नितंब की मांसपेशियों का महत्त्व एवं व्यायाम !

स्वस्थ जीवन हेतु व्यायाम

‘प्रायः हमारे शरीर में कहीं भी पीडा होने पर हम उस पीडा का समाधान ढूंढने लगते हैं । ऐसी स्थिति में जब हम भौतिकोपचार विशेषज्ञ (physiotherapist) के पास जाते हैं, तब हमें व्यायाम बताए जाते हैं । केवल व्यायाम करने से पीडा अल्प होती है, हमारे क्रियाकलाप में सुधार आता है तथा पुनः पीडा होने की संभावना अल्प हो जाती है । तो ऐसा क्यों होता है ? केवल व्यायाम से ही परिवर्तन क्यों होता है ? इसका उत्तर यह है कि व्यायाम से मांसपेशियों की शक्ति बढती है । हमारे शरीर की प्रत्येक मांसपेशी के भिन्न-भिन्न कार्य होते हैं; इसलिए प्रत्येक मांसपेशी का बल बनााए रखना तथा उसे बढाना अति आवश्यक है । शरीर में विद्यमान महत्त्वपूर्ण मांसपेशियों के समूहों में से एक हैं नितंब की मांसपशियां (Gluteal muscles) ! नितंब की मांसपेशियां जितनी शक्तिशाली होंगी, कमरदर्द, घुटने का दर्द, एडी का दर्द एवं साइटिका (‘साइटिक नर्व [कमर से निकलकर नितंब, जंघा एवं पोटली से पैर तक जानेवाली बडी नस] दब जाने से होनेवाली पीडा), इन समस्याओं की संभावना उतनी ही अल्प हो जाती है तथा जिन्हें पहले से ही ऐसी पीडा होगी, उनकी पीडा अल्प होने में सहायता मिल सकती है; इसीलिए अब हम ‘नितंब की मांसपेशियों का क्या महत्त्व है ? तथा उन्हें शक्तिशाली बनाने के लिए कौन-से सरल एवं उपयुक्त व्यायाम किए जा सकते हैं ?’, इसकी जानकारी लेंगे । 

(भाग १)

१. नितंब की मांसपेशियों के कार्य

श्रीमती अक्षता रेडकर

हमारे नित्य क्रियाकलापों में पैरों को पुट्ठे से (पुट्ठा : जंघा की हड्डी [femur] एवं श्रोणी [pelvis] को जोडनेवाला शरीर का एक बडा जोड) पीछे, साथ ही एक ओर ढकेलते समय, बैठकर उठते समय, खडे होते समय, भार उठाते समय, पैदल चलते समय, सीढी चढते समय, साइकिल चलाते समय अथवा भागते समय शक्ति से काम करनेवाला मांसपेशियों का समूह अर्थात नितंब की मांसपेशियां  (Gluteal Muscles)’ ।

नितंब की मांसपेशियों में ३ प्रमुख मांसपेशियां होती हैं – ‘मैक्सिमस’, ‘मिडिअस’ एवं ‘मिनिमस’, शरीर का संतुलन बिंदु, कमर की स्थिरता एवं पैरों की शक्ति इत्यादि नितंब की मांसपेशियों की सशक्तता पर निर्भर होती है । उसके कारण उनकी शक्ति शरीर के पूरे क्रियाकलापों की क्षमता पर सीधा परिणाम डालती है ।

अ. ये मांसपेशियां शरीर के धड की स्थिरता के (Core Stability के) महत्त्वपूर्ण अंग हैं । वे रीढ की हड्डी एवं श्रोणी (pelvis) को दृढता से आधार देकर कमर के तनाव को अल्प करती हैं ।

आ. एक पैर पर संतुलन बनाते समय कमर को स्थिरता देने में नितंब की मांसपेशियां महत्त्वपूर्ण कार्य करती हैं ।

इ. कंधे, पीठ, कमर एवं घुटनों की रचना नितंब की मांसपेशियों की सशक्तता पर निर्भर होती है ।

२. नितंब की मांसपेशियों के दुर्बल होने के कारण 

अ. लंबे समय तक निरंतर बैठे अथवा सोए रहना (Sedentary lifestyle), इसके कारण ये मांसपेशियां निष्क्रिय बनी रहती हैं ।

आ. शारीरिक क्रियाकलापों का अभाव, उदा. पैदल चलना, सीढी चढना इत्यादि टालना

इ. शरीर का बल बढानेवाले व्यायाम न करना

ई. शरीर की अनुचित मुद्रा (Posture), उदा. कमर में अत्यधिक झुकाव (Hyperlordosis), कमर आगे झुकी हुई (Sway back posture) होना (इसके कारण नितंब की मांसपेशियां दुर्बल हो जाती हैं ।)

(चित्र क्र. १ देखें) 

उ. पीठ, कमर अथवा घुटने की पीडा के कारण लोग कार्य करना (ऐक्टिव रहना) टालते हैं, जिसके परिणामस्वरूप नितंब की मांसपेशियां दुर्बल हो जाती हैं ।

