जासूसी करनेवाली एक महिला को दमन से बंदी बनाया गया

पणजी, ५ दिसंबर (संवाददाता) : गुजरात आतंकवादविरोधी दल ने ४ दिसंबर को गोवा में रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करनेवाले सेवानिवृत्त सुभेदार अजयकुमार सुरेंद्र सिंह (आयु ४७ वर्ष) को बंदी बनाकर एक व्यापक जासूसी जाल ध्वस्त किया था । उसे नावेली से हिरासत में लिया गया था । इस प्रकरण में दल ने ५ दिसंबर को दमन से रश्मनी रवींद्र पाल नाम की महिला को दमण से हिरासत में लिया है । इन दोनों का पाकिस्तानी पाकिस्तानी गुप्तचर विभागों के साथ संपर्क में होने का संदेह है । आतंकवादविरोधी दल ने इन दोनों संदिग्धों के चलित दूरभाष संच से अंतरराष्ट्रीय वॉट्सएप कॉल्स, कागदपत्र तथा अन्य तकनीकी प्रमाण हिरासत में लिए हैं ।
जासूसी करनेवाले थे पाकिस्तानी हस्तकों के संपर्क में !
‘आंतकवादविरोधी दल के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में संलिप्त सेवानिवृत्त सुभेदार अजयकुमार सुरेंद्र सिंह मूलतः बिहार का नागरिक है तथा वर्तमान में वह गोवा के मदिरानिर्मिति परियोजना में सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत था । वर्ष २०२२ में नागालैंड के दिमापूर में सेवारत होते समय अजयकुमार का एक पाकिस्तानी ‘हैंडलर’ से (हस्तक से) संपर्क हुआ । उसके निर्देश पर अजयकुमार ने अपने चल दूरभाष संच में ‘ट्रोजन मालवेयर’ इंस्टॉल (कार्यरत) किया था । उसके कारण पाकिस्तानी हस्तक को वॉट्सएप से सीधे जानकारी भेजने की आवश्यक नहीं थी, अपितु पाकिस्तानी हस्तक अजयकुमार के चल-दूरभाष में सीधे प्रवेश कर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकता था । रश्मनी रवींद्र पाल का भी अन्य दो पाकिस्तानी ‘हैंडलर’ अब्दुल सत्तार एवं खालिद से सीधा संपर्क था । ये दोनों भी वॉट्सएप के माध्यम से संवेदनशील परिसर, सेना की गतिविधियां, ‘पोस्टिंग’ तथा नियुक्ति की जानकारी प्राप्त कर उसे पाकिस्तान भेजते थे । ‘आंतकवादविरोधी दल’ की यह कार्रवाई दल के अधीक्षक हर्ष उपाध्याय के मार्गदर्शन में संपन्न हुई । इस प्रकरण में इन दोनों पर भी भारतीय न्याय दंड संहिता के अनुच्छेद ६१ एवं १४८ के अंतर्गत राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र रचने का अपराध पंजीकृत किया गया है । इन दोनों पर भारतीय सेना से संबंधित गुप्त जानकारी प्राप्त करना, उसे शत्रु राष्ट्र को भेजना तथा आर्थिक लेनदेन के माध्यम से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सहायता करना जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं । इस कार्रवाई में गोवा पुलिस के साथ ही विभिन्न अन्वेषण अभियोजनों की सहायता ली गई ।
रश्मनी पाल ‘प्रिया ठाकूर’ बनकर अधिकारियों को अपने जाल में फंसाती थी !
रश्मनी पाल ‘प्रिया ठाकूर’ नाम धारण कर भारतीय सेना के अधिकारियों से मित्रता बढाकर उनसे संवेदनशील जानकारी प्राप्त करती थी, ऐसा उस पर आरोप है । पाकिस्तानी हैंडलर अब्दुल सत्तार एवं खालिद ने उसे पैसों का लालच देकर यह काम सौंपा था । उसे भिन्न-भिन्न चल-दूरभाष क्रमांकों की सूची दी गई थी । उसे उन क्रमांकों से संपर्क कर युद्धाभ्यास, सेना के विशेष विभागों की गतिविधियां तथा नियुक्तियों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए जा रहे थे । इसके लिए रश्मनी पाल ने ‘एयरटेल पेमेंट्स’ इस अधिकोष में खाता खोलकर आर्थिक लेनदेन किए हैं, ऐसा भी जांच में सामने आया है ।
संपादकीय भूमिका
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