
कराड, २८ दिसंबर (संवाददाता) : सातारा में होनेवाले ‘अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन ’ के प्रति गर्व प्रतीत होता है; परंतु इस सम्मेलन से श्रमिकों एवं किसानों के प्रश्नों के विरुद्ध आवाज उठाई गई, तभी जाकर वास्तव में यह साहित्य सम्मेलन सफल हुआ, ऐसा कहा जा सकता है, ऐसी भूमिका ‘बळीराजा शेतकरी संगठन’ के संस्थापक अध्यक्ष पंजाबराव पाटिल ने विज्ञप्ति के द्वारा स्पष्ट की ।
पंजाबराव पाटिल ने आगे कहा कि हाल ही के समय में सरकारी खर्चे से साहित्य सम्मेलन का आयोजन करना मानो महोत्सव मनाने जैसा हो गया है । पहले साहित्य सम्मेलनों से श्रमिकों , किसानों एवं उपेक्षितों की आवाज बुलंद की जाती थी; परंतु वर्तमान समय में यह परंपरा खंडित हो रही है, इसका खेद है । मराठी भाषा के जतन एवं संवर्धन हेतु मराठी भाषियों के अन्य प्रश्नों पर भी परिचर्चाएं हों, साथ ही प्रस्ताव भी पारित किए जाएं ।
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