसा
१ जनवरी से २७ जनवरी, २०२६ के मध्य ४२ नई हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं । इन दिनों में ११ हत्याएं हुईं । मंदिरों तथा चर्चों पर ९ बार आक्रमण हुए । अल्पसंख्यक समुदाय भय के साये में है । यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि लोग अपना मत देने से डरते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार तथा निर्वाचन आयोग की होगी ।
95 Temples Attacked. 66 Hindus Killed. Bangladesh bleeds. 🚨🇧🇩
Arrest of Hindu leader Chinmoy Krishna Das exposes the state’s crackdown on voices speaking for minorities.
522 religious violence cases in 2025: 🛕 95 temples attacked
🧕 28 crimes against women
🏚️ 102 homes &… https://t.co/UyNlFEFGEW pic.twitter.com/W1Wdg1OWR5— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) January 31, 2026
सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए मोनिंद्र कुमार नाथ ने कहा कि सरकार की परिभाषा के अनुसार, हत्या, बलात्कार या घर जलाना तब तक धर्म का मुद्दा नहीं समझा जाता जब तक कि यह किसी मंदिर के परिसर में न हुआ हो । यह अल्पसंख्यंक द्वारा की गई धोखाधडी है ।
बडे हिन्दू नेता चिन्मय कृष्ण दास को बंदी बनाने के साथ-साथ दूसरे नेताओं के विरुद्ध लिखित प्रकरणों का उल्लेख करते हुए यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार स्वयं अपराध कर रही है ।
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