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सातारा (महाराष्ट्र), ७ जनवरी (संवाददाता) : – ‘ऑक्सफर्ड युनिवर्सिटी प्रेस इंडिया’ने वर्ष २००३ में जेम्स लेन लिखित ‘शिवाजी : द हिन्दू किंग इन इस्लामिक इंडिया’, यह पुस्तक प्रकाशित की थी । उसके कुछ परिच्छेद एवं अवतरण छत्रपति शिवाजी महाराज एवं राजमाता जिजाऊ की प्रतिमा धूमिल करनेवाले तथा अनादर करनेवाले थे । इसके विरोध में सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले ने सातारा के न्यायालय में अभियोग प्रविष्ट किया था । इस संदर्भ में कुछ ही दिन पूर्व ‘ऑक्सफर्ड युनिवर्सिटी प्रेस’ने सार्वजनिकरूप से क्षमायाचना की है । इस प्रकरण में मुंबई उच्च न्यायालय को कोल्हापुर खंडपीठ ने ‘ऑक्सफर्ड युनिवर्सिटी’सहित चार लोगों को बिना किसी शर्त के राष्ट्रीय स्तर के समाचारपत्रों में लिखितरूप से क्षमायाचना प्रकाशित करने का आदेश दिया है । इनमें ‘ऑक्सफर्ड युनिवर्सिटी प्रेस इंडिया’के संपादक सय्यद मंजर खान, टिळक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पुणे के ‘संस्कृत’ विषय के प्राध्यापक डॉ. श्रीकांत बहुलेकर, प्राध्यापिका सुचेता परांजपे, ‘भांडारकर संस्था’के ग्रंथपाल मंजुळ का समावेश है ।
१. इस अनादर के प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में लेकर वर्ष २००५ में सातारा के मुख्य न्यायाधिश ने इन सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंडसंहिता के अनुच्छेद ५०० के अंतर्गत प्रक्रिया चलाने का आदेश दिया था ।
२. ‘ऑक्सफर्ड युनिवर्सिटी प्रेस इंडिया’के संपादक सय्यद मंजर खान, टिळक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पुणे के संस्कृत विषय के प्राध्यापक डॉ. श्रीकांत बहुलेकर, प्राध्यापिका सुचेता परांजपे एवं भांडारकर संस्था के ग्रंथपाल मंजुळ इन आरोपियों ने सातारा न्यायालय के आदेश के उपरांत उच्च न्यायालय में दंड से संबंधित जनहित (रिट) याचिका प्रविष्ट की ।
३. १७ दिसंबर २०२५ को मुंबई उच्च न्यायालय के कोल्हापुर खंडपीठ में न्यायाधीश शिवकुमार डिगे के सामने इस प्रकरण की सुनवाई हुई । आरोपियों के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को ‘याचिकाकर्ता सांसद उदयनराजे भोसले से क्षमायाचना करने के लिए तैयार हैं’, ऐसा बताया ।
४. इस समय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले का प्रतिनिधित्व करनेवाले अधिवक्ताओं ने न्यायालय से इस संबंध में उचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया । उसके अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शिवकुमार दिघे ने १५ दिन के अंदर राष्ट्रीय स्तर के समाचारपत्रों में लिखितरूप से क्षमायचना प्रकाशित करने का आदेश दिया ।
याचिकाकताओं द्वारा की गई क्षमायाचना !
‘ऑक्सफर्ड युनिवर्सिटी प्रेस इंडिया’ने वर्ष २००३ में जेम्स विल्यम लेन द्वारा लिखी गई पुस्तक प्रकाशित की थी । हम इससे अवगत हैं कि लाखों लोगों के हृदय में श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति सम्मान का स्थान है । हम उनके उत्तराधिकारियों से संबंधित तीव्र सार्वजनिक भावनाओं को गहन सम्मान करते हैं तथा इसके कारण सामान्य जनता को हुए दुख के लिए मन से खेद प्रकट करते हैं । श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले को इससे हुए कष्ट के लिए अथवा पीडा के लिए हम बिना किसी शर्त के क्षमायाचना करते हैं ।

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