नाशिक में वृक्षों को बचाकर साधूग्राम भी बनाया जाएगा, ऐसा मार्ग निकाला जाएगा ! – देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री

वृक्षों की कटाई पर अनावश्यक आक्षेप करने वालों पर मुख्यमंत्री की आलोचना !

नाशिक – यहां के तपोवन में वृक्षों की कटाई को लेकर हो रहा राजकारण दुःखद है तथा ‘धर्म अफीम की गोली है’ ऐसा कहने वाले आज इस विषय के आंदोलन में आगे हैं । तपोवन के वृक्ष पिछले ४ – ५ वर्षों में उगे हुए हैं तथा वृक्ष भी सुरक्षित रहें एवं साधूग्राम भी बने, ऐसा मध्यम मार्ग निकाला जाएगा, ऐसा आश्वासन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया । नाशिक महापालिका के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बोल रहे थे ।

मुख्यमंत्री ने कहा…

१. कुंभपर्व की पवित्रता को सुरक्षित रखते हुए विकास के साथ ऐतिहासिक धरोहर का भी संरक्षण किया जाएगा ।

२. कुंभपर्व सनातन संस्कृति का प्रतीक है एवं इसमें नदी तथा वृक्ष संरक्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । वृक्षों की कटाई किसी को भी प्रिय नहीं होती; किन्तु तपोवन में पूर्वकाल में वृक्ष नहीं थे । यह भूमि साधूग्राम के लिये ही आरक्षित थी तथा वर्ष २०१७ – २०१८ में महापालिका ने यहां वृक्षारोपण किया था । वही ये वृक्ष हैं । प्रयागराज का कुंभमेळा १५ सहस्र हेक्टर क्षेत्र में हुआ था । नाशिक का कुंभमेळा ३५० एकड भूमि पर होने वाला है तथा इस विवाद में मध्यम मार्ग निकाला जाएगा ।

३. साधुओं के निवास के लिये तपोवन की घनी झाडियों को हटाकर वहां साधूग्राम का निर्माण करने का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है । पर्यावरणप्रेमियों ने इसका विरोध किया है, किन्तु तपोवन में वृक्षों की कटाई के विषय में शासन दृढ है ।

४. कुंभपर्व हम सभी के लिये महत्त्वपूर्ण है तथा पर्यावरण भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है । हमसब में किसी का भी मत यह नहीं है कि वृक्षों को कट ही जाना चाहिये । एक तथ्य ध्यान में रखें — प्रयागराज में जहां कुंभपर्व होता है वहां १५ सहस्र हेक्टर भूमि है । नाशिक का साधूग्राम क्षेत्र केवल ३०० से ३५० एकड है । वर्ष २०१५ – १६ के गूगल के मानचित्र में वहां वृक्ष नहीं दिखते; परंतु राज्य शासन ने ५० करोड वृक्षारोपण कार्यक्रम आरंभ किया, तब नाशिक महापालिका ने ये वृक्ष लगाए । अब इन वृक्षों के कारण साधूग्राम का निर्माण असंभव हो रहा है; अतः न्यूनतम वृक्षों की कटाई करके उनको पुनः रोपण करना कैसे संभव हो, इसके लिये शासन प्रयत्नशील है ।

५. कुछ लोग अनावश्यक रूप से ‘पर्यावरणवादी’ बने हुए हैं । पर्यावरण को क्षति न पहुंचे , ऐसा मार्ग हम अवश्य निकालेंगे ।