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भारत मंडपम्, देहली, १३ दिसंबर (वार्ता.) – आज यहां कवि भूषण की पंक्तियां मुझे अत्यंत सटीक लगती हैं कि ‘अगर शिवाजी न होते, तो सुन्नत होती सबकी ।’ आज हिन्दू समाज का जो अस्तित्व है, वह केवल छत्रपति शिवाजी महाराज के कारण ही है ! अन्यथा, हम जैसी महिलाएं आज कहीं हिन्दुकुश पर्वत के तलहटी में अत्यंत लज्जाजनक जीवन जी रही होतीं, ऐसा हिन्दुओं को अंतर्मुख करने वाला प्रतिपादन मूलतः गोवा निवासी एवं अब पुणे में रह रहीं हिन्दुत्वनिष्ठ लेखिका श्रीमती शेफाली वैद्य ने किया ।

श्रीमती शेफाली वैद्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की दृष्टि एवं वर्तमान भारत’ नामक चर्चासत्र में बोल रही थीं । इस चर्चासत्र में श्रीमती वैद्य के साथ हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी, ‘छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय स्मारक समिति’ के महासचिव कर्नल मोहन काकतीकर (सेवानिवृत्त), भारत के पूर्व सूचना आयुक्त तथा ‘सेव भारत, सेव कल्चर फाउंडेशन’ के संस्थापक श्री. उदय माहुरकर तथा ‘सरयू फाउंडेशन’ के श्री. राहुल दीवान सम्मिलित थे । ‘जागरण न्यू मीडिया’ की वरिष्ठ राजनीतिक संपादक स्मृति रस्तोगी ने इस सत्र का संचालन किया । इस चर्चासत्र को उपस्थित लोगों का प्रचंड उत्साही प्रतिसाद मिला ।
श्रीमती वैद्य ने आगे कहा कि वर्ष १५६५ में तालीकोट की लडाई में विजयनगर साम्राज्य के रामराया की हत्या करके निजामशाह ने उनका सिर वेशी (शहर के प्रवेश द्वार) पर टांग दिया । हिन्दुओं का मनोबल तोड दिया । उसके १०० वर्ष उपरांत शिवछत्रपति ने हिन्दवी स्वराज्य निर्माण करने की प्रतिज्ञा की । ५ बादशाहियों से लडकर स्थापित किया गया राज्य पुनः शत्रु को दे दिया; परंतु पश्चात आगरा से औरंगजेब की कैद से मुक्ति प्राप्त की और पुनः संपूर्ण राज्य शून्य से प्राप्त किया । उन्होंने मंदिरों की रक्षा की । मुगलों, पुर्तगालियों द्वारा तोडे गए मंदिरों को पुनः बनवाया । शिवछत्रपति का राज्य धर्माधिष्ठित था । छत्रपति शिवाजी महाराज की उत्तुंग प्रेरणा के कारण ही धर्मवीर संभाजी महाराज की मृत्यु के उपरांत सिंहासन पर राजा न होते हुए भी २७ वर्ष तक मराठे मुगलों से लडे ।
शिवछत्रपति का स्वराज्य आदर्श धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र ही था ! – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘श्री’ की अर्थात भगवान की इच्छा मानकर हिन्दवी स्वराज्य स्थापित किया । उन्होंने गौमाता, मंदिर, धर्म-परंपरा आदि की प्रत्यक्ष रक्षा की । विदेशी आक्रमणकारियों की भाषा का प्रभाव रोकने के लिए संस्कृत में राजमुद्रा, राज्यव्यवहारकोश आदि बनवाए । शास्त्रसम्मत कानून सिद्ध किए । धर्मशास्त्रसम्मत अपना राज्याभिषेक करवाया; परंतु इसके पीछे उनकी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा नहीं थी, अपितु भगवत्सेवा, समाजसेवा जैसा उदात्त उद्देश्य था । धर्मराज्य अर्थात वह राज्य जहां राष्ट्र, धर्म, व्यक्ति एवं समाज, इन सबकी उन्नति की व्यवस्था होती है ! इससे स्पष्ट होता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्य आदर्श धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र ही था ।
⚔️ मावलों के समान आज के नागरिकों को भी सैन्य प्रशिक्षण आवश्यक ! – कर्नल मोहन काकतीकर (सेवानिवृत्त), महासचिव, छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय स्मारक समिति

छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी सेना अल्प होने पर भी ४०० किलोमीटर यात्रा करके सूरत को लूटा । तब उन्होंने ऐसी योजना बनाई कि सामान्य व्यक्ति को कष्ट न हो । उन्होंने औरंगजेब द्वारा किए गए अपमान का प्रतिशोध लिया । पहला ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ उन्होंने लाल महल में बैठे शाइस्ता खान पर किया तथा उसे भगाने में वे सफल रहे । ‘जिसका नौदल उसकी समुद्र पर सत्ता !’ यह स्वराज्य की नीति निर्धारित करते हुए देश का पहला नौदल स्थापित करना, यह उनकी दूरदृष्टि का उदाहरण था । छत्रपति शिवाजी महाराज ने सर्वसामान्य किसान वर्ग के युवाओं को आवश्यक युद्ध प्रशिक्षण देकर मावले तैयार किए । उस सेना के माध्यम से उन्होंने हिन्दवी स्वराज्य स्थापित किया । उसी प्रकार आज नागरिकों को ऐच्छिक रूप से सैन्य प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए ।
आज शिवछत्रपति की संस्कृति रक्षा की नीति आवश्यक ! – उदय माहुरकर, पूर्व सूचना आयुक्त, भारत सरकार एवं संस्थापक, ‘सेव कल्चर, सेव भारत फाउंडेशन’

