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(‘सीआईए’ अर्थात ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी’ – केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी)

ढाका (बांग्लादेश) : पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के पीछे अमेरिका एवं पाकिस्तान का हाथ होने के आरोप के पश्चात, अब दीप हलदर, जयदीप मजूमदार तथा साहिदुल हसन खोकन द्वारा लिखी गई एवं ‘जगरनॉट’ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होने वाली पुस्तक ‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश : द स्टोरी ऑफ एन अनफिनिश्ड रेवोल्यूशन’ (एक अधूरी क्रांति की कहानी) में इस संबंध में कुछ अन्य रहस्योद्घाटन किए गए हैं । यह पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है ।
🇧🇩 Upcoming book “Inshallah Bangladesh: The Story of an Unfinished Revolution” claims CIA’s hand behind Bangladesh’s regime change
📘 Former Home Minister Asaduzzaman Khan says US intelligence long plotted to oust Sheikh Hasina, using Army Chief Gen. Wakar who betrayed her
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— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 4, 2025
इसमें दावा किया गया है कि शेख हसीना सरकार में गृह मंत्री रहे असदज्जमान खान के अनुसार, हसीना को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी यानी ‘सीआईए’ ने लंबे समय से एक सटीक योजना बनाई थी । हमें पता ही नहीं था कि हसीना के सगे-संबंधी होनेवाले सेना प्रमुख वकार-उज-जमां पर ‘सीआईए’ का प्रभाव था तथा उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंपा ।
पुस्तक में किए गए मुख्य दावे :

१. उच्च अधिकारियों की मिलीभगत : असदज्जमान खान ने बताया कि बांग्लादेश की प्रमुख सैन्य गुप्तचर एजेंसी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा गुप्तचर विभाग ने प्रधानमंत्री हसीना को यह चेतावनी नहीं दी थी कि वकार उनके साथ द्रोह करने की तैयारी में हैं । खान ने आशंका जताई है कि इस षड्यंत्र में कुछ उच्च अधिकारी भी सम्मिलित हो सकते हैं ।
२. ‘सीआईए’ को दुर्बल नेतृत्व चाहिए : असदज्जमान खान के अनुसार, ‘सीआईए’ को दक्षिण एशिया में सशक्त नेतृत्व नहीं चाहिए होता है । अमेरिका ऐसे देशों में दुर्बल सरकारों को प्राथमिकता देता है, ताकि उसके हित सरलता से पूरे हो सकें । बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन से अमेरिका को लाभ होने के २ कारण हैं : * पहला, दक्षिण एशिया में बहुत शक्तिशाली राष्ट्र प्रमुख नहीं होने चाहिए । नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग एवं शेख हसीना जैसे सशक्त नेता उपमहाद्वीप में हों, तो अमेरिका के लिए अपना हित साधना कठिन हो जाता है । अमेरिका की रणनीति सदा से दुर्बल सत्ताओं के साथ रहने की रही है । * दूसरा, इस सता परिवर्तन के पीछे एक तात्कालिक कारण ‘सेंट मार्टिन द्वीप’ था ।
३. सत्ता पलट की तुलना महाभारत से : असदज्जमान खान ने इस सता परिवर्तन को महाभारत की उपमा दी । उन्होंने कहा कि जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंसकर अपने ही लोगों के हाथों युद्ध के मैदान में गिरा, वैसे ही वकार ने भी हसीना को सत्ता से हटाने के लिए बांग्लादेश की कट्टरपंथी शक्तियों से हाथ मिला लिया । ‘जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश’ ने पहले भी सभी आतंकवादी शक्तियों को एकजुट किया था ।
४. वकार किसका सहयोगी ? : लेखक दीप हलदर के अनुसार, यह उजागर करना बांग्लादेश में और अधिक अशांति उत्पन्न कर सकता है । जनरल वकार की नियुक्ति हसीना ने स्वयं सत्ता से हटने से पहले की थी । हलदर ने कहा कि पिछले २ वर्षों में ‘नेशनल सिटीजन्स पार्टी’ के नेताओं ने लगातार यह बयान दिया कि जनरल वकार भारत के सहयोगी थे; परंतु अब सामने आई वास्तविकता के उपरांत यह प्रश्न उठता है कि वकार वास्तव में किसके पक्ष में थे ?
५. पाकिस्तान की ‘आईएसआई’ की भूमिका : पुस्तक में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी ‘इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आई.एस.आई.)’ जमात के साथ मिलकर काम कर रही थी । कुछ ‘आई.एस.आई.’ प्रशिक्षित व्यक्ति जमात में घुस गए थे एवं जून महीने के अंत में हुई पुलिस हत्याओं में उनका हाथ था ।
अमेरिका को ‘सेंट मार्टिन द्वीप’ क्यों चाहिए ?![]() शेख हसीना ने सत्ता से हटाए जाने से पहले स्वयं एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यदि उन्होंने अमेरिका को ‘सेंट मार्टिन द्वीप’ दे दिया होता, तो वह निर्विघ्न रूप से सत्ता में रह सकती थीं । महत्त्व :रणनीतिक स्थान : भौगोलिक रूप से यह द्वीप अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसे विश्व के किसी भी भाग से समुद्री मार्ग से सरलता से पहुंचा जा सकता है । यह केवल एक व्यापारिक जलमार्ग नहीं, अपितु रणनीतिक रूप से भी अति संवेदनशील क्षेत्र है । भूगोल : बंगाल की खाडी के उत्तर-पूर्वी भाग में, बांग्लादेश-म्यांमार सीमा के पास स्थित यह ७.३ किलोमीटर लंबा द्वीप समुद्र तल से केवल ३.६ मीटर की ऊंचाई पर है । ऐतिहासिक नाम : वर्ष १९०० में भारत ने भूमि सर्वेक्षण के समय इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लिया तथा तत्कालीन चटगांव के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) मार्टिन के नाम पर इसे ‘सेंट मार्टिन द्वीप’ नाम दिया गया । निगरानी : इस द्वीप से बंगाल की खाडी एवं आसपास के समुद्री क्षेत्र की गतिविधियों पर दृष्टि रखी जा सकती है; इसीलिए यह बांग्लादेश के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । वैश्विक प्रभाव : दक्षिण एशिया के राजनीतिक संतुलन में भी इस द्वीप की भूमिका निर्णायक है । व्यापारिक एवं सामरिक कारणों से चीन तथा अमेरिका दोनों इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढाना चाहते हैं, तथा भारत के लिए भी ‘सेंट मार्टिन द्वीप’ का रणनीतिक महत्त्व बहुत अधिक है । अमेरिकी रुचि : अमेरिका की उत्सुकता इसलिए है कि यदि इस द्वीप पर प्रभाव स्थापित हो गया, तो वहां से पूरे क्षेत्र पर, विशेष रूप से चीन एवं भारत पर दृष्टि रखना सरल हो जाएगा । |

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