मंदिरों के माध्यम से गौशालाएं आरंभ कर गोवंश की रक्षा करना
छोटे एवं उपेक्षित मंदिरों का जीर्णोद्धार करना
अन्नछत्र (भंडारे) चलाना
गुरुकुल का निर्माण और संचालन करना
धर्मशिक्षा वर्ग आरंभ करना
बच्चों के लिए बाल-संस्कार वर्ग आरंभ करना, स्तोत्र-पाठ, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन करना
सामूहिक उपासना के कार्यक्रम आयोजित करना
श्रद्धालुओं को सेवा उपलब्ध कराना : मंदिर की स्वच्छता, त्योहारों, उत्सवों, मेलों के समय सेवा प्रदान करना
मंदिर तथा परिसर की सात्त्विकता बढाने के लिए सामूहिक स्तोत्र-पाठ, नामजप करना
मंदिर में स्वयं की तथा मंदिर की पवित्रता बनाए रखना, मंदिर में सेवाएं कैसे करें ? संभावित कठिनाईयां, समस्याओं पर उपाय करना, भीड का प्रबंधन करना, इस संबंध में अन्य मंदिरों के सेवकों, साथ ही श्रद्धालुओं को प्रशिक्षण देना
मंदिरों के सम्मेलनों का आयोजन कर मंदिर के न्यासियों (ट्रस्टियों) को संगठित करना