श्री माता वैष्णोदेवी चिकित्सकीय महाविद्यालय में मुस्लिम विद्यार्थी के प्रवेश को लेकर हुए विवाद पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का आतंकवादियों का समर्थन करने वाला प्रश्न !

श्रीनगर (जम्मू–काश्मीर) – विद्यार्थी किसी चिकित्सकीय संस्थान में जाते समय यह नहीं देखते कि उसका नाम क्या है अथवा निधि कहां से आती है । वे केवल शिक्षण का विचार करते हैं । वे चिकित्सक बनने का स्वप्न देखते हैं । ऐसे विद्यार्थियों को धर्म के आधार पर प्रवेश से वंचित किया गया तथा वे अल्–फलाह विद्यापीठ में जाकर कट्टरता की ओर मुड गये, तो उसके लिये उत्तरदायी कौन होगा ?, यह प्रश्न जम्मू–काश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किया । जम्मू स्थित श्री माता वैष्णोदेवी ट्रस्ट के चिकित्सकीय महाविद्यालय में मुस्लिम विद्यार्थियों के प्रवेश का हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है । इसी पृष्ठभूमि में अब्दुल्ला ने यह प्रश्न संगठनों से पूछा । आगे उन्होंने यह भी कहा, ‘यदि संस्थान का उद्देश्य किसी विशिष्ट समाज के लिये ही स्थान सुरक्षित रखने का था, तो स्थापना के समय उसे अल्पसंख्यक संस्थान का स्थान क्यों नहीं दिया गया ? यदि वह स्थान दिया जाता, तो विवाद उत्पन्न ही नहीं होता ।’ वे यहां पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे । (यदि अब्दुल्ला के बताने पर ऐसा करने से मुस्लिमों को वहां प्रवेशबंदी हो सकती है, तो अब हिन्दुओं को भी यह मांग कर वह स्थान दिलवाने के लिये प्रयास करना चाहिए ! – संपादक)
Selective Innocence, Dangerous Logic
If a student is radicalised at Al-Falah, who is responsible?
J&K CM Omar Abdullah’s remark amidst the Vaishno Devi University row reveals a troubling logic:
“Muslims in a Hindu medical college won’t become terrorists – but in Al-Falah, they… https://t.co/wLfHFOYAAV pic.twitter.com/olSXQmgntw— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 26, 2025
प्रवेश प्रक्रिया केवल पात्रता परीक्षाओं पर आधारित !
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया केवल ‘नीट’ (नॅशनल एलिजिबिलिटी कम एन्ट्रन्स् टेस्ट, अर्थात् राष्ट्रिय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा । चिकित्सकीय महाविद्यालय में प्रवेश हेतु यह परीक्षा अनिवार्य होती है) तथा अन्य पात्रता परीक्षाओं पर आधारित है, उसमें धर्म का विचार नहीं किया जाता । यदि संस्थान में विशिष्ट समाज के विद्यार्थी नहीं चाहिए, तो उसे ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ घोषित करना चाहिए । तब मुस्लिम तथा सिख विद्यार्थी वहां से हटकर अन्यत्र प्रवेश लेंगे । (सिख हिन्दुओं से पृथक नहीं हैं, अतः उन्हें कोई भी विरोध नहीं करेगा । अब्दुल्ला को हिन्दू तथा सिख में भेद नहीं करना चाहिए तथा मुस्लिम एवं सिख को समान नहीं समझना चाहिए ! – सम्पादक)
प्रवेश गुणवत्ता के आधार पर !
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जिन्हें प्रवेश मिला है, उन्हें वह गुणवत्ता के आधार पर मिला है । (अल्–फलाह विद्यापीठ के मुस्लिम चिकित्सकों में भी गुणवत्ता थी; किन्तु उन्होंने उसका उपयोग जिहादी आतंकवाद के लिये कर राष्ट्रद्रोह किया ! – संपादक) उन्हें अन्यत्र प्रवेश दिया जा सकता है; परंतु समाज पर आरोप नहीं करना चाहिए । एक घटना के कारण समस्त समाज पर दोषारोपण करना उचित नहीं है ।
संपादकीय भूमिका
|
नागपुर में मानसिक तनाव के कारण ‘नीट’ परीक्षार्थी छात्रा ने की आत्महत्या
(और इनकी सुनिए …) ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ ये सभी मूर्खतापूर्ण बातें – Abu Azmi
‘दारुल उलूम देवबंद’ आतंकियों का केंद्र होने से उसे ध्वस्त कीजिए – हिन्दू रक्षा दल की मांग
कोलकाता के सुरेंद्रनाथ महाविद्यालय के तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन के कार्यालय में मिली बडी धनराशि
जेजुरी में रसायनयुक्त भंडारे (हल्दी) के विक्रय के विरुद्ध भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते आक्रामक !
Wipro Corporate Jihad : आरोपी शाहिना रफीक को जांच के लिए पुणे बुलाया गया ।