Shankhnad Mahotsav Delhi : शौर्ययुक्त वातावरण में सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव : मान्यवरों का उद्बोधन !

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव देहली २०२५

डॉ. सुधांशु त्रिवेदीजी

हिन्दुओ, अब भागने के दिन गए, जागने के दिन शुरू हो गए हैैंं ! – डॉ. सुधांशु त्रिवेदीजी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सांसद, भाजपा

भारत मंडपम्, दिल्ली – ‘हनुमानजी को अपनी शक्ति का विस्मरण हो गया था, वैसी ही स्थिति आज हिन्दू समाज की है । जब हिन्दू समाज जागने लगता है, ताडका, शूर्पणखा, मारीच आदि राक्षसों जैसी दुष्प्रवृत्तियों को निष्प्रभावी कर देता है । उसी प्रकार हिन्दुओ, अब भागने के दिन गए, जागने के दिन शुरू हो गए हैं ।’, ऐसा प्रतिपादन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदीजी ने ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में किया ।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदीजी द्वारा बताए सूत्र

१. भारत को ज्ञान, समृद्धि एवं शौर्य को जागृत करना होगा । चाहे कोई भी भेद हो; परंतु हिन्दुओं को ध्यान रखना है कि भारतमाता ही हम सबकी माता है ।

२. अब भारत का समय आ चुका है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने भी कहा है, ‘यही समय है, सही समय है ।’ किसी पर सत्ता चलाने के लिए नहीं, अपितु विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए भारत विश्वगुरु बनेगा ।

३. विश्व धीरे-धीरे सनातन संस्कृति की ओर मुड रहा है । पहले अमेरिका में शाकाहारी अन्न मिलता ही नहीं था, अब वहीं शाकाहारी के साथ वीगन अन्न भी मिलता है । पहले लोग एलोपैथिक औषधियां लेते थे, अब वे आयुर्वेद की ओर मुड रहे हैं । किसान रासायनिक खेती के स्थान पर जैविक कृषि की ओर मुड रहा है ।

४. विश्व के १७७ देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के ‘योग दिवस’ के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र संघ में अनुमोदन दिया । आज विश्व के १७७ देशों में ‘योग’ किया जाता है । इसका अर्थ यही है कि विश्व सनातन संस्कृति की ओर मुड रहा है । मौज-मस्ती में रमे रहनेवाले यूरोप के देशों के लोग कुंभ मेले में आ रहे हैं । यह सनातन संस्कृति का ही प्रभाव है ।

सनातन संस्था भावी राष्ट्रनिर्माण में बडा योगदान देगी ! – श्रीपाद नाईकजी, केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री

श्रीपाद नाईकजी

भारत मंडपम्, दिल्ली – ‘सनातन संस्था के रजत जयंती वर्ष में आयोजित हो रहा ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ हिन्दुओं के लिए अमूल्य है । जिस पद्धति से सनातन संस्था हिन्दू जागृति का कार्य कर रही है, वह अत्यंत अनुकरणीय एवं उत्साहवर्धक है । सनातन संस्था के साधकों का त्याग देखते हुए मुझे विश्वास है कि यह संस्था भावी सशक्त राष्ट्रनिर्माण के कार्य में बडा योगदान देगी’, ऐसा प्रतिपादन केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्री. श्रीपाद नाईकजी ने किया । वह ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के द्वितीय दिवस के ‘सनातन राष्ट्र संकल्प संतसभा’ नामक समापन सत्र में बोल रहे थे । अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में एवं छत्रपति शिवाजी महाराजजी के जयघोष के साथ सनातन राष्ट्र की संस्थापना का दृढ संकल्प लेकर इस महोत्सव का अविस्मरणीय समापन हुआ ।

छत्तीसगढ स्थित शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश्वर प.पू. युधिष्ठिरलाल महाराजजी, विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री श्री विज्ञानानंद स्वामीजी, ‘पावन चिंतनधारा आश्रम’ के संस्थापक पू. पवन सिन्हा गुरुजी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदेजी सहभागी हुए थे । मंच पर ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ के संस्थापक एवं पूर्व सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकरजी, सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सदगुरु नीलेश सिंगबाळजी, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी उपस्थित थीं ।

हिन्दू विरोधी मानसिकता को उखाड फेंकने के लिए मंदिर मुक्ति का संघर्ष व्यापक बनाएं ! – अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, सर्वाेच्च न्यायालय