३. नितंब की मांसपेशियों के दुर्बल होने के परिणाम

३ अ. कमरदर्द : नितंब की मांसपेशियां दुर्बल होने से पीठ की मांसपेशियों को अधिक कार्य करना पडता है, साथ ही रीढ के जोडों पर अतिरिक्त तनाव आने लगता है, जिसके परिणामस्वरूप कमरदर्द होता है ।

३ आ. घुटनों का दर्द : नितंब की मांसपेशियां दुर्बल होने से पैदल चलते समय दोनों पैरों में शरीर का भार उचित ढंग से वितरित नहीं हो पाता । उसके कारण घुटनों पर असंतुलित भार पडता है, परिणामस्वरूप घुटने एवं टखनों में पीडा होने लगती है ।

३ इ. शरीर की मुद्रा में संतुलन का अभाव (Postural imbalance) दिखने लगता है, उदा. आगे झुकी हुई कमर, कमर में अत्यधिक झुकाव तथा आगे झुके हुए कंधे

३ ई. नितंब की मांसपेशियां पैरों को पीछे ले जाती हैं, इसलिए उनके दुर्बल होने से जांघों के पिछले भाग की मांसपेशियों (Hamstrings) तथा कमर की मांसपेशियों को अधिक काम करना पडता है । उसके कारण वह सख्त (tight) हो सकती हैं तथा उनका अधिक उपयोग होने से (overuse) पीडा हो सकती है ।

३ उ. पैदल चलते समय शरीर एक ओर झुका हुआ दिखाई देता है ।

३ ऊ. खिलाडी अथवा नर्तकों तथा नृत्यांगनाओं के लिए नितंब की मांसपेशियां शक्ति, गति एवं ऊर्जा बढाने का महत्त्वपूर्ण कार्य करती हैं । उनके दुर्बल होने से कौशल एवं खेल में कार्यक्षमता घट जाती है ।

४. ‘नितंब की मांसपेशियों का दुर्बल होना’, इसे पहचानने के कुछ लक्षण

अ. लंबे समय तक खडे रहने पर अथवा पैदल चलने पर कमर, घुटने अथवा एडियों में पीडा होने लगती है ।

आ. बैठक (‘स्क्वैट’) करते समय घुटने अंदर मुड जाते हैं, साथ ही व्यायाम की कृति (स्टेप्स) ठीक से पूर्ण करना संभव नहीं हो पाता अथवा मांसपेशियों में कंपन प्रतीत होता है । (चित्र क्र. २ देखें)

इ. एक पैर पर खडे रहने का व्यायाम करते समय अल्प स्थिरता प्रतीत होती है ।

ई. नितंब की मांसपेशियां बडी होती हैं । बडी मांसपेशियां दुर्बल होने से कार्य करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा का व्यय होता है । भागते समय, सीढियां चढते समय अथवा लंबे समय तक पैदल चलते समय दम लगता है अथवा थकान होती है ।

उ. (चित्र क्र. १) इस चित्र में दिखाए अनुसार शरीर के अनुचित ढांचे में अर्थात सीधे खडे रहने पर पेट आगे आना, कमर का अधिक टेढा (lordosis) होना, कमर का आगे की ओर झुकाना जैसी स्थितियों में अधिकतर नितंब की मांसपेशियां (glute muscles) दुर्बल दिखाई देती हैं ।

ऊ. बैठकर उठते समय कमरदर्द होता है; क्योंकि खडे रहने पर शरीर का भार उठाने में इन मांसपेशियों की शक्ति की आवश्यकता होती है । यदि ये मांसपेशियां दुर्बल हों, तो उनसे कमर की मांसपेशियों पर अतिरिक्त तनाव आकर कमर में पीडा होती है ।

ए. नितंब की मांसपेशियों का कडापन कम हो जाता है तथा वे ढीली हो जाती हैं ।

५. नितंब की मांसपेशियों को ऊर्जावान रखने के लिए कुछ अच्छी आदतें

अ. निरंतर बैठे रहना तथा सोए रहना टालें ।

आ. प्रतिदिन न्यूनतम २० से ३० मिनट पैदल चलना, साइकिल चलाना जैसे व्यायाम करें ।

इ. जहां संभव है, वहां ‘पैदल चलना, उद्वाहक यंत्र के स्थान पर (‘लिफ्ट’ के स्थान पर) सीढियां चढना’ अपनाएं ।

ई. खडे रहते समय दोनों पैरों पर भार समान रखें । एक ही ओर कमर टेककर अथवा एक ही पैर पर भार डालकर खडे रहना टालें । पैरों को घसीटते हुए न चलें, पैर उठाकर चलें ।

उ. श्रोणी को सीधा रखकर तथा रीढ को प्राकृतिक स्थिति में रखकर बैठें । (चित्र क्र. ३ देखें)

ऊ. पैरों की शक्ति बढानेवाले व्यायाम नियमित रूप से करें ।’

(क्रमशः) 

– श्रीमती अक्षता रूपेश रेडकर, भौतिकोपचार विशेषज्ञ (फीजियोथेरेपिस्ट), फोंडा, गोवा. (१.१२.२०२५)