
‘जो वैद्य (डॉक्टर) नहीं, सरकार उन्हें रोगियों पर उपचार करने के लिए नहीं कहती । सरकार को न्यायालय में याचिका देनी हो, तो जो अधिवक्ता नहीं, उससे नहीं कहती । परंतु मंदिर का प्रबंधन संभालने के लिए भक्तिभाव रहित लोगों को सरकार मंदिरों का उत्तरदायित्व सौंपती है । इसलिए मंदिरों में भ्रष्टाचार होता है तथा मंदिरों की सात्त्विकता भी नष्ट होती जा रही है ! हिन्दू राष्ट्र में योग्य भक्तों के पास ही मंदिरों का दायित्व होगा !’
एकमात्र हिन्दू धर्म ही मानवजाति का तारणहार है !
‘मानव का जन्म क्यों हुआ ? जन्म के पूर्व वह कहां था ? मृत्यु के उपरांत वह कहां जाएगा ? इत्यादि विषयों की थोडी-बहुत भी जानकारी न रखनेवाले पश्चिमी तथा साम्यवादी क्या कभी मानवजाति की समस्याएं दूर कर पाएंगे ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर ही नहीं, अपितु उनमें अशुभ से कैसे बचें, इसकी जानकारी रखनेवाला एकमात्र हिन्दू धर्म ही मानवजाति का तारणहार है !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
अध्यात्म का प्रसार करते समय यह स्मरण रखें !
‘ईश्वर का अस्तित्व न माननेवाले क्या कभी ईश्वरप्राप्ति के लिए साधना करने का विचार कर सकते हैं ? साधक अध्यात्मप्रसार करते समय ऐसे लोगों से बात करने में समय व्यर्थ न करें !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
भारत की दुर्दशा का एक कारण है, राज्यकर्ताओं द्वारा जनता को साधना न सिखाना !
‘स्वतंत्रता से लेकर आज तक सभी राज्यकर्ताओं ने केवल बौद्धिक शिक्षा के माध्यम से वैद्य, अभियंता, वकील तैयार किए; पर उन्हें साधना सिखाकर ‘संत’ बनने की शिक्षा नहीं दी । इस कारण आज देशद्रोह से लेकर घुसपैठ तक सभी प्रकार की समस्याओं का यह देश सामना कर रहा है ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
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संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
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