
दैनिक ‘सनातन प्रभात’ का १.६.२०२५ का ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ विशेषांक तथा प्रसाद देने के लिए मैं नारायण चिंचोली के श्री सूर्यनारायण मंदिर के पुजारी तथा ज्योतिष विशेषज्ञ श्री. गणेश अवताडे से मिलने गया था । उस समय मैंने उन्हें लगभग १० वर्ष पूर्व घटित एक प्रसंग का स्मरण दिलाया । उस समय सनातन संस्था की साधिका श्रीमती प्राजक्ता जोशी ने भविष्य जानने के लिए श्री. अवताडे को सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के हाथों के तथा चरणों के छाप दिए थे । उस समय डॉ. आठवलेजी का भविष्य बताते हुए उन्होंने कहा था, ‘‘ये तो साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के चरणों के तथा हाथों के छाप हैं । मेरा परमभाग्य है कि मुझे ये छाप देखने का अवसर मिला । आनेवाले समय में पूरे विश्व में गुरुदेवजी की जयजयकार होती हुई दिखाई देगी तथा उन्हें सर्वत्र पूजा जाएगा ।’’
मैंने उनसे कहा, ‘‘आपके बताए अनुसार सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव से इसकी प्रतीति हो रही है ।’’ उस समय वहां जन्मकुंडली दिखाने आए श्री. अवताडे के भक्तों ने तालियें बजाकर ‘परात्पर गुरु डॉक्टरजी साक्षात भगवान श्रीकृष्ण ही हैं’, इसका अनुमोदन किया । उसके उपरांत मैंने उन्हें विशेषांक एवं प्रसाद दिया । उन्हें वह विशेषांक बहुत पसंद आया, इसलिए उन्होंने समाज में इसका वितरण करने के लिए अतिरिक्त ५० अंकों की मांग की ।’
– श्री. आप्पासाहेब सांगोलकर (आयु ६६ वर्ष), पंढरपुर, जिला सोलापुर, महाराष्ट्र. (१८.६.२०२५)
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