परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत का मणिपुर में दिशादर्शन

इंफाल (मणिपुर) – भारत एक अमर समाज एवं संस्कृति का नाम है । अन्य संस्कृतियां आईं, चमकीं एवं लुप्त गईं (समाप्त हो गईं) । हमने उन सभी को उदय एवं अस्त होते देखा है, किन्तु हम आज भी यहीं हैं, एवं आगे भी रहेंगे । इसका कारण यह है कि हमने समाज का एक मूल सशक्त संपर्क तंत्र निर्माण किया है । इसलिए, हिन्दू समाज का अस्तित्व बना रहेगा । यदि हिन्दू नहीं रहेंगे, तो विश्व नहीं रहेगा । इसका कारण यह है, कि हिन्दू समाज समय-समय पर विश्व को धर्म का योग्य अर्थ बताता है एवं उसका मार्गदर्शन करता है । यह हमारा ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने कहा । प.पू. भागवत मणिपुर दौरे पर हैं ।
सरसंघचालक द्वारा इंगित किए गए अपरिहार्य सिद्धांत !
१. विश्व के सभी देशों पर भिन्न-भिन्न प्रकार की परिस्थितियां थोपी गई हैं । इसमें कुछ देश समाप्त हो गए। ग्रीस, मिस्र एवं रोम सभी समाप्त हो गए।
२. हर समस्या का अंत संभव है । जब समाज ने यह निश्चित किया कि नक्सलवाद सहन नहीं करना चाहिए, तो वह समाप्त होता गया ।
३. ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्यास्त नहीं हुआ; अपितु भारत में उसका सूर्यास्त प्रारंभ हुआ । इसके लिए हमने १८५७ से १९४७ तक ९० वर्ष प्रयत्न किये। हमने स्वतंत्रता के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया ।
४. देश को कभी किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए । हमारी अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर’ होनी चाहिए । हमारे पास आर्थिक, सैन्य एवं प्रज्ञा संपन्नता होनी चाहिए । उन्हें सशक्त करना होगा । देश सुरक्षित सुखी व समृद्ध रहना चाहिए ।
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता ने कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष को दिया कानूनी नोटिस ।
‘हिन्दुओं के देवता पत्थर हैं’, ऐसा हिन्दू द्वेषी वक्तव्य देनेवाले पत्रकार हुसैन शेख ने हिन्दुओं से क्षमायाचना की ।
जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसे कठोर दंड मिलना ही चाहिए !
हिन्दू धर्मप्रेमी युवक-युवतियों, ऋषि-मुनियों तथा देवताओं द्वारा की जानेवाली स्थूल कृतियों के पीछेका सूक्ष्म धर्मशास्त्र समझे बिना उनका अनुकरण न करें ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ
‘श्रीसत्शक्ति, श्रीचित्शक्ति और सच्चिदानंद’ अध्यात्म के शब्दब्रह्म हैं तथा उनमें अत्यधिक शक्ति विद्यमान होती है और उन शब्दों का उच्चारण करने पर उनसे शक्ति, चैतन्य एवं तत्त्व प्राप्त होता है ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी