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न्यूयॉर्क (अमेरिका) – संयुक्त राष्ट्र ने विश्व के बढते शहरीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए ‘विश्व शहरीकरण प्रॉस्पेक्टस २०२५’ नामक रिपोर्ट प्रकाशित की है । इसके अनुसार, दुनिया के प्रत्येक ५ में से ४ लोग अब शहरों में रहते हैं । इसका अर्थ है कि ८० प्रतिशत से अधिक लोग अब शहर में आकर रहने लगे हैं । ८ वर्षों पूर्व यह प्रतिशत केवल ५५ था । इसका सीधा अर्थ है कि गांव एवं ग्रामीण क्षेत्र, जो कभी मानव संस्कृति की विशेषता थे, अब वीरान हो रहे हैं ।
लोगों का शहरों की ओर रुझान केवल रहने के स्थान में परिवर्तन नहीं है, अपितु यह समाज, अर्थव्यवस्था एवं लोगों के स्वास्थ्य पर भी परिणाम कर रहा है ।
रिपोर्ट के कुछ आंकडे
१. विश्व के ८० प्रतिशत लोग शहरों में रह रहे हैं ।
२. इसमें ४५ प्रतिशत लोग शहरों में, जबकि ३६% लोग उपशहरी (Suburban) क्षेत्रों में रहते हैं ।
३. यह रिपोर्ट पैट्रिक गेरलैंड के नेतृत्व में कई शोधकर्ताओं के सहयोग से तैयार की गई है ।
४. अनुमान है कि वर्ष २०५० तक विश्व की ८३ प्रतिशत आबादी शहरों में रहेगी ।
५. पूर्वी एवं दक्षिणी एशिया में, विशेष रूप से भारत जैसे देशों में लोग गांव छोडकर शहरों में जा रहे हैं । अधिक अच्छी शिक्षा, नौकरियां या अच्छा सामाजिक जीवन जीने के लिए ये परिवर्तन देखे जा रहे हैं ।
बढते शहरीकरण का स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम !
शहरीकरण का परिणाम केवल जनसंख्या पर ही नहीं, अपितु लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड रहा है । ‘किंग्स कॉलेज लंदन’ के विशेषज्ञ एंड्रिया मेशेली के अनुसार, शहरों में वायु प्रदूषण एवं बढती गर्मी लोगों को अस्वस्थ बना रही है । इससे हृदय रोग तथा अल्जाइमर जैसी बीमारियों का संकट बढ जाता है । इसके साथ ही, चिंता एवं अवसाद (Depression) जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में भी वृद्धि हो रही है ।
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