१ सहस्र ६०० किलोमीटर लंबाई का हिन्दवी स्वराज्य स्थापित करनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज को सही अर्थों में जो मान-सम्मान मिलना चाहिए था, वह आज नहीं मिला है । पिछले १ सहस्र वर्षों में शिवछत्रपति जैसा तेजस्वी राजा नहीं हुआ । शिवछत्रपति ने धर्मांतरित हुए फलटण के बजाजी निंबालकर का केवल शुद्धिकरण ही नहीं किया, अपितु उन्हें अपनी बेटी भी दी । स्वतंत्रता वीर सावरकर को भाषा शुद्धि की प्रेरणा शिवछत्रपति से मिली । उन्होंने किया हुआ संस्कृति रक्षा का कार्य, यही ‘सेव भारत, सेव कल्चर फाउंडेशन’ की प्रेरणा है । आज भारत में जिस प्रकार से दूरदर्शन चैनलों, ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ आदि के माध्यम से अश्लीलता की भरमार चालू है, उसे देखते हुए इसके विरुद्ध सभी को क्रियाशील होना चाहिए । भारत को वर्ष २०४७ में ‘महाशक्ति’ बनाते समय, उसे सांस्कृतिक दृष्टि से भिखारी बनाना उचित नहीं है । उसके लिए शिवछत्रपति की संस्कृति रक्षा की नीति अपनानी चाहिए ।
शिवछत्रपति के समान आक्रामक रणनीति की आज भी आवश्यकता ! – राहुल दीवान, संस्थापक, ‘सरयू फाउंडेशन’

अहमद शाह अब्दाली प्रतिवर्ष आकर पंजाब लूटकर जाता था; परंतु शिवछत्रपति की प्रेरणा से सिद्ध हुए मराठे वर्ष १७६१ में पानीपत की लडाई में हार गए थे, फिर भी उसके बाद अब्दाली दोबारा भारत पर चढाई करने नहीं आया । इसीलिए आगे सिखों का साम्राज्य खडा हो सका । शिवछत्रपति न होते, तो हम सभी को ‘कलमा’ पढना पडता । आज हिन्दुओं की शक्ति सुरक्षात्मक अथवा प्रतिक्रियात्मक आंदोलनों, कानूनों के लिए व्यर्थ हो रही है । जो धर्मांध लोग ३ सहस्र किलो अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग करके लाखों लोगों को मारकर पूरा देश नष्ट करने की योजना बनाते हैं, उनके सामने आंदोलन की रणनीति असफल हो सकती है । आज शिवछत्रपति से ‘आक्रामक रणनीति’ सीखनी चाहिए, साथ ही बडी मात्रा में हिन्दुओं के शुद्धिकरण के प्रयास होने चाहिए । उसके लिए महंतों, कथावाचकों आदि को स्वेच्छा से स्वधर्म में आने की इच्छा रखनेवालों की व्यवस्था करनी चाहिए । शुद्धिकरण की प्रक्रिया तेज तथा सरल होनी चाहिए ।
चौखट में
क्षणचित्र :१. श्री. राहुल दीवान ने कहा, “देशभर में केवल सनातन संस्था ही धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की मांग करती हुई दिखाई देती है !” २. चर्चासत्र में उपस्थित लोगों द्वारा बीच-बीच में शिवछत्रपति का जयघोष किया जा रहा था । श्रीमती शेफाली वैद्य ने अपने वक्तव्य का समापन करते समय ‘तेज तम अंस पर…’ यह कवि भूषण का काव्य कहा एवं इससे सभागृह में प्रचंड उत्साह संचारित हुआ । ३. इस समय एक धर्मप्रेमी ने उत्स्फूर्त रूप से शिवछत्रपति की बिरुदावली (स्तुति) अत्यंत क्षात्रवृत्ति से कही । इससे संपूर्ण सभागृह शिवमय हो गया । |
Wipro’s Explanation: (और उनकी सुनिए…) ‘विप्रो’ में महिला कर्मचारियों के कल्याण, सम्मान एवं गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है ।
गुणवत्ता एवं अन्नसुरक्षा के विषय में ‘गोकुल’ संघ की ओर से कभी भी समझौता नहीं किया गया है ।
Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं हिन्दुओं का संगठन आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
‘गोकुल’ का हलाल प्रमाणपत्र तत्काल निरस्त कीजिए – कोल्हापुर में हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनाएं आक्रामक