(और इनकी सुनिये…) ‘विश्व को धार्मिक ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण को अपना दायित्व मानना चाहिए !’ – Dr. Tahir Andrabi

बाबरी पर पाकिस्तान शासन का कोलाहल !

ताहिर अंद्राबी

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – विश्व समुदाय को धार्मिक विरासत तथा पवित्र स्थलों के संरक्षण को अपना सामूहिक दायित्व मानना चाहिए । बाबरी मस्जिद भी एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल था । बाबरी मस्जिद गिराए जाने के उपरांत भारत के मुसलमान स्वयं को अलग-थलग तथा असुरक्षित अनुभव कर रहे हैं । भावनात्मक रूप से उन्होंने अत्यधिक तनाव सहा है तथा उनकी स्थिति आज भी चिंताजनक है, ऐसा निरर्थक वक्तव्य पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बाबरी विषय के संदर्भ में किया । (यदि भारत के मुसलमानों को ऐसा प्रतीत होता है, तो अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए; क्योंकि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था तथा मुसलमानों के लिए पाकिस्तान निर्मित किया गया है ! – संपादक)

ताहिर अंद्राबी ने संयुक्त राष्ट्र से आवाहन किया कि वह मुसलमानों की धार्मिक विरासतों के संरक्षण के महत्त्व को समझे तथा बाबरी मस्जिद ध्वंस जैसी घटनाएं पुनः न हों, इसके लिए सहायता प्रदान करे ।

(और इनकी सुनिये…) ‘अयोध्या में बाबरी मस्जिद की पहली ईंट पाकिस्तानी सेना रखेगी !’ – पाकिस्तानी महिला सांसद पलवाशा खान का दिवास्वप्न

पलवाशा खान

अयोध्या में निर्मित होने वाली नयी बाबरी मस्जिद की पहली ईंट पाकिस्तान की सेना रखेगी तथा प्रथम अजान सेनाप्रमुख असीम मुनिर देंगे । “हमने कंगन नहीं पहने हैं” – ऐसा घमंडपूर्ण विधान पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की महिला सांसद पलवाशा ज़ई खान ने पाकिस्तान की संसद में किया । (भारत से युद्ध में निरंतर पराजित होने वालों के ऐसे कथन सुनकर विश्व भी उपहास करता होगा ! – संपादक)

उन्होंने आगे दावा किया कि भारत के सिख सैनिक पाकिस्तान पर आक्रमण नहीं करेंगे, क्योंकि पाकिस्तान गुरुनानक देव की भूमि है । (अब तक पाकिस्तान के विरुद्ध हुए युद्धों में सिख सैनिकों तथा अधिकारियों ने जो पराक्रम दिखाया है, यह तथ्य खान को ज्ञात नहीं । इससे उनकी बौद्धिक दिवालियापन स्पष्ट होता है ! अब तो स्थिति यह है कि सिख सैनिक पाकिस्तान पर आक्रमण कर इस भूमि को पाकिस्तान के आधिपत्य से मुक्त कर भारत में ही सम्मिलित करेंगे ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

गत ७८ वर्षों में पाकिस्तान में कितने मंदिर तोड़कर उन पर मस्जिदें खड़ी की गईं ? वहां के कितने चर्च तथा गुरुद्वारों की भी यही अवस्था की गई ? इसका दायित्व भी विश्व समुदाय ने स्वीकार कर पाकिस्तान से प्रश्न करना चाहिए !