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

भारत मंडपम्, दिल्ली – काशी तथा मथुरा के मंदिरों को मुक्त करने के लिए की गई न्यायालयीन लडाई मेरे लिए एक आध्यात्मिक यात्रा ही है; क्योंकि केवल दैवी कृपा से ही हम यह लडाई जीत रहे हैं, लड रहे हैं । ‘आपकी अपेक्षा हमारी श्रद्धा एवं श्रद्धा केंद्र श्रेष्ठ हैं’, यह धर्मांधों की हिन्दू विरोधी मानसिकता उखाड फेंकने के लिए मंदिर मुक्ति का संघर्ष व्यापक होना चाहिए । मंदिर मुक्ति हिन्दुओं पर किए गए आक्रमणों का करारा प्रत्युत्तर है । जब तक यह देश सनातन राष्ट्र नहीं बन जाता, तब तक हिन्दुओं के हथियाए गए प्रत्येक मंदिर को मुक्त करने का संकल्प आज हम सभी करें, ऐसा आवाहान काशी एवं मथुरा के मंदिरों की मुक्ति के लिए न्यायालयीन लडाई लड रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने किया ।

अधिवक्ता जैनजी ने कहा, ‘आज तक हम अपने विचारों के जनप्रतिनिधियों को चुनते आए । ये जनप्रतिनिधि अनेक राज्यों में अब शासनकर्ता बन गए हैं । अब इन शासनकर्ताओं से हमें क्या चाहिए, यह भी हमें स्पष्ट करना चाहिए । हमें दृढता से कहना चाहिए कि ‘यदि आप सत्ता में आने पर मंदिरों का सरकारीकरण निरस्त करना, ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप’ जैसे हिन्दू विरोधी कानून निरस्त करना, ‘वक्फ’ जैसे तुष्टिकरण करनेवाले कानूनों को समाप्त करना, पाकिस्तान से भारत आए हिन्दुओं को मुख्य धारा में समाहित करना आदि कार्य करेंगे, तो हम आपको चुनेंगे ।’

भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए भारत का ‘विकृत सामग्री मुक्त देश’ बनना आवश्यक है ! – उदय माहुरकरजी

उदय माहुरकरजी

भारत मंडपम्, दिल्ली – पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकरजी ने सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के विषय में भूमिका प्रस्तुत करते हुए व्यक्त किया कि ‘भारतीय संस्कृति का जो विध्वंस विदेशी मुसलमान आक्रमणकारी नहीं कर पाए, वह काम वर्तमान में ‘ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म’ (एप के माध्यम से फिल्म, सीरियल आदि कार्यक्रम देख पाना) के माध्यम से भारी मात्रा में हो रहा है । देश में होनेवाले ८० प्रतिशत बलात्कार इसी अश्लील प्रसारण के कारण हो रहे हैं । भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए ऐसे प्रसारण पर प्रतिबंध लगाकर भारत विश्व का ‘पहला विकृत सामग्री मुक्त देश’ बनना चाहिए । यदि हमें रामराज्य, महाराणा प्रताप अथवा छत्रपति शिवाजी महाराज के सपनों का स्वराज्य स्थापित करना है, तो बलात्कार करनेवाले को मृत्युदंड, साथ ही अश्लील साहित्य प्रसारित करनेवाले, शासकीय अधिकारियों की नियुक्तियों एवं स्थानांतरणों के लिए पैसे लेनेवाले, खाद्य पदार्थों में मिलावट करनेवाले तथा प्रदूषण न रोकनेवाले कारखानों के मालिकों को न्यूनतम १०-२० वर्ष का कठोर दंड मिलना आवश्यक है ।

सामाजिक माध्यमों से अश्लीलता का प्रसारण रोकने के लिए मोबाइल (चल-दूरभाष) कंपनियों को ‘एआई’ विशेषज्ञों के माध्यम से प्रतिबंध लगाने हेतु बाध्य करना संभव है ।’

इस महोत्सव से महान भारत की संकल्पना का आरंभ ! – उदय माहुरकरजी

शंखनाद महोत्सव एक अद्वितीय महोत्सव है । इसके माध्यम से पिछले ७० वर्षों में छत्रपति शिवाजी महाराज का योगदान महाराष्ट्र के बाहर पहुंचाने का कार्य पहली बार हो रहा है । यह महोत्सव देश के लिए एक बडा संदेश लेकर आया है । मेरी महान भारत की जो संकल्पना है, उसका आरंभ आज से हुआ है, ऐसा मुझे लगता है ।